पाठ्यक्रम: GS3/IT की भूमिका
संदर्भ
- भारत ने कर अनुपालन और शासन में सुधार हेतु प्रौद्योगिकी का उपयोग प्रारंभ कर दिया है। देश को लगातार राजकोषीय चुनौती का सामना करना पड़ता है, जिसमें कर-से-जीडीपी अनुपात कम (2001–22 के दौरान 16.36%) और कर अपवंचन अधिक (≈4.3% वार्षिक राजस्व हानि) है।
कर प्रशासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता
- कराधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का अर्थ है मशीन लर्निंग एल्गोरिद्म, बिग डेटा एनालिटिक्स और प्रेडिक्टिव मॉडलिंग का उपयोग कर अनुपालन प्रबंधन, धोखाधड़ी की पहचान और करदाताओं की सेवाओं में सुधार करना।
- यह वास्तविक समय में लेन-देन की निगरानी सक्षम करता है, जोखिम-आधारित अनुपालन प्रणाली को सुगम बनाता है और स्वचालन एवं डेटा एकीकरण के माध्यम से ‘स्मार्ट कर प्रशासन’ को प्रोत्साहित करता है।
भारत का दृष्टिकोण: प्रोजेक्ट इनसाइट (PI)
- यह आयकर विभाग का डेटा वेयरहाउसिंग एवं बिज़नेस इंटेलिजेंस प्रोजेक्ट है, जिसे 2017 में प्रारंभ किया गया और 2019 तक पूर्ण रूप से परिचालित कर दिया गया।
- इसका उद्देश्य है गैर-हस्तक्षेपकारी, सूचना-आधारित प्रशासन को सुदृढ़ करना ताकि स्वैच्छिक अनुपालन और करदाता सेवाओं में सुधार हो सके।
- PI के प्रमुख घटक:
- INTRAC (आयकर लेनदेन विश्लेषण केंद्र): एआई-आधारित विश्लेषण इंजन, जो बहु-स्रोत डेटा (बैंकिंग, जीएसटी, संपत्ति, प्रतिभूतियाँ) का उपयोग कर 360° वित्तीय प्रोफ़ाइल तैयार करता है।
- अनुपालन प्रबंधन केंद्रीकृत प्रसंस्करण केंद्र (CMCPC): अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु विश्लेषणात्मक परिणामों का उपयोग करता है।
- NUDGE रणनीति (डेटा का गैर-हस्तक्षेपी उपयोग): एसएमएस/ईमेल के माध्यम से व्यवहारिक प्रोत्साहन, जो कर रिटर्न में स्वैच्छिक सुधार को बढ़ावा देता है।
कर प्रशासन में एआई के अवसर
- अनुपालन और राजस्व संग्रहण में वृद्धि: एआई घोषित और वास्तविक आय के बीच असंगतियों का पता लगाता है।
- भारत में 1 करोड़+ संशोधित रिटर्न और ₹11,000 करोड़ अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ।
- IMF के अनुसार, डेटा-आधारित अनुपालन प्रणाली कर क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाती है।
- जोखिम-आधारित और लक्षित प्रवर्तन: एआई करदाताओं को जोखिम प्रोफ़ाइल के आधार पर वर्गीकृत करता है, उच्च-मूल्य अपवंचन मामलों पर ध्यान केंद्रित करता है और मनमाने या अत्यधिक निरीक्षण को कम करता है।
- दक्षता और लागत में सुधार: रिटर्न प्रसंस्करण और रिफंड का स्वचालन (भारत में 93 → 17 दिन) मानव संसाधनों को जटिल निर्णयों के लिए मुक्त करता है।
- EY बताता है कि एआई प्रशासनिक लागत और मानवीय त्रुटियों को कम करता है।
- व्यवहारिक अनुपालन: गैर-हस्तक्षेपकारी अनुस्मारक स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ाते हैं।
- उदाहरण: विदेशी संपत्ति प्रकटीकरण में 62% अनुपालन।
- यह वैश्विक प्रवृत्ति के अनुरूप है, जिसमें दमनकारी से सहयोगात्मक कर व्यवस्था की ओर बदलाव हो रहा है।
- बेहतर करदाता सेवाएँ: एआई-संचालित चैटबॉट और सहायता; त्वरित शिकायत निवारण; अधिकारियों से कम संपर्क (कम भ्रष्टाचार)।
