पाठ्यक्रम: GS1/समाज, GS2/ शासन
संदर्भ
- संयुक्त राष्ट्र महिला और संयुक्त राष्ट्र DESA द्वारा जारी संयुक्त राष्ट्र जेंडर स्नैपशॉट 2025 में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि यदि तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो 2030 तक 351 मिलियन से अधिक महिलाएं और लड़कियां अत्यधिक गरीबी में रह सकती हैं।
मुख्य निष्कर्ष
- स्थायी गरीबी: महिला गरीबी 2020 से 10% पर स्थिर बनी हुई है। जलवायु परिवर्तन और संघर्ष कमजोरियों को बढ़ा रहे हैं।
- कार्य और प्रतिनिधित्व: महिलाएं पुरुषों की तुलना में 2.5 गुना अधिक समय बिना वेतन के घरेलू और देखभाल कार्यों में व्यतीत करती हैं। उनके पास विश्व भर में एक तिहाई से भी कम संसदीय सीटें हैं।
- 102 देशों में आज तक कोई महिला राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख नहीं रही है।
- डिजिटल अंतर: 2024 में 70% पुरुषों ने इंटरनेट का उपयोग किया, जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा 65% था।
- इस अंतर को समाप्त करने से 3 करोड़ महिलाओं को गरीबी से बाहर निकाला जा सकता है, 343 मिलियन महिलाओं एवं लड़कियों को लाभ मिल सकता है, और 2030 तक वैश्विक GDP में $1.5 ट्रिलियन की वृद्धि हो सकती है।
- खाद्य असुरक्षा और हिंसा: 2024 में 6.4 करोड़ अधिक महिलाएं पुरुषों की तुलना में खाद्य असुरक्षा का सामना कर रही थीं।
- 15–49 वर्ष की उम्र की प्रत्येक 8 में से 1 महिला ने विगत वर्ष अंतरंग साथी द्वारा हिंसा का अनुभव किया।
- 18.6% युवा महिलाओं की शादी 18 वर्ष से पहले हो गई (2014 में यह आंकड़ा 22% था)।
- 2024 में 676 मिलियन महिलाएं और लड़कियां घातक संघर्ष के 50 किमी के दायरे में रह रही थीं, जो 1990 के दशक के बाद सबसे अधिक है।
- जलवायु परिवर्तन: जलवायु परिवर्तन की सबसे खराब स्थिति में 2050 तक 158 मिलियन अतिरिक्त महिलाएं गरीबी में जा सकती हैं।
| भारत-विशिष्ट आयाम – महिला श्रम बल भागीदारी दर (FLFPR): 2023 में लगभग 37% (ILO), जो दक्षिण एशिया में सबसे कम है। – राजनीतिक प्रतिनिधित्व: लोकसभा में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 15% है, हालांकि महिला आरक्षण अधिनियम 2023 में 33% सीटों का वादा किया गया है। – शिक्षा: स्कूल नामांकन में लैंगिक समानता प्राप्त हो गई है, लेकिन माध्यमिक स्तर पर लड़कियों की ड्रॉपआउट दर बढ़ जाती है, जिसका कारण है बाल विवाह, सुरक्षा और सामाजिक मान्यताएं। – डिजिटल अंतर: NFHS-5 के अनुसार, केवल 33% महिलाएं इंटरनेट का उपयोग करती हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 57% है। महिलाओं के विरुद्ध हिंसा व्यापक रूप से फैली हुई है; NCRB 2022 के आंकड़ों के अनुसार महिलाओं के विरुद्ध अपराध के 4 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए। |
लैंगिक समानता के लिए वैश्विक प्रयास
- संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य 5: इसका उद्देश्य लैंगिक समानता प्राप्त करना और सभी महिलाओं एवं लड़कियों को सशक्त बनाना है।
- बीजिंग घोषणा और कार्य योजना: यह 1995 में महिलाओं पर चौथे विश्व सम्मेलन में अपनाया गया एक ऐतिहासिक संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव है, जो लैंगिक समानता और महिलाओं व लड़कियों को सशक्त बनाने के लिए एक व्यापक वैश्विक खाका प्रदान करता है।
- महिलाओं के विरुद्ध सभी प्रकार के भेदभाव के उन्मूलन पर कन्वेंशन (CEDAW): यह नीति सुधारों और लैंगिक भेदभाव के विरुद्ध कानूनी सुरक्षा को प्रोत्साहित करता है।
भारत की लैंगिक समानता की पहलें
- पोषण अभियान: इस मिशन का उद्देश्य बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के पोषण परिणामों में सुधार करना है।
- महिलाओं के लिए डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम: यह प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (PMGDISHA) का हिस्सा है और महिलाओं को ई-गवर्नेंस सेवाओं एवं वित्तीय प्लेटफार्मों तक पहुंच प्रदान कर डिजिटल अर्थव्यवस्था में भाग लेने के लिए सशक्त बनाता है।
- वन स्टॉप सेंटर योजना (सखी केंद्र): इसका उद्देश्य हिंसा से प्रभावित महिलाओं को एक ही छत के नीचे पुलिस सहायता, चिकित्सा सहायता, कानूनी सहायता और परामर्श, मनो-सामाजिक परामर्श, अस्थायी आश्रय आदि जैसी एकीकृत सेवाएं प्रदान करना है।
- वुमन इन साइंस एंड इंजीनियरिंग–किरण (WISE KIRAN) कार्यक्रम: इसने 2018 से 2023 तक लगभग 1,962 महिला वैज्ञानिकों को समर्थन प्रदान किया है।
- मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम, 2017: यह निजी क्षेत्र और सरकारी क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं को 26 सप्ताह का सवेतन मातृत्व अवकाश प्रदान करता है।
- नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023: यह लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए कुल सीटों की एक-तिहाई आरक्षित करने का प्रस्ताव करता है।
| संयुक्त राष्ट्र महिला – संयुक्त राष्ट्र महिला संयुक्त राष्ट्र की वह इकाई है जो लैंगिक समानता और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए समर्पित है। – महिलाओं एवं लड़कियों के लिए एक वैश्विक चैंपियन, संयुक्त राष्ट्र महिला की स्थापना 2010 में उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने की प्रगति को तीव्र करने के लिए की गई थी। – मुख्यालय: न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र DESA – UNDESA, या संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक मामलों का विभाग, संयुक्त राष्ट्र की एक संस्था है जो 2030 सतत विकास एजेंडा एवं 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) पर केंद्रित संयुक्त राष्ट्र के विकास प्रयासों का समर्थन करती है। – यह वैश्विक विकास नीतियों और राष्ट्रीय कार्रवाइयों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है, विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए विश्लेषण, डेटा एवं क्षमता निर्माण प्रदान करता है। |
Source: DTE
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