पाठ्यक्रम: GS2/ शासन, GS3/ अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- नवीन आयकर अधिनियम, 2025 को 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी किया गया है। यह अधिनियम आयकर अधिनियम, 1961 का स्थान लेता है। इसका उद्देश्य पारदर्शिता, पूर्वानुमेयता तथा अनुपालन की सरलता को बढ़ाना है।
अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ
- ‘कर वर्ष(Tax Year)’ की अवधारणा का परिचय: अधिनियम ने ‘आकलन वर्ष’ और ‘पूर्ववर्ती वर्ष’ की संकल्पनाओं को समाप्त कर एकीकृत अवधारणा ‘कर वर्ष’ प्रस्तुत की है। इसे वित्तीय वर्ष के 12 माह की अवधि के रूप में परिभाषित किया गया है, जो 1 अप्रैल से प्रारंभ होती है।
- योजनाएँ बनाने का अधिकार: अधिनियम केंद्र सरकार को बिना आमने-सामने मूल्यांकन (Faceless Assessments) तथा कुशल कर प्रशासन हेतु योजनाएँ बनाने का अधिकार प्रदान करता है।
- सरलीकृत अनुपालन: स्रोत पर कर कटौती (TDS) से संबंधित प्रावधान, जो पूर्व में विभिन्न धाराओं में विभाजित थे, अब एकीकृत कर धारा 393 में समाहित किए गए हैं।
- डिजिटल-प्रथम ढाँचा: अधिनियम ने “आभासी डिजिटल क्षेत्र” (Virtual Digital Space) को परिभाषित किया है, जिसमें ईमेल, क्लाउड सर्वर, ऑनलाइन निवेश एवं ट्रेडिंग खाते तथा कर प्रवर्तन हेतु वेबसाइटें सम्मिलित हैं।
- आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों (VDAs) का विस्तार: VDAs की परिभाषा में क्रिप्टोकरेंसी एवं टोकनयुक्त परिसंपत्तियाँ सम्मिलित की गई हैं।
- सामान्य कर-परिहार विरोधी नियम (GAAR): अधिनियम में GAAR को सम्मिलित किया गया है, जिसका उद्देश्य उन व्यवस्थाओं को अस्वीकार करना है जिनमें व्यावसायिक सार नहीं है और जो केवल कर बचाव हेतु बनाई गई हैं।
- संरचनात्मक परिवर्तन: अधिनियम में धाराओं की संख्या 819 से घटाकर 536 कर दी गई है। नियमों की संख्या 511 से घटाकर 333 कर दी गई है।
- प्रपत्रों एवं अनुसूचियों का सरलीकरण: प्रपत्रों की संख्या 390 से घटाकर 190 कर दी गई है। अनुसूचियों की संख्या 14 से बढ़ाकर 16 कर दी गई है।
सामान्य कर-परिहार विरोधी नियम (GAAR)
- GAAR का उद्देश्य कृत्रिम कानूनी खामियों का उपयोग कर केवल कर देयता कम करने वाली व्यवस्थाओं को रोकना है।
- भारत में GAAR का कार्यान्वयन 1 अप्रैल, 2017 से हुआ।
- लक्ष्य: “अस्वीकार्य परिहार व्यवस्थाएँ” (Impermissible Avoidance Arrangements – IAAs) जिनका मुख्य उद्देश्य कर लाभ प्राप्त करना है।
- GAAR के अंतर्गत कर प्राधिकरण कर देयताओं का पुनः गणना कर सकते हैं, कर लाभ अस्वीकार कर सकते हैं तथा कटौतियों या कर छूटों को निरस्त कर सकते हैं।
व्यक्तियों हेतु प्रमुख लाभ
- एकीकृत प्रपत्र 121 का परिचय: अधिनियम ने प्रपत्र 15G और 15H को मिलाकर एकीकृत प्रपत्र 121 प्रस्तुत किया है। इसके अंतर्गत सभी पात्र निवासी व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार (HUFs) तथा निर्दिष्ट संस्थाएँ आयु की परवाह किए बिना इसका उपयोग कर सकती हैं।
- प्रपत्र 26AS का रूपांतरण: प्रपत्र 26AS को प्रपत्र 168 में परिवर्तित किया गया है, जो वार्षिक सूचना विवरण (AIS) से आँकड़े एकीकृत कर करदाता की वित्तीय गतिविधियों का समग्र दृष्टिकोण प्रदान करता है।
- स्रोत पर कर संग्रह (TCS) में कमी:
- शिक्षा एवं चिकित्सा प्रयोजनों हेतु ₹10 लाख से अधिक प्रेषण पर TCS दर 5% से घटाकर 2% कर दी गई है।
- ₹10 लाख से अधिक विदेशी पर्यटन पैकेजों पर TCS दर भी 5% से घटाकर 2% कर दी गई है।
- FAST-DS (विदेशी परिसंपत्ति प्रकटीकरण योजना, 2026): अधिनियम ने FAST-DS योजना प्रस्तुत की है, जो एक समयबद्ध अनुपालन खिड़की है, जिससे अप्रकाशित विदेशी परिसंपत्तियों एवं आय का स्वैच्छिक प्रकटीकरण संभव होगा।
निष्कर्ष
- नवीन आयकर अधिनियम, 2025 भारत में एक पारदर्शी, कुशल एवं करदाता-अनुकूल प्रत्यक्ष कर प्रणाली की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है।
- कानूनी संरचनाओं को सरल बनाकर, डिजिटल प्रक्रियाओं को अपनाकर तथा वैश्विक मानकों के अनुरूप होकर यह अधिनियम आधुनिक राजकोषीय ढाँचे की नींव रखता है।
Source: TH
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