पाठ्यक्रम: GS1/भूगोल/GS3/पर्यावरण
समाचार में
- हालिया शोध से संकेत मिलता है कि अटलांटिक मेरिडियोनल ओवरटर्निंग परिसंचरण (AMOC) विगत 1,600 वर्षों में अपने सबसे कमजोर स्तर पर है और इसके गंभीर रूप से बंद होने या ध्वस्त होने की संभावना पहले के अनुमान से अधिक है।
अटलांटिक मेरिडियोनल ओवरटर्निंग परिसंचरण (AMOC)
- यह अटलांटिक महासागर में एक विशाल समुद्री धारा प्रणाली है, जो गर्म जल को उत्तर की ओर और ठंडे, सघन जल को दक्षिण की ओर निरंतर चक्र में प्रवाहित करती है।
- यह वैश्विक महासागरीय “कन्वेयर बेल्ट” का प्रमुख हिस्सा है, जो विश्व के महासागरों में ऊष्मा और पोषक तत्वों का वितरण करता है।
- यह उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों से गर्म सतही जल को उत्तरी गोलार्ध तक ले जाता है, जहाँ यह ठंडा होकर नीचे डूबता है और फिर गहरे प्रवाह के रूप में दक्षिण की ओर लौटता है।
- दक्षिण अटलांटिक से यह जल अंटार्कटिक परिधि धारा के माध्यम से अन्य महासागरों में फैलता है।
कमजोर होने के कारण
- वैश्विक ऊष्मीकरण: बढ़ते तापमान घनत्व में अंतर को कम करते हैं, जिससे डूबती धाराएँ धीमी हो जाती हैं।
- मीठे जल का प्रवाह: ग्रीनलैंड हिमचादर के पिघलने और वर्षा में वृद्धि से लवणता कम होती है, जिससे गहरे जल का निर्माण कमजोर होता है।
- प्राकृतिक परिवर्तनशीलता बनाम मानव प्रभाव: अध्ययन दर्शाते हैं कि 1980 के दशक से कमजोर होना शुरू हुआ, बीच-बीच में प्राकृतिक उतार-चढ़ाव से विराम मिला, परंतु दीर्घकालिक गिरावट में मानवजनित कारक प्रमुख हैं।
- गहरे महासागर में परिवर्तन: अंटार्कटिक बॉटम वाटर का प्रवाह 2000–2020 के बीच लगभग 12% घटा है, जिससे गहरे अटलांटिक का तापमान बढ़ा और समुद्र स्तर ऊँचा हुआ।
कमजोर होने के प्रभाव
- क्षेत्रीय जलवायु:
- उत्तरी अमेरिका और यूरोप: ठंडी सर्दियाँ, वर्षा में व्यवधान।
- अफ्रीका और दक्षिण एशिया: मानसून कमजोर होना, सूखे का जोखिम।
- समुद्र स्तर में वृद्धि: धीमी परिसंचरण से अमेरिका के पूर्वी तट और वैश्विक स्तर पर समुद्र स्तर बढ़ता है।
- सागरीय पारिस्थितिकी तंत्र: पोषक तत्वों के प्रवाह में बदलाव, मत्स्य उद्योग के लिए खतरा।
- कार्बन चक्र: महासागरों द्वारा कार्बन अवशोषण में कमी, जिससे वायुमंडलीय CO₂ स्तर और बिगड़ते हैं।
- चरम घटनाएँ: महासागर-वायुमंडल गतिशीलता में बदलाव से तूफ़ान और हीटवेव का अधिक जोखिम।
सुझाव
- AMOC पृथ्वी की जलवायु प्रणाली का एक प्रमुख हिस्सा है, जो तापमान, वर्षा और महासागर स्वास्थ्य को नियंत्रित करता है।
- प्रमाण दर्शाते हैं कि यह वैश्विक ऊष्मीकरण और स्वच्छ जल के प्रवाह के कारण कमजोर हो रहा है, जिससे संभावित ध्वस्त होने और गंभीर वैश्विक जलवायु प्रभावों की आशंका बढ़ रही है।
- अतः आवश्यक है कि उत्सर्जन में त्वरित कमी, बेहतर निगरानी और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि जलवायु प्रणाली के इस संभावित “टिपिंग पॉइंट” से बचा जा सके।
Source :TH
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