पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था
संदर्भ
- लोकसभा में अध्यक्ष को पदच्युत करने के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए नोटिस लिया जा सकता है। आरोप है कि अध्यक्ष ने ‘स्पष्ट रूप से पक्षपातपूर्ण’ तरीके से कार्य किया है।
- तीन लोकसभा अध्यक्ष — जी. वी. मावलंकर (1954), हुकम सिंह (1966), और बलराम जाखड़ (1987) — ऐसे प्रस्तावों का सामना कर चुके हैं, यद्यपि इनमें से कोई भी पारित नहीं हुआ।
लोकसभा के अध्यक्ष
- लोकसभा अध्यक्ष सदन के संचालन और व्यवस्था बनाए रखने के लिए उत्तरदायी होते हैं।
- चुनाव: अध्यक्ष का चुनाव लोकसभा के सदस्य स्वयं में से करते हैं।
- चुनाव आम चुनावों के बाद नई लोकसभा की पहली बैठक में होता है।
- अध्यक्ष पद पर तब तक बने रहते हैं जब तक लोकसभा भंग न हो जाए, या वे त्यागपत्र न दें अथवा हटाए न जाएँ।
- पदच्युति: अध्यक्ष को लोकसभा के सभी सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा हटाया जा सकता है।
- प्रस्ताव लाने से पूर्व 14 दिन का नोटिस आवश्यक है।
- हटाने के प्रस्ताव पर विचार के दौरान अध्यक्ष सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते।
- बैठक की अध्यक्षता उपाध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य द्वारा की जाती है।
- अधिकार: अध्यक्ष चर्चा में भाग ले सकते हैं और स्वयं का बचाव कर सकते हैं।
- वे प्रस्ताव पर प्रथम मतदान कर सकते हैं, किंतु इस स्थिति में निर्णायक मत (casting vote) नहीं दे सकते।
- कार्यकाल: लोकसभा भंग होने के बाद भी अध्यक्ष पद पर बने रहते हैं, जब तक नई लोकसभा नया अध्यक्ष न चुन ले।
शक्तियाँ और कार्य
- अध्यक्षीय शक्तियाँ: लोकसभा की बैठकों की अध्यक्षता करना।
- सदन में अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखना।
- तय करना कि कौन सदस्य बोलेगा और कितनी देर तक।
- प्रशासनिक शक्तियाँ: लोकसभा सचिवालय का प्रमुख होना।
- विभिन्न संसदीय समितियों के अध्यक्षों की नियुक्ति करना।
- विधायी शक्तियाँ: यह निर्णय करना कि कोई विधेयक मनी बिल है या नहीं।
- प्रस्ताव, संकल्प और प्रश्नों की अनुमति देना।
- अनुशासनात्मक शक्तियाँ: अव्यवस्थित आचरण पर सदस्यों को निलंबित या निष्कासित करना।
- गणपूर्ति की कमी या अव्यवस्था के कारण बैठक स्थगित करना।
- निर्णायक मत (Casting Vote): अध्यक्ष सामान्यतः मतदान नहीं करते, परंतु बराबरी की स्थिति में निर्णायक मत दे सकते हैं।
- दलबदल विरोधी भूमिका: संविधान की दसवीं अनुसूची के अंतर्गत सदस्यों की अयोग्यता पर निर्णय लेना।
संवैधानिक अनुच्छेद
- अनुच्छेद 93: लोकसभा को यथाशीघ्र अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनना अनिवार्य है।
- अनुच्छेद 94: अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद रिक्त होने, इस्तीफ़ा देने और हटाए जाने की प्रक्रिया का प्रावधान करता है।
- अनुच्छेद 95: उपाध्यक्ष को अध्यक्ष की अनुपस्थिति या पद रिक्त होने पर उनके कर्तव्यों का निर्वहन करने का अधिकार देता है।
- अनुच्छेद 110:धन विधेयक की परिभाषा देता है, जिसमें कराधान, सरकारी ऋण या समेकित/आपात निधि से व्यय जैसे वित्तीय विषय शामिल होते हैं।
- ऐसे विधेयक केवल लोकसभा में राष्ट्रपति की अनुशंसा से प्रस्तुत किए जा सकते हैं, और अध्यक्ष का प्रमाणन अंतिम होता है।
स्रोत: TH