पश्चिमी विक्षोभ

पाठ्यक्रम: GS1/ जलवायु विज्ञान

संदर्भ

  • एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी भारत में पहुँचा है और इस क्षेत्र को प्रभावित करते हुए व्यापक वर्षा, अत्यधिक हिमपात तथा गरज-चमक के साथ तूफ़ान लेकर आया है।

पश्चिमी विक्षोभ क्या है?

  • पश्चिमी विक्षोभ (WD) एक अतिरिक्त-उष्णकटिबंधीय (extra-tropical) मौसम प्रणाली है, जो भारत के बाहर उत्पन्न होती है और पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ती है। यह उत्तरी भारतीय उपमहाद्वीप के भागों में, विशेषकर शीत ऋतु और वसंत ऋतु के आरंभिक समय में, वर्षा, हिमपात एवं तूफ़ान लेकर आती है।
  • उत्पत्ति और निर्माण : पश्चिमी विक्षोभ भूमध्यसागर क्षेत्र, काला सागर या कैस्पियन सागर से उत्पन्न होते हैं।
    • ये तब बनते हैं जब ठंडी ध्रुवीय वायु गर्म, आर्द्र वायु से मिलती है और निम्न-दाब प्रणाली का निर्माण करती है।
    • ये प्रणालियाँ ऊपरी वायुमंडल में पश्चिमी पवनों द्वारा, विशेषकर उप-उष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट धारा द्वारा, पूर्व की ओर ले जाई जाती हैं।
  • भारत में प्रभावित क्षेत्र : जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश।

पश्चिमी विक्षोभ वर्षा और हिमपात कैसे लाते हैं?

  • यात्रा करते समय पश्चिमी विक्षोभ आसपास के समुद्रों से आर्द्रता एकत्रित करते हैं।
  • जब यह आर्द्र वायु हिमालय पर्वतों से टकराती है या तापमान के विपरीत प्रभावों के कारण ऊपर उठने को बाध्य होती है, तो यह ऊपर उठकर ठंडी हो जाती है।
  • शीतलन से संघनन होता है, जिससे बादल बनते हैं और मैदानों में वर्षा तथा ऊँचे स्थानों पर हिमपात होता है।

पश्चिमी विक्षोभ का महत्व 

  • उत्तर-पश्चिमी भारतीय क्षेत्र (जम्मू एवं कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) में वार्षिक वर्षा का लगभग 30% शीत ऋतु में प्राप्त होता है तथा यह मुख्यतः पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ा होता है।
  • पश्चिमी विक्षोभ से संबंधित वर्षा हिमालयी जलवायु, हिमनद, हिम-जल भंडारण, वनस्पति, जीव-जंतु, कृषि फसलें और मानव जीवन को प्रभावित करती है।
  • शीत ऋतु की वर्षा रबी फसलों (विशेषकर गेहूँ, सरसों, जौ) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। पर्याप्त वर्षा मृदा की आर्द्रता, फसल उत्पादन और खाद्य सुरक्षा को बेहतर बनाती है।

संबद्ध जोखिम 

  • तीव्र वर्षा, हिमपात या ओलावृष्टि से भूस्खलन, हिमस्खलन तथा कृषि और मानव निर्मित संरचनाओं को क्षति।
  • घना से अत्यधिक घना कोहरा, जिससे विमानन, रेल और सड़क परिवहन सेवाओं में व्यवधान।
  • पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के बाद शीत लहर और अत्यधिक ठंडे दिन की स्थिति।

निष्कर्ष

  • पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत की शीत ऋतु की जलवायु प्रणाली का एक महत्वपूर्ण घटक बने रहते हैं, जो आवश्यक वर्षा और हिमपात प्रदान करते हैं।
  • किन्तु, गर्म वातावरण के कारण इनकी तीव्रता में वृद्धि हो रही है, जिससे अत्यधिक वर्षा, फसल क्षति, शहरी बाढ़ और हिमस्खलन का जोखिम बढ़ रहा है। अतः बेहतर पूर्वानुमान और तैयारी की आवश्यकता अत्यधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।

स्रोत: IT

 

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