पाठ्यक्रम: GS3/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- संयुक्त राज्य अमेरिका, जिसे लंबे समय से वैज्ञानिक नवाचार और अनुसंधान का केंद्र माना जाता रहा है, वर्तमान में अपने ज्ञान अर्थव्यवस्था के व्यवस्थित क्षरण का साक्षी बन रहा है।
अमेरिका में संकट
- अनुदान रोकना: राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (NIH) और अन्य अमेरिकी एजेंसियों ने कई अंतर्राष्ट्रीय सहयोगी परियोजनाओं के लिए धनराशि को रोक दिया है या कम कर दिया है।
- संस्थागत अनिश्चितता: विश्वविद्यालयों में कर्मचारियों की छंटनी और प्रयोगशालाओं को बंद किया जा रहा है; स्थायी पदों की संख्या घटाई जा रही है।
- वैज्ञानिकों का प्रवासन: शुरुआती करियर के शोधकर्त्ता और वरिष्ठ वैज्ञानिक यूरोप, एशिया और लैटिन अमेरिका की ओर जा रहे हैं।
भारतीय प्रवासी के लिए अवसर
- समृद्ध प्रतिभा समूह: अमेरिकी STEM कार्यबल में भारत में जन्मे वैज्ञानिकों की महत्त्वपूर्ण हिस्सेदारी है, जिन्होंने कई बड़ी खोजों में योगदान दिया और वैश्विक विज्ञान पुरस्कार जीते हैं। उदाहरण: लैस्कर, ब्रेकथ्रू और यहां तक कि नोबेल पुरस्कार।
- ब्रेन ड्रेन को परिवर्तित करने की आवश्यकता: भारत को स्थायी पुनर्वास, अनुसंधान प्रयोगशालाओं के निर्माण और संस्थागत नेतृत्व की भूमिकाओं के लिए मार्ग बढ़ाना चाहिए।
संकट पर वैश्विक प्रतिक्रिया
- फ्रांस: एक्स-मार्से यूनिवर्सिटी में “सेफ प्लेस फॉर साइंस” कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिकों को सुरक्षित और सहयोगी वातावरण प्रदान करना है।
- जर्मनी और स्विट्जरलैंड: असंतुष्ट या विस्थापित वैज्ञानिकों के लिए दीर्घकालिक अनुदान और शोध सहयोग की पेशकश कर रहे हैं।
- चीन: “टैलेंट रिटर्न” योजना के तहत प्रवासी चीनी शोधकर्त्ताओं को आकर्षित करने के लिए वित्तीय निवेश बढ़ा रहा है।
भारत द्वारा उठाए गए कदम
- वैभव (वैश्विक भारतीय वैज्ञानिक) फेलोशिप: प्रवासी भारतीय वैज्ञानिकों को देशी संस्थानों से जोड़ने के लिए प्रारंभ किया गया।
- VAJRA (विजिटिंग एडवांस्ड जॉइंट रिसर्च) योजना: यह फेलोशिप कार्यक्रम अप्रवासी भारतीयों (NRI) और भारतीय मूल के व्यक्तियों (PIO) को भारतीय अनुसंधान संस्थानों में अल्पकालिक पदों की पेशकश करता है।
- इसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना और भारत के अनुसंधान एवं विकास पारिस्थितिकी तंत्र के लिए विदेशी वैज्ञानिकों की विशेषज्ञता का लाभ उठाना है।
- अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF): भारत के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, अनुसंधान संस्थानों और R&D प्रयोगशालाओं में अनुसंधान एवं नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास।
- परमार्थ समर्थन: भारतीय परोपकार रिपोर्ट 2025 के अनुसार, 2024 में निजी सामाजिक क्षेत्र की फंडिंग ₹1.31 लाख करोड़ तक पहुँच गई। टाटा ट्रस्ट्स, इन्फोसिस फाउंडेशन और विप्रो फाउंडेशन जैसी संस्थाएँ अनुसंधान और विकास प्रयासों को बढ़ावा दे रही हैं।
चुनौतियाँ
- सीमित अनुसंधान अवसंरचना: कई संस्थानों में अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, अंतःविषय अनुसंधान वातावरण और अनुसंधान स्वतंत्रता की कमी है।
- अपर्याप्त स्टार्टअप अनुदान: भारत का शोध प्रारंभिक वित्तपोषण अमेरिका, यूरोपीय संघ या चीन की तुलना में काफी कम होता है।
- अल्पकालिक दृष्टिकोण: वर्तमान कार्यक्रम अधिकतर अस्थायी पदों पर केंद्रित हैं, दीर्घकालिक संस्थागत एकीकरण पर नहीं।
- ब्यूरोक्रेटिक लालफीताशाही: जटिल अनुमोदन प्रक्रियाएँ, अनुसंधान एजेंडे में कठोरता, और धीमी वित्त वितरण प्रतिभा पुनर्वास को हतोत्साहित करते हैं।
- कम निवेश: भारत अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर अपनी GDP का मात्र 0.65% व्यय करता है (NITI Aayog रिपोर्ट के अनुसार), जबकि चीन (2.4%) और अमेरिका (3.45%) अधिक निवेश करते हैं।
निष्कर्ष
- अमेरिकी अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र में गिरावट भारत के लिए एक ऐतिहासिक अवसर प्रस्तुत करती है, जिससे वह एक वैश्विक वैज्ञानिक शक्ति के रूप में पुनर्प्रतिष्ठित हो सकता है।
- प्रवासी प्रतिभाओं को अपनाकर, अवसंरचना और अनुसंधान स्वायत्तता में निवेश करके, भारत ज्ञान आयात करने से नवाचार निर्यात करने की दिशा में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है।
Source: IE
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संक्षिप्त समाचार 16-05-2025
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