भारत का ड्रोन पारितंत्र

पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान और प्रौद्योगिकी

समाचार में

  • भारत ने प्रायोगिक ड्रोन पायलटों से एक सुदृढ़ विनियमित पारितंत्र  तक का विकास किया है। फरवरी 2026 तक, 38,500 से अधिक ड्रोन अद्वितीय पहचान संख्या (UIN) के माध्यम से पंजीकृत किए जा चुके हैं।

ड्रोन पारितंत्र का विकास

  • विगत दो दशकों में, ड्रोन तकनीक भारत में प्रायोगिक उपयोग से एक संरचित पारितंत्र  में विकसित हुई है, जिसने सार्वजनिक सेवा वितरण, अवसंरचना प्रबंधन, कृषि और राष्ट्रीय सुरक्षा को रूपांतरित किया है।
  • ड्रोन तकनीक भारत में कुशल और उत्तरदायी सार्वजनिक सेवा वितरण का एक प्रमुख साधन बन गई है।
  • ये शासन में  कार्यकुशलता, सटीकता और पारदर्शिता को बढ़ा रहे हैं।

भारत का दृष्टिकोण

  • भारत सरकार ने उदारीकृत ड्रोन नियम, डिजिटल स्काई प्लेटफ़ॉर्म, कौशल विकास कार्यक्रम और विनिर्माण प्रोत्साहनों जैसी प्रगतिशील नीतियों के माध्यम से अपनाने की गति तेज़ की है, जिससे ड्रोन सरकारी योजनाओं और सार्वजनिक सेवाओं का अभिन्न अंग बन गए हैं।
  • ड्रोन को SVAMITVA योजना (गाँवों का सर्वेक्षण और उन्नत तकनीक से मानचित्रण) और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) जैसी प्रमुख सरकारी योजनाओं में एकीकृत किया गया है।

अनुप्रयोग

  • कृषि और किसान सेवाएँ: भूमि सर्वेक्षण, सटीक कृषि, अवसंरचना निरीक्षण, आपदा प्रबंधन, परिवहन निगरानी और रक्षा में ड्रोन का उपयोग।
    • नमो ड्रोन दीदी योजना (नवंबर 2023) महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को आधुनिक कृषि पद्धतियों हेतु ड्रोन उपलब्ध कराने की प्रमुख पहल है।
  • भूमि मानचित्रण: SVAMITVA योजना (अप्रैल 2020) ग्रामीण जनसंख्या क्षेत्रों के ड्रोन-आधारित सर्वेक्षण हेतु शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य भूमि विवादों का समाधान और बैंक ऋण तक पहुँच में सुधार करना है।
  • राजमार्ग विकास हेतु हवाई मानचित्रण: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) सभी राजमार्ग परियोजनाओं के लिए मासिक ड्रोन-वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य करता है।
  • आपदा प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया: ड्रोन प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भारत की प्रतिक्रिया क्षमता को बेहतर बना रहे हैं। NECTAR ने आपदा स्थितियों के लिए विशेष ड्रोन प्रणाली विकसित की है।
  • रेलवे ड्रोन निगरानी: रेलवे मंत्रालय ने सभी ज़ोन और मंडलों को रेलवे ट्रैक, पुल और अन्य अवसंरचना की निगरानी एवं रखरखाव हेतु UAV/ड्रोन तैनात करने का निर्देश दिया है।
    • रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने रेल यार्ड, स्टेशन परिसर और रेलवे ट्रैक पर सुरक्षा निगरानी के लिए ड्रोन अपनाए हैं।
  • रक्षा में ड्रोन: ड्रोन भारत की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये सीमाओं की निगरानी, खुफिया जानकारी एकत्र करने और सटीक हमले करने में सहायक हैं।
    • ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय ड्रोन और लुटेरिंग म्यूनिशन ने शत्रु लक्ष्यों को सुरक्षित एवं सटीक रूप से नष्ट किया।
    • ड्रोन वायु रक्षा प्रणालियों, रडार नेटवर्क और कमांड केंद्रों के साथ मिलकर महत्वपूर्ण अवसंरचना की रक्षा करते हैं तथा खतरों पर शीघ्र प्रतिक्रिया देते हैं।
  • शासन के लिए लाभ: ये सार्वजनिक सेवा वितरण में कार्यकुशलता, सटीकता और पारदर्शिता को बढ़ाते हैं।

