पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान और प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- भारत में डिजिटल तकनीकों को तीव्रता से अपनाए जाने के कारण विश्वसनीय डेटा अवसंरचना की माँग बढ़ रही है। इस परिप्रेक्ष्य में डेटा के भंडारण तथा डिजिटल सेवाओं को संचालित करने के लिए क्लाउड कंप्यूटिंग एक केंद्रीय भूमिका निभा रही है।
क्लाउड कंप्यूटिंग क्या है?
- क्लाउड कंप्यूटिंग एक ऐसी तकनीक है, जिसके माध्यम से उपयोगकर्ता इंटरनेट के जरिए कंप्यूटिंग संसाधनों, जैसे डेटा स्टोरेज, सर्वर, सॉफ्टवेयर एवं डेटा प्रोसेसिंग क्षमताओं तक पहुँच प्राप्त कर सकते हैं।
- स्वयं के सर्वर खरीदने एवं उनका रखरखाव करने के बजाय संगठन अपनी आवश्यकता के अनुसार इन संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं।
- उदाहरण: गूगल ड्राइव उपयोगकर्ताओं को अपने दस्तावेज ऑनलाइन संग्रहीत करने तथा विभिन्न उपकरणों के माध्यम से उन तक पहुँच प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करता है।
- क्लाउड कंप्यूटिंग भौतिक अवसंरचना पर निर्भर करती है। डेटा सेंटर में वे सर्वर, स्टोरेज सिस्टम एवं नेटवर्किंग उपकरण स्थापित होते हैं, जो इन सेवाओं को संभव बनाते हैं।
- सर्वर रूम एक समर्पित स्थान होता है, जहाँ डेटा संग्रहीत करने तथा डिजिटल सेवाओं को संचालित करने वाले कंप्यूटर एवं सर्वर रखे जाते हैं।

क्लाउड मॉडल के प्रकार
- पब्लिक क्लाउड : इसमें किसी तृतीय पक्ष सेवा प्रदाता द्वारा उपलब्ध कराई गई अवसंरचना का उपयोग अनेक ग्राहकों द्वारा साझा रूप से किया जाता है।
- उदाहरण: कोई व्यवसाय अथवा वीडियो स्ट्रीमिंग कंपनी साझा सर्वरों के माध्यम से लाखों दर्शकों को अपनी सेवाएँ प्रदान करती है।
- प्राइवेट क्लाउड : इसमें क्लाउड अवसंरचना केवल एक ही संगठन के उपयोग के लिए समर्पित होती है।
- उदाहरण: कोई राज्य का कोषागार कार्यालय संवेदनशील प्रशासनिक अभिलेखों की सुरक्षा एवं उन पर बेहतर नियंत्रण बनाए रखने के लिए भुगतान और लेखा संबंधी डेटा को प्राइवेट क्लाउड पर संग्रहीत करता है।
- हाइब्रिड क्लाउड: इसमें पब्लिक एवं प्राइवेट क्लाउड दोनों प्रकार के परिवेशों का संयोजन किया जाता है।
- उदाहरण: कोई नगर निगम संपत्ति कर भुगतान पोर्टल को पब्लिक क्लाउड पर तथा नागरिकों के व्यक्तिगत अभिलेखों को प्राइवेट क्लाउड पर संग्रहीत करता है।
क्लाउड सेवाओं के प्रकार
- इन्फ्रास्ट्रक्चर एज अ सर्विस (IaaS): इसके अंतर्गत उपयोगकर्ता भौतिक उपकरण खरीदने के बजाय वर्चुअल सर्वर, स्टोरेज एवं नेटवर्क जैसे कंप्यूटिंग संसाधनों को किराये पर प्राप्त कर सकते हैं।
- उदाहरण: कोई ऑनलाइन रिटेलर अपनी वेबसाइट संचालित करने के लिए क्लाउड सर्वरों को किराये पर ले सकता है तथा त्योहारी बिक्री के दौरान वेबसाइट पर बढ़ने वाले ट्रैफिक के अनुरूप अपनी कंप्यूटिंग क्षमता में वृद्धि कर सकता है।
- प्लेटफॉर्म एज अ सर्विस (PaaS): यह डेवलपर्स को अंतर्निहित अवसंरचना का प्रबंधन किए बिना एप्लिकेशन विकसित करने, उनका परीक्षण करने एवं उन्हें लॉन्च करने के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराता है।
- उदाहरण: मोबाइल बैंकिंग एप्लिकेशन विकसित करने वाली कोई टीम अपने सॉफ्टवेयर के निर्माण एवं परीक्षण के लिए क्लाउड प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकती है।
- सॉफ्टवेयर एज अ सर्विस (SaaS): इसके अंतर्गत इंटरनेट के माध्यम से उपयोग के लिए तैयार सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराया जाता है। इसमें सेवा प्रदाता सॉफ्टवेयर के अपडेट एवं रखरखाव का प्रबंधन करता है।
- उदाहरण: वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए जूम (Zoom)।
- सर्वरलेस कंप्यूटिंग : इसमें डेवलपर्स को सीधे सर्वरों का प्रबंधन किए बिना विशिष्ट कार्यों को संचालित करने की सुविधा मिलती है।
- क्लाउड सेवा प्रदाता अंतर्निहित अवसंरचना का प्रबंधन करता है तथा आवश्यकता के अनुसार कंप्यूटिंग संसाधन उपलब्ध कराता है।
- उदाहरण: कोई ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म ग्राहक द्वारा खरीदारी पूरी करने पर ऑर्डर को स्वचालित रूप से प्रोसेस कर सकता है।
भारत को अधिक क्लाउड अवसंरचना की आवश्यकता क्यों है?
