अनुसंधान व्यय के क्षेत्र में चीन द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका पर अग्रता प्राप्त 

पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

संदर्भ

  • आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने अनुसंधान एवं विकास (R&D) व्यय में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है तथा 1 ट्रिलियन डॉलर का आँकड़ा पार कर लिया है।

प्रमुख बिंदु

  • अनुसंधान एवं विकास व्यय समानता प्राप्त: चीन का R&D व्यय अमेरिका के बराबर हो गया है और उसे पार कर चुका है (क्रय शक्ति समानता के आधार पर)।
    • दोनों देशों ने 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक अनुसंधान व्यय का आँकड़ा पार कर लिया है।
  • अमेरिका की वैज्ञानिक नेतृत्व की विरासत: अमेरिका की प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियों में इंटरनेट, mRNA वैक्सीन, सेमीकंडक्टर, माइक्रोप्रोसेसर और GPS शामिल हैं।
    • यह प्रभुत्व मज़बूत सार्वजनिक निवेश और खुली वैज्ञानिक संस्कृति पर आधारित था।
    • द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से वैज्ञानिक अनुसंधान ने अमेरिका की उत्पादकता वृद्धि में 20% से अधिक योगदान दिया है, जिससे नवाचार सीधे आर्थिक शक्ति से जुड़ा रहा।
  • चीन का निम्न आधार से तीव्र उत्थान: 1980 में चीन विश्व के सबसे कम R&D व्यय करने वाले देशों में था।
    • इसके बाद चीन ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी में व्यवस्थित, राज्य-प्रेरित निवेश को अपनाया।
  • अनुसंधान उत्पादन में चीन अग्रणी: 2019 में शीर्ष 1% अत्यधिक उद्धृत शोध-पत्रों में अमेरिका को पीछे छोड़ा।
    • 2022 में कुल उद्धृत शोध-पत्रों में वैश्विक नेतृत्व प्राप्त किया।
    • 2024 में कुल वैज्ञानिक प्रकाशनों में अमेरिका को पार किया।
    • 2024 में चीन ने लगभग 1.8 मिलियन पेटेंट दाखिल किए, जबकि अमेरिका ने ~603,000। यह एक सुदृढ़ नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और वाणिज्यिकरण की दिशा को दर्शाता है।

अमेरिका की घटती हिस्सेदारी के कारण

  • सार्वजनिक निवेश में गिरावट: अमेरिका का संघीय R&D व्यय GDP का 1.86% (1964) से घटकर ~0.66% (2021) रह गया।
    • सार्वजनिक से निजी निवेश की ओर झुकाव ने मूलभूत, खुला विज्ञान कमजोर किया।
  • अनुसंधान से विकास की ओर झुकाव: निजी क्षेत्र (~78% R&D) का प्रभुत्व है, जो वाणिज्यिक विकास पर केंद्रित है। इससे खुला वैज्ञानिक ज्ञान घट रहा है।
  • नीतिगत प्रतिबंध: अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, वीज़ा और पहुँच पर बढ़ते प्रतिबंध खुले आदान-प्रदान प्रणाली को कमजोर कर रहे हैं।
  • प्रतिभा का क्षरण और दीर्घकालिक जोखिम: 2000 से अब तक अमेरिका के ~40% नोबेल पुरस्कार प्रवासियों द्वारा जीते गए, परंतु प्रवाह घट रहा है।
    • फंडिंग कटौती, कम अनुदान और घटती खुली संस्कृति वैज्ञानिकों के पलायन का कारण बन रही है।

भारत में R&D व्यय

  • भारत का सकल अनुसंधान एवं विकास व्यय (GERD) GDP का 0.6% से 0.7% के बीच रहा है, जो वैश्विक औसत से कम है और चीन, दक्षिण कोरिया तथा अमेरिका से भी नीचे है।
  • भारत के निजी क्षेत्र का निवेश केवल ~36% है, जबकि उपरोक्त देशों में यह 70% से अधिक है।
  • भारत में कुल R&D व्यय का 43.7% केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाता है।

R&D में निवेश की आवश्यकता

  • आर्थिक वृद्धि: नए उद्योगों को बढ़ावा देता है, उत्पादकता सुधारता है और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाता है।
  • प्रौद्योगिकीय प्रगति: कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में प्रगति को संभव बनाता है।
  • सामाजिक चुनौतियाँ: गरीबी, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता जैसी समस्याओं का समाधान करता है।
  • रोज़गार सृजन: नवाचार रोजगार के अवसर उत्पन्न करता है और उद्यमिता को प्रोत्साहित करता है।
  • वैश्विक स्थिति: भारत को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और ज्ञान में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति प्रदान करता है।