सरकारी कदम और नीतियाँ

  • ड्रोन नियम, 2021 और संशोधन (2022–2023): अनुमोदन प्रपत्रों को 25 से घटाकर 5 किया गया, शुल्क का युक्तिकरण किया गया, 90% वायु क्षेत्र को ग्रीन ज़ोन घोषित किया गया, पायलट लाइसेंस को रिमोट पायलट प्रमाणपत्र से प्रतिस्थापित किया गया और पासपोर्ट आवश्यकता हटाई गई।
    • नागरिक ड्रोन संचालन: 500 किलोग्राम तक वजन वाले ड्रोन के लिए अनुमति दी गई, जिससे वाणिज्यिक और औद्योगिक अनुप्रयोगों का विस्तार हुआ।
  • उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI): ड्रोन और ड्रोन घटकों हेतु ₹120 करोड़ का अनुमोदित प्रावधान। इसका उद्देश्य उच्च-मूल्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है।
  • ड्रोन पर GST: सितंबर 2025 में ड्रोन पर GST को घटाकर समान 5% कर दिया गया। पहले की 18% और 28% की दरें समाप्त कर दी गईं। इस सरलीकृत कर व्यवस्था ने ड्रोन के व्यापक वाणिज्यिक और व्यक्तिगत उपयोग को समर्थन प्रदान किया।
    • NextGen GST सुधार ड्रोन पायलट प्रशिक्षण हेतु प्रयुक्त उड़ान और मोशन सिमुलेटर पर भी लागू होता है।
  • डिजिटल स्काई (2018) और eGCA: ड्रोन पंजीकरण, रिमोट पायलट प्रमाणन, प्रकार प्रमाणन और RPTO प्राधिकरण जैसी नियामक सेवाओं को डिजिटल स्काई प्लेटफ़ॉर्म से eGCA में स्थानांतरित कर दिया गया है।
    • इसके अतिरिक्त, उड़ान योजना और वायु क्षेत्र मानचित्र जैसी परिचालन सेवाएँ डिजिटल स्काई प्लेटफ़ॉर्म से ही एकीकृत रहती हैं।
  • प्रचार और सहयोग प्लेटफ़ॉर्म: भारत ड्रोन शक्ति, भारत ड्रोन महोत्सव और ड्रोन अंतर्राष्ट्रीय एक्सपो जैसे प्लेटफ़ॉर्म ड्रोन-एज़-ए-सर्विस (DaaS) स्टार्टअप्स और नए व्यापार मॉडलों को प्रोत्साहित करते हैं।
    • ये स्वदेशी तकनीकों का प्रदर्शन करते हैं और स्टार्टअप्स, MSMEs, उद्योग तथा अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देते हैं।
  • प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण: DGCA-स्वीकृत प्रशिक्षण कार्यक्रम और दूरस्थ पायलट प्रशिक्षण संगठन(RPTOs) प्रमाणित ड्रोन पायलटों के राष्ट्रीय पूल का विस्तार कर रहे हैं।
  • स्वायान मानव रहित विमान प्रणालियों (Unmanned Aircraft Systems) में मानव संसाधन विकास हेतु क्षमता निर्माण कार्यक्रम है, जो प्रशिक्षण और प्रतिभा निर्माण का समर्थन करता है।
  • ड्रोन अनुप्रयोग और अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय नवाचार चुनौती (NIDAR) छात्रों और शोधकर्ताओं को संलग्न करता है।
    • यह आपदा प्रबंधन और सटीक कृषि हेतु स्वायत्त ड्रोन को बढ़ावा देता है।
    • इस कार्यक्रम में ₹40 लाख का पुरस्कार कोष है और यह स्टार्टअप इनक्यूबेशन को भी समर्थन प्रदान करता है।

निष्कर्ष और आगे की राह

  • भारत में ड्रोन कृषि, अवसंरचना, आपदा प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा में दक्षता, पारदर्शिता एवं लचीलापन सुधारकर सामाजिक-आर्थिक विकास को गति दे रहे हैं।
  • प्रगतिशील नीतियों, वित्तीय प्रोत्साहनों और कौशल विकास पहलों से समर्थित यह क्षेत्र तीव्र गति से विस्तार कर रहा है।
  • स्वदेशी विनिर्माण और सरकारी एकीकरण पर बल भारत को भविष्य में मानव रहित हवाई प्रणालियों का वैश्विक नेता बनने की दिशा में अग्रसर करता है।

स्रोत :PIB

 

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