भारत में असंगठित गैर-कृषि क्षेत्र मूल्य-सृजन और रोजगार-सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। समावेशी नीतियों को आकार देने के लिए इसकी गतिशीलता को समझना आवश्यक है।
भारत में औद्योगिक आपदाओं की पुनरावृत्ति निरीक्षण प्रणाली में तत्काल सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करती है, विशेष रूप से खतरनाक उद्योगों में जहां दुर्घटनाओं के कारण जान-माल की हानि, चोटें और संपत्ति की क्षति हुई है।
जुलाई और अगस्त 2024 में भारत के व्यापार घाटे में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई, जिसका कारण निर्यात में गिरावट तथा आयात में वृद्धि है। यह असंतुलन, हालांकि चिंताजनक है, लेकिन यह घरेलू एवं वैश्विक दोनों आर्थिक कारकों का प्रतिबिंब है।
भारत में, उर्वरक सब्सिडी किसानों के लिए किफायती इनपुट सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, विशेषकर यूरिया, DAP(डाय-अमोनियम फॉस्फेट) और MOP(म्यूरिएट ऑफ पोटाश) जैसे आवश्यक उर्वरकों के लिए। हालांकि, राजनीतिक रूप से संवेदनशील उर्वरकों की कीमतों को नियंत्रित करने में शामिल जटिलताओं के साथ, सरकार गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों के लिए बाजार का विस्तार करने की ओर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है।
भारत की 63% जनसँख्या कार्यशील आयु वर्ग में है और औसत आयु 28 वर्ष है, इसलिए उसके पास अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाने का एक अद्वितीय अवसर है। हालाँकि, इस क्षमता को साकार करने के लिए महत्वपूर्ण रोजगार चुनौतियों पर नियंत्रण पाना होगा।
भारत में ई-कॉमर्स क्षेत्र में महामारी के बाद से उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है और यह इंटरनेट की बढ़ती पहुंच, स्मार्टफोन के उपयोग और मध्यम वर्ग के विस्तार से प्रेरित है।
भारत द्वारा 2047 तक विकसित देश बनने के लक्ष्य की हाल ही में की गई घोषणा ने इस बात पर नए सिरे से वाद-विवाद शुरू हो गया है कि विकसित राष्ट्र की परिभाषा क्या है और इस दर्जे को प्राप्त करने के लिए आवश्यक प्रमुख मापदंड क्या हैं।
केंद्रीय बजट 2024-25 में, केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण खनिज मिशन की घोषणा की, जिसका उद्देश्य देश के ऊर्जा परिवर्तन और प्रौद्योगिकी विकास के लिए महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच सुनिश्चित करना है।