- भारत में बढ़ती डिजिटल गतिविधियों के कारण बड़ी मात्रा में डेटा उत्पन्न हो रहा है, जिसे संग्रहीत, प्रोसेस एवं सुरक्षित रखने की आवश्यकता है।
- मार्च 2026 तक देश में इंटरनेट ग्राहकों की संख्या 1,092.79 मिलियन तक पहुँच गई थी।
- प्रति वायरलेस ग्राहक औसत डेटा खपत 25.51 GB प्रति माह रही, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल वायरलेस डेटा उपयोग 2,85,376 पेटाबाइट तक पहुँच गया।
- क्लाउड अवसंरचना संगठनों को माँग बढ़ने के साथ अपनी कंप्यूटिंग क्षमता का विस्तार करने की सुविधा प्रदान करके इन आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता करती है।
- उदाहरण: कोई परीक्षा पोर्टल पंजीकरण अवधि के दौरान अपने कंप्यूटिंग संसाधनों में वृद्धि कर सकता है तथा पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें कम कर सकता है।
- भारत में क्लाउड सेवाएँ : सितंबर 2026 तक भारत में 30 क्लाउड सेवा प्रदाताओं को सूचीबद्ध किया गया था।
- भारतीय सेवा प्रदाताओं में जियो प्लेटफॉर्म्स, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), BSNL, ITI, रेलटेल, अडानीकनेक्स एवं योट्टा डेटा सर्विसेज शामिल हैं।
- अंतरराष्ट्रीय सेवा प्रदाताओं में गूगल क्लाउड इंडिया, ओरेकल इंडिया, माइक्रोसॉफ्ट कॉर्पोरेशन इंडिया एवं अमेजन वेब सर्विसेज इंडिया शामिल हैं।
- भारत की क्लाउड प्रणाली के आधार स्तंभ के रूप में डेटा सेंटर: डेटा सेंटर में वे सर्वर एवं स्टोरेज सिस्टम स्थापित होते हैं, जो क्लाउड कंप्यूटिंग को संचालित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- अगस्त 2026 तक भारत की डेटा सेंटर क्षमता 1.57 GW तक पहुँच गई थी।
- वर्ष 2030 तक इसके बढ़कर लगभग 8 GW होने का अनुमान है।
मेघराज क्या है?
- मेघराज भारत सरकार का क्लाउड पारितंत्र है।
- इसे वर्ष 2014 में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा ई-गवर्नेंस को गति देने तथा सार्वजनिक क्षेत्र में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) पर होने वाले व्यय का अनुकूलन करने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया था।
- मेघराज 2.0 इस राष्ट्रीय क्लाउड कंप्यूटिंग पहल का दूसरी पीढ़ी का संस्करण है।
भारत द्वारा की गई प्रमुख पहलें
- क्लाउड चयन रूपरेखा : मार्च 2026 में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने क्लाउड चयन रूपरेखा जारी की। यह मंत्रालयों एवं विभागों को डेटा की संवेदनशीलता तथा महत्त्वपूर्ण प्रकृति के आधार पर उपयुक्त क्लाउड अवसंरचना का चयन करने के लिए व्यवस्थित दिशा-निर्देश प्रदान करती है।
- फ्यूचरस्किल्स प्राइम कार्यक्रम: इसे वर्ष 2021 में MeitY एवं नैसकॉम (NASSCOM) द्वारा प्रारंभ किया गया था। इसका उद्देश्य उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में कौशल विकास को प्रोत्साहित करना है।
- यूरोपीय आयोग की वर्ष 2024 की ‘पैक्ट फॉर स्किल्स रिपोर्ट’ में AI, क्लाउड कंप्यूटिंग एवं डेटा एनालिटिक्स के क्षेत्र में उद्योग-केंद्रित प्रशिक्षण के लिए इसे वैश्विक स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त हुआ।
- राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT): इस पहल को पूरक समर्थन प्रदान करते हुए NIELIT देशभर में 56 केंद्रों, 750 संबद्ध संस्थानों एवं 9,000 से अधिक सुविधा केंद्रों का संचालन करता है।
- इसके माध्यम से क्लाउड कंप्यूटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा, ब्लॉकचेन एवं इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसे क्षेत्रों में पेशेवरों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
आगे की राह
- भारत का क्लाउड पारितंत्र तीव्रता से विस्तार कर रहा है। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक देश की क्लाउड डेटा क्षमता में लगभग 4 से 5 गुना वृद्धि होगी।
- डेटा सेंटरों में निवेश से देश की घरेलू डेटा प्रसंस्करण एवं भंडारण क्षमता में वृद्धि हो रही है।
- लक्षित कौशल विकास पहलों के माध्यम से क्लाउड आधारित प्रौद्योगिकियों के लिए कुशल एवं प्रशिक्षित कार्यबल तैयार किया जा रहा है।
- ये सभी प्रयास सामूहिक रूप से नवाचार को प्रोत्साहित कर रहे हैं तथा क्लाउड कंप्यूटिंग को भारत के दीर्घकालिक डिजिटल परिवर्तन का एक महत्त्वपूर्ण आधार स्तंभ बना रहे हैं।
स्रोत: PIB
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संक्षिप्त समाचार 31-10-2026