भारत के 2025 के आर्थिक सुधार

पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • 2025 में आर्थिक सुधार भारत की शासन व्यवस्था के परिपक्व चरण को दर्शाते हैं, जहाँ प्राथमिकता “नियामक ढाँचे का विस्तार” से हटकर “मापने योग्य परिणाम देने” पर दृढ़ता से स्थानांतरित हुई।

विकास और अवसर को आकार देने वाले प्रमुख सुधार

आयकर सुधार

  • केंद्रीय बजट 2025-26 में नई व्यवस्था के अंतर्गत ₹12 लाख तक की वार्षिक आय को आयकर से मुक्त किया गया, जबकि मानक कटौती के कारण वेतनभोगी करदाताओं के लिए प्रभावी छूट ₹12.75 लाख तक बढ़ गई।
  • सरकार ने आयकर अधिनियम, 1961 का व्यापक पुनर्गठन कर नया आयकर अधिनियम, 2025 लागू किया।
  • यह अधिनियम डिजिटल-प्रथम प्रवर्तन, फेसलेस कर प्रशासन को सुदृढ़ करता है, अनुपालन प्रावधानों जैसे स्रोत पर कर कटौती (TDS) को एक ही धारा में समेकित करता है आदि।

ग्रामीण रोजगार सुधार

  • ग्रामीण रोजगार सुधार विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 के अधिनियमन पर आधारित हैं, जिसने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को प्रतिस्थापित किया।
    • विस्तारित रोजगार गारंटी: प्रत्येक ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों का वेतनभोगी रोजगार।
    • सुदृढ़ प्रशासनिक क्षमता: प्रशासनिक व्यय सीमा 6% से बढ़ाकर 9% कर दी गई है, जिससे स्टाफिंग, प्रशिक्षण, तकनीकी क्षमता और फील्ड-स्तरीय समर्थन को सुदृढ़ कर संस्थागत डिलीवरी और परिणामों में सुधार होगा।

व्यवसाय करने में आसानी सुधार

  • यह सुनिश्चित करने के लिए कि गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCOs) घरेलू उत्पादन को बाधित न करें, सरकार ने उन्हें भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के माध्यम से चरणबद्ध और MSME-अनुकूल तरीके से लागू किया है।

जीएसटी 2.0 सुधार

  • सरल कर संरचना: दो-स्लैब जीएसटी व्यवस्था (5% और 18%) की ओर कदम ने जटिलता, वर्गीकरण विवाद और अनुपालन लागत को कम किया।
  • MSME और स्टार्टअप सशक्तिकरण: तीव्र रिफंड, सरल पंजीकरण एवं रिटर्न, और कम इनपुट लागत का उद्देश्य वर्तमान व्यवसायों एवं स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना है तथा युवाओं को व्यवसाय और स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
  • व्यापक कर आधार और राजस्व स्थिरता: सरल दरों और बेहतर अनुपालन ने जीएसटी करदाता आधार को 1.5 करोड़ से अधिक तक बढ़ा दिया है, जबकि FY 2024–25 में सकल संग्रह ₹22.08 लाख करोड़ तक पहुँच गया, जिससे राजकोषीय स्थिरता सुदृढ़ हुई।

श्रम सुधार

  • भारत सरकार ने 29 वर्तमान श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में समेकित किया:
    • वेतन संहिता, 2019
    • औद्योगिक संबंध संहिता, 2020
    • सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020
    • व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियाँ संहिता, 2020

निर्यात संवर्धन मिशन

  • केंद्रीय बजट 2025–26 में घोषित, EPM ने खंडित निर्यात समर्थन योजनाओं से एकल, परिणाम-आधारित और डिजिटल रूप से संचालित ढाँचे की ओर रणनीतिक बदलाव किया है, जिसका उद्देश्य MSMEs, प्रथम-बार निर्यातकों और श्रम-प्रधान क्षेत्रों को सशक्त बनाना है।

आगे की चुनौतियाँ

  • डिजिटल विभाजन: कराधान, व्यापार एवं कल्याण वितरण में डिजिटल-प्रथम शासन छोटे उद्यमों और उन श्रमिकों को बाहर कर सकता है जिनके पास डिजिटल साक्षरता या अवसंरचना नहीं है।
  • वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता: वैश्विक मांग में सुस्ती, भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधान घरेलू सुधार गति के बावजूद निर्यात वृद्धि को सीमित कर सकते हैं।
  • MSME अनुपालन बोझ: सरलीकरण के बावजूद, छोटे उद्यम अभी भी डिजिटल अनुपालन, गुणवत्ता मानकों और सस्ती ऋण तक पहुँच में संघर्ष करते हैं, विशेषकर अर्ध-शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में।
  • केंद्र–राज्य समन्वय: जीएसटी 2.0, श्रम संहिताएँ एवं ग्रामीण रोजगार जैसे सुधारों के लिए मज़बूत राजकोषीय और प्रशासनिक समन्वय की आवश्यकता है, जो अभी भी परिचालन घर्षण का सामना कर रहा है।

आगे की राह

  • ये सुधार परिणाम-आधारित शासन की ओर बदलाव को दर्शाते हैं, नागरिकों एवं व्यवसायों के लिए घर्षण को कम करते हैं, पारदर्शिता बढ़ाते हैं तथा सतत, समावेशी विकास की नींव रखते हैं।
  • ये उपाय सामूहिक रूप से भारत की अर्थव्यवस्था में विश्वास, लचीलापन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देते हैं।

Source: PIB

 

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