पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान और प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- भारत की कुल डेटा केंद्र क्षमता 2020 में लगभग 375 मेगावॉट से बढ़कर 2025 तक लगभग 1500 मेगावॉट हो गई है, जो डिजिटलीकरण, क्लाउड सेवाओं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा संचालित तीव्र विस्तार को दर्शाती है।
डेटा केंद्र क्या हैं?
- डेटा केंद्र एक भौतिक सुविधा है जो किसी संगठन के आईटी संचालन और उपकरणों को केंद्रीकृत करती है ताकि विशाल मात्रा में डेटा को संग्रहित, संसाधित एवं प्रबंधित किया जा सके। डेटा केंद्र के मुख्य घटक हैं: आईटी अवसंरचना और सहायक अवसंरचना।
- आईटी अवसंरचना:
- सर्वर: उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटर जो डेटा संसाधित करते हैं और अनुप्रयोग चलाते हैं।
- स्टोरेज सिस्टम: ड्राइव्स (SSD या HDD) की बड़ी श्रृंखलाएँ जो डिजिटल फाइलें और डेटाबेस संग्रहित करती हैं।
- नेटवर्किंग: राउटर्स, स्विच और फाइबर-ऑप्टिक केबलों का जटिल जाल जो सर्वरों को आपस में और इंटरनेट से जोड़ता है।
- सहायक अवसंरचना:
- विद्युत प्रणाली: अतिरिक्त यूटिलिटी फीड्स, बैकअप जनरेटर और अनइंटरप्टिबल पावर सप्लाइज(UPS) ताकि विद्युत आपूर्ति कभी बाधित न हो।
- कूलिंग सिस्टम: उन्नत एयर कंडीशनिंग (CRAC/CRAH) या तरल शीतलन ताकि हजारों सर्वरों द्वारा उत्पन्न विशाल ऊष्मा से हार्डवेयर को बचाया जा सके।
- सुरक्षा: बायोमेट्रिक स्कैनर, निगरानी और अग्नि-नियंत्रण प्रणाली जैसी भौतिक सुरक्षा, साथ ही डिजिटल फायरवॉल।
भारत का डेटा केंद्र पारिस्थितिकी तंत्र
- AI कंप्यूट क्षमता ढाँचा के अंतर्गत लगभग 38,231 GPUs को 14 पैनलयुक्त सेवा प्रदाताओं/डेटा केंद्रों के माध्यम से शामिल किया गया है।
- ये डेटा केंद्र देशभर में मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, नोएडा और जामनगर जैसे स्थानों पर स्थित हैं, जो प्रमुख आर्थिक एवं कनेक्टिविटी केंद्रों के निकट डिजिटल अवसंरचना के समूह को दर्शाते हैं।
डेटा केंद्रों से बढ़ती विद्युत माँग
- विद्युत माँग: AI वर्कलोड्स में बड़ी संख्या में GPUs का उपयोग होता है, जहाँ प्रत्येक रैक 80–150 किलोवॉट विद्युत खपत करता है, जबकि पारंपरिक एंटरप्राइज सर्वर केवल 15–20 किलोवॉट खपत करते हैं।
- यह उच्च संगणनात्मक तीव्रता विद्युत की अपार माँग उत्पन्न करती है, जिससे AI डेटा केंद्र क्षेत्र में ऊर्जा खपत का सबसे बड़ा चालक बन गया है।
- विद्युत मंत्रालय के अनुसार, डेटा केंद्रों से विद्युत की माँग 2031–32 तक 13.56 गीगावॉट तक पहुँचने का अनुमान है।
डेटा केंद्रों को ऊर्जा प्रदान करने में परमाणु ऊर्जा की भूमिका
- AI-आधारित डेटा केंद्रों को अपनी तेजी से बढ़ती विद्युत की माँग पूरी करने के लिए सतत और स्वच्छ ऊर्जा समाधान की आवश्यकता है।
- यद्यपि नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियों की प्रथम पसंद रही है, किंतु इसमें अस्थिरता और अपर्याप्त भंडारण जैसी चुनौतियाँ हैं।
- परमाणु ऊर्जा एक व्यवहार्य समाधान प्रस्तुत करती है क्योंकि यह स्वच्छ और चौबीसों घंटे उपलब्ध विद्युत आपूर्ति प्रदान करती है।
- सरकार ने भारत के रूपांतरण हेतु परमाणु ऊर्जा का सतत दोहन और संवर्धन (SHANTI) अधिनियम अधिनियमित किया है ताकि देश में परमाणु ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ किया जा सके।
- यह अधिनियम भविष्य में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) और सूक्ष्म परमाणु रिएक्टर की तैनाती का समर्थन करता है।
आगे की राह
- उन्नत शीतलन तकनीकों का अपनाना: उद्योग को डायरेक्ट-टू-चिप लिक्विड कूलिंग, एडियाबेटिक कूलिंग और इमर्शन कूलिंग जैसी तकनीकों को अपनाना चाहिए ताकि जल खपत न्यूनतम हो और ऊर्जा दक्षता बढ़े।
- रणनीतिक स्थान नियोजन: ऐसे क्षेत्रों में डेटा केंद्र स्थापित करना जहाँ पर्याप्त विद्युत उपलब्ध हो, ठंडा जलवायु और जल संसाधन हों, परिचालन लागत एवं पर्यावरणीय दबाव को कम कर सकता है।
स्रोत: PIB
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संक्षिप्त समाचार 16-03-2026