पाठ्यक्रम: GS2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- हाल ही में भारत और दक्षिण कोरिया ने द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को उन्नत करने हेतु वार्ताओं को पुनः आरंभ करने का निर्णय लिया है।
द्विपक्षीय बैठक के प्रमुख परिणाम
- सामरिक दृष्टि: विशेष सामरिक साझेदारी को गहराई देने हेतु संयुक्त सामरिक दृष्टि अपनाई गई। प्रमुख क्षेत्र:
- चिप्स से शिप्स (सेमीकंडक्टर से जहाज़ निर्माण तक)
- टैलेंट से टेक्नोलॉजी
- पर्यावरण से ऊर्जा
- मुख्य समझौते:
- डिजिटल सहयोग (भारत–कोरिया डिजिटल ब्रिज) जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर और सूचना प्रौद्योगिकी शामिल हैं।
- जहाज़ निर्माण, स्थिरता, इस्पात, बंदरगाह जैसे क्षेत्रों में समझौता ज्ञापन (MoUs)।
- लघु एवं मध्यम उद्यम (SMEs), खेल और संस्कृति में सहयोग।
- आर्थिक संबंध एवं CEPA:
- CEPA (2010): इस समझौते ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा दिया।
- वर्तमान व्यापार संरचना:
- दक्षिण कोरिया से आयात: लगभग $21 बिलियन
- दक्षिण कोरिया को निर्यात: लगभग $5.8 बिलियन
- यह व्यापार असंतुलन कोरिया के पक्ष में दर्शाता है।
- व्यापार वृद्धि: 2010 में $14.2 बिलियन से 2024–25 में $26.89 बिलियन तक (लगभग 90% वृद्धि)।
- CEPA उन्नयन:
- 2030 तक व्यापार को $50 बिलियन तक बढ़ाने का लक्ष्य।
- बाज़ार पहुँच और निवेश स्थितियों में सुधार।
- नए संस्थागत तंत्र: भारत–कोरिया वित्तीय मंच, औद्योगिक सहयोग समिति, आर्थिक सुरक्षा संवाद।
सामरिक एवं भू-राजनीतिक आयाम
- इंडो-पैसिफिक सहयोग:
- दक्षिण कोरिया ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव में भागीदारी की।
- शांतिपूर्ण, समावेशी इंडो-पैसिफिक, समुद्री सुरक्षा और सहयोग के प्रति साझा प्रतिबद्धता।
- वैश्विक शासन:
- वैश्विक संस्थाओं में सुधार पर बल।
- मध्य पूर्व और यूरोप जैसी वैश्विक संकटों पर सहयोग।
- ऊर्जा एवं आपूर्ति श्रृंखला:
- ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता और महत्वपूर्ण वस्तुओं के लिए लचीली आपूर्ति श्रृंखला पर ध्यान।
समुद्री एवं औद्योगिक सहयोग
- जहाज़ निर्माण और लॉजिस्टिक्स:
- कोरियाई तकनीकी विशेषज्ञता और भारतीय नीतिगत समर्थन के साथ सामरिक सहयोग।
- भारत में जहाज़ निर्माण सुविधाओं की स्थापना, उत्पादन प्रोत्साहन और समुद्री लॉजिस्टिक्स सहयोग का विस्तार।
- औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र:
- भारत में कोरियाई औद्योगिक टाउनशिप का प्रस्ताव।
- कोरियाई SMEs को भारत में निवेश हेतु प्रोत्साहन।
सांस्कृतिक एवं जन-से-जन संबंध
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान: मुंबई कोरिया सेंटर की स्थापना, K-pop प्रदर्शन केंद्र और सांस्कृतिक सहयोग मंच।
- सॉफ्ट पावर कूटनीति: भारत में K-pop और K-dramas की बढ़ती लोकप्रियता।
- कोरिया में भारतीय सिनेमा का प्रभाव।
निष्कर्ष
- भारत–दक्षिण कोरिया संबंध एक नए सामरिक गहराई के चरण में प्रवेश कर रहे हैं।
- आर्थिक, तकनीकी और भू-राजनीतिक सहयोग का यह संगम भविष्य उन्मुख साझेदारी की ओर संकेत करता है।
- CEPA उन्नयन, डिजिटल साझेदारी और समुद्री सहयोग वैश्विक एवं क्षेत्रीय परिवर्तनों के अनुरूप व्यापक साझेदारी की दिशा में अग्रसर हैं।
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