भारतीय न्यायपालिका का डिजिटलीकरण

पाठ्यक्रम: GS2/न्यायपालिका

समाचार में

  • केरल के वायनाड ज़िले का कलपेट्टा जिला भारत का प्रथम पूर्णतः पेपरलेस जिला न्यायालय प्रणाली बन गया है, जहाँ सभी न्यायिक प्रक्रियाएँ — केस दाखिल करने से लेकर अंतिम निर्णय तक — डिजिटल रूप से संचालित की जाती हैं।

भारतीय न्यायपालिका का डिजिटलीकरण

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत की न्यायपालिका और कानून प्रवर्तन में बड़ा परिवर्तन ला रही है, जिससे दक्षता, पहुँच एवं निर्णय-प्रक्रिया में सुधार हो रहा है।
  • इसका उद्देश्य मामलों के लंबित रहने को कम करना, पारदर्शिता बढ़ाना और न्याय तक पहुँच को सुलभ बनाना है।

डिजिटलीकरण का महत्व

  • न्याय तक पहुँच: डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म भौगोलिक बाधाओं को कम करते हैं, जिससे नागरिक ऑनलाइन मामलों को ट्रैक कर सकते हैं।
    • एआई एकीकरण: न्यायिक प्रक्रियाओं, केस प्रबंधन, कानूनी शोध और पुलिसिंग में एआई का उपयोग संचालन को सरल बना रहा है, देरी कम कर रहा है तथा न्याय तक पहुँच को व्यापक बना रहा है।
  • पारदर्शिता: वास्तविक समय के अपडेट और डिजिटल रिकॉर्ड हेरफेर की संभावना को न्यूनतम करते हैं।
  • दक्षता: स्वचालन कागज़ी कार्य को कम करता है, सम्मन/वारंट की प्रक्रिया को तीव्र करता है और केस प्रबंधन को सरल बनाता है।
  • भाषाई समावेशिता: एआई-आधारित अनुवाद उपकरण भारत की भाषाई विविधता को कानूनी कार्यवाही में जोड़ने में सहायता करते हैं।

चुनौतियाँ

  • ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित इंटरनेट पहुँच और डिजिटल साक्षरता की कमी समावेशिता में बाधा डालती है।
  • कई जिला न्यायालयों में पर्याप्त हार्डवेयर, कनेक्टिविटी और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी है।
  • संवेदनशील न्यायिक डेटा के लिए सुदृढ़ साइबर सुरक्षा ढाँचे की आवश्यकता है।
  • पारंपरिक कानूनी प्रथाएँ और हितधारकों की अनिच्छा अपनाने की गति को धीमा करती हैं।

संबंधित कदम

  • भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक एआई समिति का गठन किया है, जो भारतीय न्यायपालिका में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की अवधारणा, क्रियान्वयन और निगरानी के लिए उत्तरदायी है।
  • ई-कोर्ट्स परियोजना के तीसरे चरण के अंतर्गत, जिसे 2023-24 से चार वर्षों के लिए मंज़ूरी दी गई है, एआई और ब्लॉकचेन जैसी भविष्य की तकनीकी प्रगतियों के लिए ₹53.57 करोड़ की राशि आवंटित की गई है।
  • एक एआई-आधारित उपकरण, SUPACE (न्यायालय दक्षता में सर्वोच्च न्यायालय पोर्टल सहायता), विकास के प्रायोगिक चरण में है।
    • यह उपकरण मामलों के तथ्यात्मक ढाँचे को समझने, पूर्ववृत्तियों की बुद्धिमान खोज करने और मामलों की पहचान करने के लिए एक मॉड्यूल विकसित करने का लक्ष्य रखता है।
  • इंटर-ऑपरेबल आपराधिक न्याय प्रणाली (ICJS) पुलिस, फॉरेंसिक, जेल और न्यायालयों को एकीकृत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म में जोड़ता है।
  • राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (NJDG) न्यायालयों में मामलों की लंबित स्थिति और निपटान पर वास्तविक समय का डेटा प्रदान करता है।

निष्कर्ष

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत की न्यायपालिका और कानून प्रवर्तन को दक्षता, पहुँच एवं शासन में सुधार करके पुनः आकार दे रही है — उन्नत केस प्रबंधन, कानूनी शोध तथा अपराध रोकथाम उपकरणों के माध्यम से।
  • हालाँकि इसके अपनाने के लिए सुदृढ़ डेटा सुरक्षा, पारदर्शिता और कानूनी सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है ताकि मानव निर्णय का पूरक बन सके, लेकिन निरंतर निवेश एवं नियमन न्याय प्रणाली को तीव्र, अधिक पारदर्शी और सभी के लिए सुलभ बना सकते हैं।

स्रोत :BS


 

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