पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- विश्व व्यापार संगठन (WTO) की वर्ल्ड ट्रेड रिपोर्ट 2025 में पाया गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में आगामी 15 वर्षों में वैश्विक व्यापार को लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ाने की क्षमता है, बशर्ते कि महत्वपूर्ण नीतिगत और अवसंरचनात्मक अंतरालों को दूर किया जाए।
व्यापार-आधारित विकास के प्रेरक के रूप में AI
- व्यापार सुविधा: WTO के सिमुलेशन के अनुसार, लॉजिस्टिक्स और कस्टम्स में AI व्यापार लागत को 15% तक कम कर सकता है।
- उत्पादकता में वृद्धि: AI-संचालित स्वचालन विनिर्माण और सेवाओं में दक्षता को बढ़ाता है, जिससे प्रतिस्पर्धात्मकता में विस्तार होता है।
- डिजिटली डिलीवेरेबल सेवाएं: लीगल-टेक, AI-संचालित कोडिंग, टेलीमेडिसिन और ई-लर्निंग जैसी सेवाएं 2040 तक 40% से अधिक बढ़ने की संभावना है।
- AI-सक्षम वस्तुएं: चिप्स, सर्वर और सेंसर का व्यापार AI अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जिसका मूल्य 2023 में USD 2.3 ट्रिलियन था।
भारत के व्यापार परिवर्तन के लिए AI का उपयोग
- सेवाओं के निर्यात को सुदृढ़ करना: भारत ने 2023–24 में IT और IT-सक्षम सेवाओं का USD 250+ बिलियन मूल्य का निर्यात किया, जिससे वह डिजिटली डिलीवेरेबल सेवाओं में वैश्विक नेता बन गया।
- AI सॉफ्टवेयर समाधान, AI-संचालित स्वास्थ्य सेवा (टेलीमेडिसिन), फिनटेक, ई-लर्निंग और लीगल-टेक सेवाओं के निर्यात को बढ़ाकर भारत की प्रमुखता को सुदृढ़ कर सकता है।
- विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना: पूर्वानुमानित रखरखाव, गुणवत्ता नियंत्रण और आपूर्ति श्रृंखला अनुकूलन में AI भारतीय विनिर्माताओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सहायता कर सकता है।
- ‘मेक इन इंडिया’ और PLI योजनाओं के साथ एकीकरण से भारत वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (GVCs) में अधिक हिस्सेदारी प्राप्त कर सकता है।
- कृषि व्यापार को बढ़ावा देना: AI-सक्षम सटीक खेती, उपज पूर्वानुमान और लॉजिस्टिक्स अपव्यय को कम कर सकते हैं और कृषि उत्पादों में निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ा सकते हैं।
- SMEs और स्टार्टअप्स को सशक्त बनाना: अनुवाद, अनुपालन और बाजार खुफिया के लिए AI उपकरण भारतीय SMEs को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में प्रवेश बाधाओं को पार करने में सहायता कर सकते हैं।
- भारत में 6.3 करोड़ MSMEs के साथ, AI को अपनाने से उनके निर्यात में भागीदारी को काफी बढ़ाया जा सकता है।
भारत द्वारा उठाए गए कदम
- नीति आयोग की “#AIforAll” (2018) ने भारत की प्रथम व्यापक AI रणनीति प्रस्तुत की, जो स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा, स्मार्ट शहरों एवं स्मार्ट गतिशीलता पर केंद्रित थी।
- भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM), जिसे 2021 में ₹76,000 करोड़ के आवंटन के साथ मंजूरी दी गई, का उद्देश्य चिप निर्माण, डिस्प्ले निर्माण और डिज़ाइन के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान कर एक सुदृढ़ घरेलू सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है।
- इंडियाAI मिशन, ₹10,371.92 करोड़ के आवंटन के साथ, सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में रणनीतिक कार्यक्रमों एवं साझेदारियों के माध्यम से AI नवाचार को उत्प्रेरित करने वाला एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करता है।
चुनौतियाँ
- डिजिटल अंतर: वैश्विक स्तर पर केवल 41% छोटे फर्म AI का उपयोग करते हैं, जबकि बड़े फर्मों में यह आंकड़ा 60% से अधिक है।
- निम्न और निम्न-मध्यम आय वाले देशों में AI अपनाने की दर 33% से कम है।
- आय लाभ में असमानता: यदि अंतर नहीं समाप्त किया गया, तो उच्च-आय वाले देशों में 2040 तक आय में ~14% की वृद्धि हो सकती है, जबकि निम्न-आय वाले देशों को केवल ~8% लाभ मिलेगा।
- नियामक विखंडन: विभिन्न क्षेत्रों में AI नियमों की विविधता अनुपालन लागत को बढ़ाती है और वैश्विक व्यापार प्रवाह को विभाजित कर सकती है।
- एकाग्रता का जोखिम: कुछ बड़े फर्म AI विकास और अवसंरचना पर प्रभुत्वशाली हैं, जिससे एकाधिकार निर्भरता एवं व्यापार लाभों पर नियंत्रण की चिंता बढ़ती है।
आगे की राह घरेलू उपाय:
- ब्रॉडबैंड, क्लाउड अवसंरचना और सस्ती AI हार्डवेयर में निवेश करें।
- AI-संयुक्त उद्योगों के लिए श्रमिकों को तैयार करने हेतु राष्ट्रीय कौशल कार्यक्रम लागू करें।
- प्रतिस्पर्धा नीति यह सुनिश्चित करे कि एकाधिकार प्रभुत्व न हो।
वैश्विक सहयोग:
- AI मानकों, नैतिक नियमों और डेटा शासन ढांचे का सामंजस्य स्थापित करें।
- गरीब देशों के लिए WTO की क्षमता निर्माण को बढ़ाएं।
- डिजिटल विखंडन से बचने के लिए बहुपक्षीय सहमति को बढ़ावा दें।
Source: TOI
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