पाठ्यक्रम: GS2/IR
संदर्भ
- भारत ने 2025 में मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम की वाराणसी यात्रा के दौरान मॉरीशस के लिए 680 मिलियन अमेरिकी डॉलर का विशेष आर्थिक पैकेज घोषित किया, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक और विकास सहयोग को सुदृढ़ करना है।
मुख्य विशेषताएँ
- इस विशेष आर्थिक पैकेज के अंतर्गत भारत मॉरीशस में कम से कम 10 परियोजनाओं को लागू करने में सहायता करेगा, जिनमें बंदरगाहों, हवाई अड्डों और सड़कों जैसे प्रमुख बुनियादी ढांचे का उन्नयन, साथ ही नए स्कूलों एवं अस्पतालों की स्थापना शामिल है।
- लगभग 440 मिलियन अमेरिकी डॉलर (अनुदान-सह-ऋण रेखा) का उपयोग बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए किया जाएगा, जैसे SSR अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक नया एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर का निर्माण और मोटरवे M4 का विकास।
- मॉरीशस में UPI और RuPay कार्ड के सफल लॉन्च के पश्चात, दोनों पक्ष स्थानीय मुद्राओं में द्विपक्षीय व्यापार को सक्षम करने की दिशा में कार्य करेंगे, ।
- यह पैकेज लोगों के बीच सुदृढ़ संबंधों को दर्शाता है, क्योंकि मॉरीशस की जनसंख्या में 68% से अधिक भारतीय मूल के लोग है, जिससे द्विपक्षीय सद्भावना सुदृढ़ होती है।
- पोर्ट लुई बंदरगाह के संयुक्त पुनर्विकास और पुनर्गठन के माध्यम से मॉरीशस को एक मजबूत क्षेत्रीय समुद्री केंद्र बनाया जाएगा।
भारत-मॉरीशस द्विपक्षीय संबंध
- राजनयिक संबंध: भारत और मॉरीशस ने 1948 में राजनयिक संबंध स्थापित किए और एशियाई महाद्वीप में प्रमुख व्यापारिक साझेदार बन गए।
- व्यावसायिक संबंध: वित्त वर्ष 2022-2023 में भारत से मॉरीशस को निर्यात 462.69 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, मॉरीशस से भारत को निर्यात 91.50 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा और कुल व्यापार 554.19 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।
- दोहरा कर बचाव समझौता (DTAA): 1982 में हस्ताक्षरित, जिससे गैर-निवासी निवेशकों को दोहरे करों से बचने में सहायता मिलती है।
- CECPA समझौता: भारत और मॉरीशस ने 2021 में व्यापक आर्थिक सहयोग और साझेदारी समझौता (CECPA) पर हस्ताक्षर किए, जो भारत का किसी अफ्रीकी देश के साथ प्रथम व्यापार समझौता है।
- FDI स्रोत: वित्त वर्ष 2023-24 में मॉरीशस भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत रहा, सिंगापुर के प्रथम स्थान पर है ।
- रक्षा संबंध: भारत मॉरीशस का प्रमुख रक्षा साझेदार है, जो प्लेटफॉर्म अधिग्रहण, क्षमता निर्माण, संयुक्त गश्त, जल विज्ञान सेवाओं आदि में सहयोग करता है।
- प्रथम समझौता: मॉरीशस को डोर्नियर विमान और एक उन्नत हल्का हेलीकॉप्टर (ध्रुव) पट्टे पर स्थानांतरित किया गया।
- दूसरा समझौता: मॉरीशस को रक्षा उपकरण खरीदने के लिए 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर की ऋण रेखा।
- अंतरिक्ष सहयोग: भारत और मॉरीशस अंतरिक्ष अनुसंधान के अवसरों का पता लगा रहे हैं और 2023 में एक संयुक्त उपग्रह विकसित करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
- भारतीय प्रवासन:
- फ्रांसीसी शासन (1700 के दशक): पुदुचेरी से भारतीयों को कारीगर और राजमिस्त्री के रूप में मॉरीशस लाया गया।
- ब्रिटिश शासन (1834 – प्रारंभिक 1900 के दशक): लगभग पांच लाख भारतीय अनुबंधित श्रमिक मॉरीशस पहुंचे। इनमें से अधिकांश श्रमिक मॉरीशस में बस गए, जिससे इसकी संस्कृति और जनसांख्यिकी प्रभावित हुई।
- विकास साझेदारी: भारत मेट्रो एक्सप्रेस, नए अस्पतालों और अगालेगा द्वीप में बुनियादी ढांचे जैसी परियोजनाओं में योगदान दे रहा है।
- मानवीय सहायता: भारत ने 2023 में चक्रवात चिडो के दौरान मॉरीशस की सहायता की, जिससे भारत की “प्रथम प्रत्युत्तरकर्ता” की भूमिका प्रदर्शित हुई।
