भारत में साइबर अपराधों में वृद्धि

पाठ्यक्रम: जीएस-3/साइबर सुरक्षा

सन्दर्भ

  • NCRB की क्राइम इन इंडिया 2024 रिपोर्ट के अनुसार, 2023 की तुलना में 2024 में भारत में अपराध की समग्र दर में 6% की कमी आई, लेकिन साइबर अपराध के मामलों में 17% से अधिक की वृद्धि हुई।

साइबर अपराध का परिचय

  • साइबर अपराध उन आपराधिक गतिविधियों को संदर्भित करता है, जिनमें कंप्यूटर, नेटवर्क और डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग किया जाता है।
  • इसमें आभासी क्षेत्र में की जाने वाली अवैध गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है, जिनका उद्देश्य अक्सर कंप्यूटर प्रणालियों, नेटवर्क और डेटा से समझौता करना, उन्हें नुकसान पहुँचाना या उन तक अनधिकृत पहुँच प्राप्त करना होता है।
  • साइबर अपराधी नेटवर्क की कमजोरियों का फायदा उठाने के लिए विभिन्न तकनीकों और उपकरणों का उपयोग करते हैं तथा वे व्यक्तियों, संगठनों या यहाँ तक कि सरकारों को भी निशाना बना सकते हैं।

साइबर अपराधों की प्रकृति:

  • ऐसे फोन कॉल बार-बार प्राप्त होना जिनमें उन वस्तुओं की डिलीवरी के बारे में बताया जाता है जिन्हें उन्होंने कभी ऑर्डर नहीं किया; अधिक लाभ वाले निवेश के नाम पर धोखाधड़ी वाले फोन कॉल; बैंक अधिकारियों द्वारा व्यक्तिगत बैंक खाते का विवरण माँगना; तथा ऐसे फोन कॉल जिनमें बताया जाता है कि उनका फोन अवैध गतिविधियों से जुड़ा हुआ है या किसी अज्ञात नंबर से फोन करके स्वयं को उनका मित्र बताना और तत्काल धन की आवश्यकता होने का दावा करना।
  • पुलिस या किसी अधिकारी के रूप में फोन करके यह दावा करना कि उनका कोई मित्र या रिश्तेदार खतरे में है या उसने किसी प्रकार का अपराध किया है।
  • कार्यप्रणाली (Modus Operandi): 
    • केवल तकनीकी विशेषज्ञता पर निर्भर रहने के बजाय, धोखाधड़ी करने वाले सामाजिक संबंधों और संस्थागत विश्वसनीयता को निशाना बनाते हैं।
    • निवेश संबंधी घोटाले जल्दी अमीर बनने की आकांक्षा का लाभ उठाते हैं, डिलीवरी संबंधी घोटाले ई-कॉमर्स में विश्वास का फायदा उठाते हैं, बैंक का प्रतिरूपण संस्थागत विश्वसनीयता का उपयोग करता है और फर्जी पुलिस कॉल अधिकारी के भय का फायदा उठाते हैं।

साइबर अपराधों का प्रभाव

  • राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा: जब राज्य-प्रायोजित समूह या आपराधिक संगठन महत्त्वपूर्ण अवसंरचना, सरकारी संस्थानों या सैन्य प्रणालियों को निशाना बनाते हैं, तो साइबर अपराध राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं।
  • डेटा उल्लंघन: डेटा उल्लंघन से व्यक्तिगत जानकारी, व्यापार रहस्य, बौद्धिक संपदा और अन्य गोपनीय डेटा उजागर हो जाते हैं, जिससे प्रभावित संस्थाओं को गंभीर क्षति होती है।
  • वित्तीय नुकसान: साइबर धोखाधड़ी, रैनसमवेयर, फिशिंग और ऑनलाइन घोटाले व्यक्तियों, बैंकों, व्यवसायों और सरकारों को पर्याप्त वित्तीय नुकसान पहुँचा सकते हैं।
  • सेवाओं में व्यवधान: साइबर हमले विद्युत ग्रिड, संचार नेटवर्क और परिवहन प्रणालियों जैसी आवश्यक सेवाओं को बाधित करते हैं।
  • विश्वास में कमी: बार-बार होने वाली साइबर धोखाधड़ी और डेटा उल्लंघन से डिजिटल भुगतान, ई-शासन, ऑनलाइन बैंकिंग और अन्य डिजिटल सेवाओं में जनता का विश्वास कम होता है।