सरकारी पहल

  • अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) योजना: ₹1 लाख करोड़ की कोष राशि के साथ स्वीकृत, इस योजना का उद्देश्य निजी क्षेत्र के R&D और डीप-टेक स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करना है।
    • यह दीर्घकालिक, कम या शून्य-ब्याज ऋण, इक्विटी निवेश प्रदान करती है और अनुसंधान हेतु अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के माध्यम से नया डीप-टेक फंड ऑफ फंड्स स्थापित करती है।
  • अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF): 2023 में स्थापित ANRF विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अनुसंधान, नवाचार एवं उद्यमिता के लिए उच्च-स्तरीय रणनीतिक दिशा प्रदान करता है।
    • फाउंडेशन का लक्ष्य 2023–28 के दौरान ₹50,000 करोड़ जुटाना है, जिसमें ANRF फंड, नवाचार फंड, विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान फंड और विशेष प्रयोजन फंड शामिल हैं।
  • राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति, 2022: इसका उद्देश्य 2035 तक भारत को भू-स्थानिक क्षेत्र में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करना है।
    • यह नीति भू-स्थानिक डेटा तक पहुँच को उदार बनाती है और शासन, व्यवसाय तथा अनुसंधान में इसके उपयोग को प्रोत्साहित करती है।
  • भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023: यह 2020 में शुरू किए गए अंतरिक्ष सुधारों पर आधारित है, जिसने गैर-सरकारी संस्थाओं को पूर्ण भागीदारी की अनुमति दी।
    • इसका लक्ष्य अंतरिक्ष क्षमताओं को बढ़ाना, एक सशक्त वाणिज्यिक अंतरिक्ष उद्योग को बढ़ावा देना और सार्वजनिक-निजी सहयोग को प्रोत्साहित करना है।
  • राष्ट्रीय क्वांटम मिशन: 2023–31 के लिए ₹6,003.65 करोड़ आवंटित किए गए हैं, ताकि वैज्ञानिक और औद्योगिक R&D के माध्यम से क्वांटम प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाया जा सके।
  • बायोE3 नीति, 2024: यह नीति बायोमैन्युफैक्चरिंग और बायो-AI हब्स के निर्माण को प्रोत्साहित करती है, साथ ही राष्ट्रीय बायोफाउंड्री नेटवर्क स्थापित करती है, जिससे प्रौद्योगिकी विकास और वाणिज्यिकरण में तीव्र आए।
  • राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM): 2015 में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और सरकारी एजेंसियों को अत्याधुनिक सुपरकंप्यूटिंग प्रणालियों से सशक्त बनाना है, जो राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क से जुड़ी हैं।
  • भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM): 2021 में स्थापित इस मिशन का उद्देश्य सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले निर्माण के लिए एक सुदृढ़ पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है।
    • भारत ने पहले ही छह राज्यों में 10 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनमें ओडिशा में पहला वाणिज्यिक सिलिकॉन कार्बाइड निर्माण संयंत्र शामिल है।
  • इंडिया AI मिशन: “मेकिंग AI इन इंडिया और मेकिंग AI वर्क फॉर इंडिया” की दृष्टि को मूर्त रूप देता है।
    • यह तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है, जहाँ कंप्यूटिंग क्षमता 10,000 GPUs के प्रारंभिक लक्ष्य से बढ़कर 38,000 GPUs तक पहुँच गई है, जिससे स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं और उद्योगों के लिए सुलभ AI अवसंरचना सुनिश्चित हो रही है।
  • अटल नवाचार मिशन (AIM): छात्रों, स्टार्टअप्स और उद्यमियों को समर्थन देकर बुनियादी स्तर पर नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्थापित।
  • उच्च उत्पादकता वाले बीजों पर राष्ट्रीय मिशन: अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने और उच्च उत्पादकता वाले, कीट-प्रतिरोधी तथा जलवायु-सहिष्णु बीजों के विकास पर केंद्रित।
    • यह कृषि जैव प्रौद्योगिकी में DBT के प्रयासों के अनुरूप है।

स्रोत: DTE

 

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