दिल्ली ‘कार्बन क्रेडिट्स’ से राजस्व अर्जित करेगी

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण

संदर्भ

  • दिल्ली सरकार द्वारा घोषणा की है कि उसने कार्बन क्रेडिट मौद्रीकरण के लिए एक ढाँचे को स्वकृति प्रदान ।
    • सरकार ने इस ढाँचे या इसके क्रियान्वयन की समयसीमा और प्रक्रिया के बारे में सार्वजनिक रूप से अधिक विवरण जारी नहीं किए हैं।

परिचय

  • दिल्ली सरकार की गतिविधियाँ जैसे इलेक्ट्रिक बसों का संचालन, वृक्षारोपण अभियान, सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना और अपशिष्ट प्रबंधन, नई नीति के अंतर्गत कार्बन क्रेडिट उत्पन्न करने के लिए उपयोग की जाएँगी।
    • इन पहलों के माध्यम से उत्सर्जन में कमी को वैज्ञानिक रूप से मापा जाएगा, कार्बन क्रेडिट के रूप में पंजीकृत किया जाएगा और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कार्बन बाजारों में बेचा जाएगा ताकि राजस्व उत्पन्न हो सके।
  • अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार दस्तावेज़ीकरण और पंजीकरण संभालने के लिए एक विशेष एजेंसी का चयन किया जाएगा।
    • यह मॉडल राजस्व-साझाकरण पर आधारित है, जिसमें सरकार को कोई अग्रिम लागत नहीं होगी।
    • सभी आय राज्य की समेकित निधि में जमा की जाएगी।
  • दिल्ली इस तरह की नीति को स्वीकृति देने वाले राज्यों में अग्रणी है।
    • महाराष्ट्र ने चार-पाँच महीने पहले ऐसी ही एक नीति को स्वीकृति दी थी।
    • यह तंत्र सरकार को कार्बन उत्सर्जन कम करने वाली गतिविधियों में संलग्न होने के लिए प्रत्यक्ष वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करता है।

कार्बन बाजार

  • कार्बन बाजार ऐसे व्यापारिक तंत्र हैं जिनमें कार्बन क्रेडिट खरीदे और बेचे जाते हैं।
  • कंपनियाँ या व्यक्ति अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की क्षतिपूर्ति करने के लिए उन संस्थाओं से कार्बन क्रेडिट खरीद सकते हैं जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम या समाप्त करती हैं।
  • एक व्यापार योग्य कार्बन क्रेडिट एक टन कार्बन डाइऑक्साइड या किसी अन्य ग्रीनहाउस गैस की समकक्ष मात्रा को कम करने, अवशोषित करने या टालने के बराबर होता है।
  • जब किसी क्रेडिट का उपयोग उत्सर्जन को कम करने, अवशोषित करने या टालने के लिए किया जाता है, तो वह एक ऑफसेट बन जाता है और अब व्यापार योग्य नहीं रहता।
  • कार्बन बाजार दो प्रकार के होते हैं:
    • अनुपालन बाजार : ये किसी राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और/या अंतरराष्ट्रीय नीति या नियामक आवश्यकता के परिणामस्वरूप बनाए जाते हैं।
    • स्वैच्छिक बाजार : राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्बन क्रेडिट का स्वैच्छिक रूप से जारी करना, खरीदना और बेचना।

वैश्विक कार्बन मूल्य निर्धारण परिदृश्य में भारत की स्थिति

  • भारत 2024 में कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) को अपनाकर दर-आधारित उत्सर्जन व्यापार प्रणाली (Rate-based ETS) की ओर बढ़ रहा है।
    • दर-आधारित ETS वह प्रणाली है जिसमें कुल उत्सर्जन पर कोई सीमा नहीं होती, लेकिन व्यक्तिगत संस्थाओं को एक प्रदर्शन मानक दिया जाता है जो उनके शुद्ध उत्सर्जन पर सीमा के रूप में कार्य करता है।
  • राष्ट्रीय ETS प्रारंभ में नौ ऊर्जा-गहन औद्योगिक क्षेत्रों को कवर करेगा।
  • यह योजना उत्सर्जन की तीव्रता पर केंद्रित है, न कि कुल उत्सर्जन सीमा पर।
  • मानक उत्सर्जन तीव्रता स्तरों से बेहतर प्रदर्शन करने वाली इकाइयों को क्रेडिट प्रमाणपत्र जारी किए जाएँगे।
कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS)

इसमें दो प्रमुख तत्व शामिल हैं:
बाध्यकारी संस्थाओं (मुख्यतः औद्योगिक क्षेत्रों) के लिए अनुपालन तंत्र।
स्वैच्छिक भागीदारी के लिए ऑफसेट तंत्र।
– CCTS का उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था को डीकार्बोनाइज करने के प्रयासों में संस्थाओं को प्रोत्साहित और समर्थन करना है।
– CCTS ने संस्थागत ढाँचा स्थापित करके भारतीय कार्बन बाजार (ICM) की नींव रखी।

कार्बन बाजार तत्परता को सुदृढ़ करने के लिए सरकारी कदम

  • COP 27 के दौरान उजागर किया गया कि भारत सामान्य लेकिन विभेदित जिम्मेदारियाँ और संबंधित क्षमताएँ (CBDR-RC) सिद्धांतों के माध्यम से अपने विकासात्मक आवश्यकताओं को कम कार्बन उत्सर्जन के साथ संतुलित करता है।
  • भारत के प्रयासों में शामिल हैं:
    • मिशन LiFE और ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम ताकि सतत जीवनशैली को प्रोत्साहन दिया जा सके।
    • भारतीय कार्बन बाजार (NSCICM) के लिए राष्ट्रीय संचालन समिति और ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) का गठन, जो विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत है।
    • निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए प्रोत्साहन।

निष्कर्ष

  • जैसे-जैसे वैश्विक बाजार विकसित हो रहे हैं और CBAM जैसे उपकरण बाहरी दबाव उत्पन्न कर रहे हैं, भारत अपनी नीतियों को प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने और जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए संरेखित कर रहा है।
  • कुल उत्सर्जन सीमा की बजाय उत्सर्जन तीव्रता पर ध्यान केंद्रित करके, भारत की दर-आधारित ETS विकास और डीकार्बोनाइजेशन के बीच संतुलन बनाने वाली अर्थव्यवस्था के लिए एक व्यावहारिक एवं लचीला मार्ग प्रदान करती है।

स्रोत: IE

 

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