घोटालों से निपटने में प्रमुख चुनौतियाँ

  • उच्च-तकनीकी उपकरण: डीपफेक, नंबर स्पूफिंग, एन्क्रिप्टेड संदेश और डार्क वेब पर डेटा लीक जैसी तकनीकों के उपयोग से अपराध के स्रोत की पहचान करना कठिन हो जाता है।
  • मनोवैज्ञानिक दबाव: धोखाधड़ी करने वाले भय, तात्कालिकता और अधिकारी के पद का फायदा उठाते हैं, विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाते हैं।
  • तत्काल भुगतान प्रणालियाँ: UPI और ऑनलाइन बैंकिंग के माध्यम से तेजी से धन हस्तांतरण होने के कारण घोटाला करने वाले खाते फ्रीज होने से पहले ही धन निकाल सकते हैं।
  • प्रवर्तन और रिपोर्टिंग संबंधी बाधाएँ: भय या शर्मिंदगी के कारण पीड़ितों द्वारा शिकायत दर्ज करने में देरी, सीमा-पार कानूनी चुनौतियों के साथ मिलकर समस्या को बढ़ाती है।

साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए भारत सरकार की पहल

  • भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In): CERT-In साइबर सुरक्षा संबंधी घटनाओं से निपटने के लिए राष्ट्रीय नोडल एजेंसी है।
  • यह सक्रिय और प्रतिक्रियात्मक साइबर सुरक्षा सहायता प्रदान करता है तथा देश के साइबर बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा और लचीलेपन को सुनिश्चित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण सूचना अवसंरचना संरक्षण केंद्र (NCIIPC): NCIIPC साइबर खतरों से महत्त्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है।
  • यह महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान और उन्हें निर्दिष्ट करता है तथा इन क्षेत्रों के संगठनों को अपनी साइबर सुरक्षा व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के संबंध में सलाह देता है।
  • महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध साइबर अपराध रोकथाम (CCPWC) योजना: गृह मंत्रालय ने इस योजना के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता प्रदान की है, ताकि साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएँ स्थापित करने, प्रशिक्षण प्रदान करने और कनिष्ठ साइबर सलाहकारों की नियुक्ति के उनके प्रयासों को समर्थन दिया जा सके।
  • जन-जागरूकता: SMS, रेलवे/हवाई अड्डे के प्रदर्शन-पट्टों और CyberDost पहल के माध्यम से नियमित चेतावनियाँ प्रसारित की जाती हैं।
  • स्पूफिंग-रोधी प्रणालियाँ: दूरसंचार विभाग द्वारा घरेलू भारतीय नंबर के रूप में छिपाकर की जाने वाली आने वाली अंतरराष्ट्रीय कॉलों की पहचान और उन्हें अवरुद्ध करने के उपाय किए जाते हैं।
  • भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C): यह कानून प्रवर्तन एजेंसियों (LEAs) को व्यापक और समन्वित तरीके से साइबर अपराधों से निपटने के लिए एक रूपरेखा और पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करता है।
  • I4C के तहत मेवात, जामताड़ा, अहमदाबाद, हैदराबाद, चंडीगढ़, विशाखापत्तनम और गुवाहाटी में सात क्षेत्रों के लिए ‘संयुक्त साइबर समन्वय दल’ गठित किए गए हैं।
  • राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल: इसे जनता को सभी प्रकार के साइबर अपराधों से संबंधित घटनाओं की रिपोर्ट करने में सक्षम बनाने के लिए शुरू किया गया है।
  • ऑनलाइन साइबर शिकायत दर्ज करने में सहायता प्राप्त करने के लिए टोल-फ्री नंबर 1930 को संचालित किया गया है।
  • नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली मॉड्यूल भी शुरू किया गया है, ताकि वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग की जा सके और धोखाधड़ी करने वालों द्वारा धन को निकालने से रोका जा सके।
  • साइबर स्वच्छता केंद्र (बॉटनेट सफाई और मैलवेयर विश्लेषण केंद्र): इस पहल का उद्देश्य बॉटनेट और मैलवेयर संक्रमण के बारे में जागरूकता पैदा करना तथा उनकी पहचान और सफाई के लिए उपकरण उपलब्ध कराना है।
  • यह नागरिकों और संगठनों के लिए साइबर सुरक्षा संबंधी सुझाव और सर्वोत्तम प्रथाएँ भी उपलब्ध कराता है।

स्रोत: TH

 

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