- जटिल चोरी नेटवर्क की पहचान: एआई परिष्कृत धोखाधड़ी पैटर्न उजागर करता है।
- IMF डिजिटल अर्थव्यवस्था और सीमा-पार कराधान से निपटने में एआई की भूमिका पर बल देता है।
चुनौतियाँ और जोखिम
- डेटा गुणवत्ता और विश्वसनीयता: एआई प्रणाली सटीक और व्यापक डेटा पर निर्भर करती है। परिवर्तनीय आय और संयुक्त परिवार वित्त में गलत सकारात्मक परिणाम का जोखिम।
- एल्गोरिद्मिक पक्षपात: ऐतिहासिक डेटा पर प्रशिक्षित मॉडल सामाजिक-आर्थिक पक्षपात को सुदृढ़ कर सकते हैं और विशिष्ट क्षेत्रों/समूहों को लक्षित कर सकते हैं। वैश्विक उदाहरण: डच चाइल्डकेयर लाभ घोटाला।
- पारदर्शिता और व्याख्येयता की कमी: एआई निर्णय प्रायः ‘ब्लैक बॉक्स’ की तरह कार्य करते हैं, जिससे प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन और निर्णयों को चुनौती देने में कठिनाई होती है।
- गोपनीयता और डेटा सुरक्षा: वित्तीय डेटा का विशाल संग्रह साइबर हमलों और व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग का जोखिम बढ़ाता है। IMF सुदृढ़ डेटा शासन ढाँचे की आवश्यकता पर बल देता है।
- संस्थागत और कानूनी अंतराल: एआई लोकपाल, एल्गोरिद्मिक ऑडिट और सार्वजनिक जवाबदेही तंत्र का अभाव।
- निगरानी राज्य का जोखिम: अत्यधिक डेटा ट्रैकिंग विश्वास को कमजोर कर सकती है और स्वैच्छिक अनुपालन को हतोत्साहित कर सकती है।
वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाएँ
- अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और इटली जैसे देशों ने एआई-आधारित कर प्रणाली लागू की है तथा धोखाधड़ी की पहचान हेतु प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स का उपयोग किया है।
- इनसे उच्च अनुपालन और राजस्व संग्रहण प्राप्त हुआ।
आगे की राह
- नैतिक एआई ढाँचा: निष्पक्षता, जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
- मानव-इन-द-लूप प्रणाली: महत्वपूर्ण निर्णयों में मानव पर्यवेक्षण आवश्यक।
- डेटा संरक्षण को सुदृढ़ करना: डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (DPPA, 2023) का प्रभावी क्रियान्वयन।
- एल्गोरिद्मिक पारदर्शिता: स्पष्ट व्याख्या और अपील तंत्र प्रदान करना।
- संस्थागत सुधार: एआई लोकपाल की स्थापना, स्वतंत्र ऑडिट और सार्वजनिक रिपोर्टिंग प्रणाली।
- क्षमता निर्माण: कर अधिकारियों को डेटा विज्ञान और एआई शासन में प्रशिक्षित करना।
निष्कर्ष
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत को कर प्रशासन का आधुनिकीकरण करने, अनुपालन सुधारने और राजस्व संग्रहण बढ़ाने का रूपांतरणकारी अवसर प्रदान करती है।
- किन्तु सुदृढ़ सुरक्षा उपायों के बिना यह गोपनीयता, निष्पक्षता और विश्वास को कमजोर कर सकती है।
- मुख्य चुनौती है तकनीकी दक्षता और लोकतांत्रिक जवाबदेही के बीच संतुलन स्थापित करना, ताकि एआई निगरानी का उपकरण न बनकर सुशासन का साधन बने।
| मुख्य परीक्षा दैनिक अभ्यास प्रश्न [प्रश्न] कृत्रिम बुद्धिमत्ता कर प्रशासन को दक्षता और अनुपालन में सुधार करके रूपांतरित कर रही है, किन्तु यह गोपनीयता, निष्पक्षता एवं जवाबदेही से संबंधित गंभीर चिंताएँ भी उत्पन्न करती है। भारत के कर प्रशासन के संदर्भ में चर्चा कीजिए। |
स्रोत: TH