केंद्रीय बजट 2026-27 ने व्यवसाय सुगमता को विकास और प्रगति का स्तंभ पुनः स्थापित किया है, जिसमें डिजिटलीकरण, कर सुनिश्चितता, निवेशक पहुँच और वाद-विवाद में कमी पर विशेष ध्यान दिया गया है।
व्यवसाय सुगमता (Ease of Doing Business – EoDB)
यह भारत के आर्थिक सुधार एजेंडा का आधारस्तंभ बनकर उभरा है और इसे विकास एवं प्रगति का प्रमुख स्तंभ पुनः पुष्टि किया गया है।
केंद्रीय बजट 2026-27 का ध्यान डिजिटल व्यापार सुविधा, कर सुनिश्चितता, अनुपालन और वाद-विवाद में कमी, विश्वास-आधारित सीमा शुल्क प्रणाली तथा निवेश-अनुकूल कर व्यवस्था पर केंद्रित है।
अरविंद पनगड़िया की अध्यक्षता वाले 16वें वित्त आयोग ने ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों को ₹7,91,493 करोड़ की अनुदान राशि की सिफ़ारिश की है, साथ ही स्थानीय शासन को सुदृढ़ करने हेतु संरचनात्मक सुधारों का प्रस्ताव दिया है।
वित्त आयोग क्या है?
वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है, जिसे भारत के राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 280 के अंतर्गत गठित किया जाता है। इसका कार्य यह सिफ़ारिश करना है कि केंद्र सरकार द्वारा संकलित कर राजस्व को केंद्र और राज्यों के बीच किस प्रकार वितरित किया जाए।
वित्त आयोग का पुनर्गठन प्रत्येक पाँच वर्ष में किया जाता है और सामान्यतः इसे अपनी सिफ़ारिशें केंद्र को प्रस्तुत करने में कुछ वर्ष लगते हैं।
मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स में अवैध कोयला खदान विस्फोट में 18 श्रमिकों की मृत्यु हुई, जो नियामक प्रतिबंधों के बावजूद रैट-होल खनन की निरंतर प्रचलन को उजागर करता है।
रैट-होल कोयला खनन क्या है?
अवैध कोयला खनन झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और मेघालय के जयंतिया, खासी तथा गारो हिल्स में सबसे अधिक प्रचलित है, जहाँ कोयला परतें पतली एवं बिखरी हुई होती हैं, जिससे यंत्रीकृत खनन आर्थिक रूप से आकर्षक नहीं रहता।
The Union Budget 2026-27 has estimated ₹12.2 lakh crore for public capital expenditure, from ₹2.63 lakh crore in FY18.
Key Announcements in Union Budget 2026-27For the Capital Goods Sector
Increased Public Capital Expenditure: Public capital expenditure proposed at ₹12.2 lakh crore in FY 2026–27 reinforcing infrastructure-led growth and supporting demand for capital goods across sectors such as transport, energy, urban infrastructure, and industry.
In the Union Budget 2026-27, a comprehensive and integrated policy framework has been declared to bolster the entire textile value chain- from fibre to fashion, from village industries to global markets.
Integrated Programme for the Textile Sector
Objective: Boosting competitiveness, fostering self-reliance and creating jobs.