पाठ्यक्रम: GS2/वैश्विक समूह और भारत से संबंधित समझौते
संदर्भ
- ब्रिक्स एक महत्त्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है, जो बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का समर्थन करता है और पश्चिम-प्रधान प्रणालियों पर निर्भरता को कम करने का प्रयास करता है।
- हाल के वर्षों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (STI) ब्रिक्स सहयोग का एक महत्त्वपूर्ण किंतु अपेक्षाकृत कम खोजा गया स्तंभ बन गया है।
ब्रिक्स के बारे में
- “ब्रिक्स” शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम 2001 में अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने किया था। यह पाँच प्रमुख उभरती राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं – ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका – को संदर्भित करता है।
- 2006 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान BRIC विदेश मंत्रियों की प्रथम बैठक में इसे औपचारिक रूप दिया गया।
- दक्षिण अफ्रीका को 2010 में सम्मिलित किया गया और इसके बाद से इसे BRICS कहा जाने लगा।
- हाल ही में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ब्रिक्स के नए पूर्ण सदस्य बने हैं।
नया विकास बैंक
- पूर्व में “ब्रिक्स विकास बैंक” कहलाने वाला यह एक बहुपक्षीय विकास बैंक है, जिसे ब्रिक्स देशों द्वारा स्थापित किया गया।
- इसका उद्देश्य ऋण, गारंटी, इक्विटी भागीदारी और अन्य वित्तीय साधनों के माध्यम से सार्वजनिक या निजी परियोजनाओं को समर्थन देना है।
वैश्विक STI परिदृश्य में ब्रिक्स
- भू-राजनीतिक तनाव, तकनीकी राष्ट्रवाद और निर्यात नियंत्रण के युग में वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग तीव्रता से विखंडित हो रहा है।
- ब्रिक्स एक वैकल्पिक सहयोगी मंच प्रदान करता है, जो:
- नवाचार रणनीतियों का समन्वय करता है;
- प्रौद्योगिकी साझाकरण को बढ़ावा देता है;
- वैश्विक दक्षिण सहयोग को सुदृढ़ करता है।
- नया विकास बैंक (NDB) जैसी संस्थाएँ विकास वित्त और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को समर्थन देती हैं।
- BRICS+ (UAE, सऊदी अरब, मिस्र, ईरान आदि सहित) का विस्तार इसकी वैश्विक प्रासंगिकता को बढ़ाता है।
ब्रिक्स में STI सहयोग का विकास
- संस्थागत विकास:
- 2011: ब्रिक्स एजेंडा में STI को औपचारिक रूप से मान्यता मिली।
- 2015: समझौता ज्ञापन (MoU) द्वारा STI को एक प्रमुख रणनीतिक स्तंभ बनाया गया।
- संरचित तंत्र का निर्माण: मंत्रीस्तरीय बैठकें; राष्ट्रीय नोडल एजेंसियाँ (भारत में CSIR, DBT)।
- कार्य योजनाएँ एवं रूपरेखाएँ:
- ब्रिक्स नवाचार कार्य योजना (2017–2020) उद्यमिता, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और इनक्यूबेशन नेटवर्क पर केंद्रित।
- मूलभूत अनुसंधान से नवाचार और वाणिज्यीकरण की ओर बदलाव।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
- उभरती प्रौद्योगिकियाँ: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), उच्च-प्रदर्शन संगणना (HPC), ICT और डिजिटल प्रौद्योगिकियाँ, तथा अंतरिक्ष सहयोग (2021 समझौता)।
- सामाजिक चुनौतियाँ: सार्वजनिक स्वास्थ्य (COVID-19 प्रतिक्रिया, टीके), ऊर्जा सुरक्षा, जल एवं पर्यावरण, और जलवायु लचीलापन।
- संस्थागत तंत्र: ब्रिक्स प्रौद्योगिकी हस्तांतरण केंद्र (TTC), iBRICS नवाचार नेटवर्क, और ब्रिक्स इंस्टीट्यूट ऑफ फ्यूचर नेटवर्क्स।
हाल के विकास