- SAGAR: ‘क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास’ शब्द 2015 में प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान गढ़ा गया, जिसका फोकस ब्लू इकोनॉमी पर था।
भारत के लिए मॉरीशस का महत्व
- रणनीतिक स्थान: मॉरीशस हिंद महासागर में रणनीतिक रूप से स्थित है, जो भारत की समुद्री सुरक्षा और व्यापार मार्गों के लिए महत्वपूर्ण है।
- अगालेगा द्वीप: यह मॉरीशस के उत्तर में 1,100 किमी की दूरी पर स्थित है, और भारतीय दक्षिणी तट के निकट होने के कारण रणनीतिक महत्व रखता है।
- 2024 में भारत एवं मॉरीशस ने द्वीप पर हवाई पट्टी और जेटी परियोजनाओं का संयुक्त उद्घाटन किया, जिससे द्विपक्षीय सहयोग सुदृढ़ हुआ।
- चीन के प्रभाव का सामना: मॉरीशस के साथ संबंधों को सुदृढ़ करना भारत के लिए हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती उपस्थिति का सामना करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा: हिंद महासागर क्षेत्र भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का केंद्र है, जहां यूरोप, खाड़ी, रूस, ईरान और तुर्की जैसे देश अपना प्रभाव बढ़ा रहे हैं।
- सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध: मॉरीशस की लगभग 70% जनसंख्या भारतीय मूल की है, जिससे भारत के साथ गहरे सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पारिवारिक संबंध बनते हैं।
- ब्लू इकोनॉमी: मॉरीशस भारत के हितों के लिए हिंद महासागर की ब्लू इकोनॉमी में महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से समुद्री संसाधनों, मत्स्य पालन और अपतटीय ऊर्जा अन्वेषण के लिए।
- हिंद महासागर सहयोग: मॉरीशस क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग में योगदान देने वाले क्षेत्रीय संगठनों जैसे इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
चिंता के क्षेत्र
- कर संधि का दुरुपयोग: भारत और मॉरीशस के बीच दोहरा कर बचाव समझौता (DTAA) संभावित दुरुपयोग जैसे धन शोधन और फंड्स की राउंड-ट्रिपिंग के कारण चिंता का विषय रहा है।
- सुरक्षा चिंताएं: मॉरीशस इंडो-पैसिफिक में एक प्रमुख समुद्री इकाई है, जिससे सुरक्षा मुद्दे महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
- भारत और मॉरीशस के बीच सुदृढ़ रक्षा साझेदारी है, लेकिन क्षेत्रीय गतिशीलता में बदलाव इस संबंध को बनाए रखने और बढ़ाने के लिए चुनौतियां प्रस्तुत करती है।
- चीन की उपस्थिति: 2021 में चीन और मॉरीशस के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) प्रभाव में आया।
- यह समझौता चीन को अफ्रीका में बेल्ट एंड रोड रणनीति का विस्तार करने में सहायता करेगा।
- क्षेत्र में चीन की बढ़ती उपस्थिति भारत के लिए चिंता का विषय होगी।
आगे की राह
- भारत और मॉरीशस के बीच संबंध बहुआयामी हैं और वर्षों से सुदृढ़ हुए हैं।
- दोनों देश रक्षा और सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने की दिशा में कार्य कर सकते हैं, जिसमें संयुक्त प्रशिक्षण, आतंकवाद विरोधी प्रयास एवं समुद्री सुरक्षा शामिल हैं।
- यह बहुआयामी दृष्टिकोण भारत और मॉरीशस के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को अधिक सुदृढ़ कर सकता है, जिससे पारस्परिक विकास एवं क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।
| मॉरीशस के बारे में – अवस्थिति: मॉरीशस, हिंद महासागर में स्थित एक द्वीप देश है, जो अफ्रीका के पूर्वी तट से दूर स्थित है। – यह हिंद महासागर में मेडागास्कर के पूर्व में लगभग 800 किमी (500 मील) की दूरी पर स्थित है। ![]() – जनसंख्या: मॉरीशस की लगभग 70% जनसंख्या(1.2 मिलियन) भारतीय मूल की है, जिससे भारत के साथ संबंध सशक्त होते हैं। – औपनिवेशिक इतिहास: मॉरीशस शुरू में एक फ्रांसीसी उपनिवेश था, बाद में यह ब्रिटिश अधिकार में आ गया। – राष्ट्रीय दिवस: मॉरीशस महात्मा गांधी के दांडी मार्च की तिथि के सम्मान में 12 मार्च को राष्ट्रीय दिवस मनाता है। |
Source: TOI
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संक्षिप्त समाचार 11-09-2025