- AI घोषणा (2025): कृत्रिम बुद्धिमत्ता को केंद्रीय शासन मुद्दा बनाया गया; समावेशी, न्यायसंगत और विकास-उन्मुख AI पर ध्यान।
- BRICS+ का विस्तार: वैश्विक दक्षिण में व्यापक सहयोग।
- भारत की 2026 अध्यक्षता की थीम: लचीलापन, नवाचार, सहयोग, स्थिरता।
प्रमुख उपलब्धियाँ
- वैज्ञानिक सहयोग और अनुसंधान नेटवर्क को सुदृढ़ किया गया।
- ICT, AI और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों में प्रगति।
- नवाचार-प्रेरित पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ता बल ।
- STI शासन में वैश्विक दक्षिण का बढ़ता प्रतिनिधित्व।
संबंधित चुनौतियाँ एवं चिंताएँ
- कमज़ोर नवाचार प्रणाली: अधिकांश सदस्य देशों में R&D पर सकल व्यय (GERD) कम है (चीन को छोड़कर)।
- उन्नत नवप्रवर्तकों से अंतर: दक्षिण कोरिया जैसे देशों की तुलना में पिछड़ापन।
- संस्थागत सीमाएँ: स्थायी STI समन्वय निकाय का अभाव; ब्रिक्स की घूर्णनशील अध्यक्षता दीर्घकालिक योजना को सीमित करती है।
- असमान भागीदारी: नए BRICS+ सदस्य सीमित संलग्नता दिखाते हैं; वैज्ञानिक क्षमता और आर्थिक विकास में अंतर।
- सीमित वाणिज्यीकरण: अनुसंधान को बाज़ार-उपयुक्त प्रौद्योगिकियों में बदलने की क्षमता कमजोर।
- वित्तीय बाधाएँ: EU कार्यक्रमों की तुलना में सीमित वित्तीय पैमाना; संसाधनों के लिए उच्च प्रतिस्पर्धा।
आगे की राह
- संस्थागत सुदृढ़ीकरण: एक स्थायी ब्रिक्स STI सचिवालय की स्थापना की आवश्यकता है; इसे यूरोपीय संघ के होराइजन कार्यक्रम के मॉडल पर विकसित किया जा सकता है।
- मेगा-विज्ञान परियोजनाएँ: अंतरिक्ष अन्वेषण, जलवायु विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी में संयुक्त दीर्घकालिक परियोजनाएँ।
- नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का संवर्धन: GERD (R&D पर सकल व्यय) निवेश बढ़ाने और राष्ट्रीय नवाचार प्रणालियों (NIS) को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।
- समावेशी BRICS+ एकीकरण: सदस्य देशों के बीच ‘युग्मित सहयोग’ को बढ़ावा देने और कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में क्षमता निर्माण की आवश्यकता है।
- STI शासन पर ध्यान: नैतिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल संप्रभुता, तकनीकी विनियमन पर अनुसंधान की आवश्यकता है; साथ ही वैश्विक संधि वार्ताओं में साझा दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
निष्कर्ष
- 2015 से ब्रिक्स ने STI सहयोग में उल्लेखनीय प्रगति की है और यह नवाचार एवं विकास के लिए एक रणनीतिक मंच के रूप में विकसित हुआ है।
- हालाँकि, प्रासंगिक और प्रभावी बने रहने के लिए इसे संस्थागत तंत्र को सुदृढ़ करना, वित्त पोषण का विस्तार करना तथा सहयोग को सुदृढ़ करना आवश्यक है।
- भारत, 2026 में ब्रिक्स अध्यक्ष के रूप में, सुधारों को आगे बढ़ाने और ब्रिक्स को वैश्विक STI शासन में, विशेषकर वैश्विक दक्षिण के लिए, एक अग्रणी के रूप में स्थापित करने का अद्वितीय अवसर रखता है।
| मुख्य परीक्षा दैनिक अभ्यास प्रश्न [प्रश्न]: ब्रिक्स द्वारा सदस्य देशों के बीच विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सहयोग को बढ़ावा देने में निभाई गई भूमिका का परीक्षण कीजिए। साथ ही, प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा कीजिए और ब्रिक्स+ विस्तार के संदर्भ में इसकी प्रभावशीलता बढ़ाने हेतु उपाय सुझाइए। |
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