पाठ्यक्रम: GS1/लैंगिक समानता
संदर्भ
- जेंडर स्नैपशॉट 2026 रिपोर्ट के अनुसार, लैंगिक समानता से संबंधित सतत विकास लक्ष्य (SDG) का एक भी लक्ष्य ऐसा नहीं है, जिसके वर्ष 2030 तक प्राप्त होने की दिशा में अपेक्षित प्रगति हो रही हो।
- जारीकर्ता: संयुक्त राष्ट्र महिला (UN Women) और संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक मामलों का विभाग ।
प्रमुख बिंदु
- लक्ष्य निर्धारित समय-सीमा से पीछे: लैंगिक समानता की दिशा में दशकों से हुई प्रगति वर्तमान समय में रुक रही है या पीछे जा रही है। ऐसे समय में संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित लैंगिक समानता संबंधी सतत विकास लक्ष्य (SDG) का कोई भी लक्ष्य वर्ष 2030 तक प्राप्त होने की दिशा में अपेक्षित प्रगति पर नहीं है।
- सतत विकास लक्ष्य 5 का उद्देश्य लैंगिक अंतर को समाप्त करना तथा सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है।
- लैंगिक समानता के लिए वित्तपोषण वर्ष 2021 के बाद से अपने निम्नतम स्तर पर पहुँच गया है, जिसमें महिला अधिकार संगठनों पर विशेष रूप से गंभीर प्रभाव पड़ा है।
- वित्तपोषण में कटौती के बीच 42% संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं ने अपने लैंगिक समानता संबंधी प्रयासों के कमजोर होने की सूचना दी।
- राजनीतिक प्रतिनिधित्व: सात में से छह देशों का नेतृत्व पुरुषों द्वारा किया जा रहा है, जबकि वर्ष 2026 में राष्ट्रीय संसदों में महिलाओं की हिस्सेदारी 27.4% है, जो वर्ष 2015 में 22.3% थी।
- स्थानीय सरकारों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व वर्ष 2023 से 35.6% पर स्थिर बना हुआ है।
- बहुस्तरीय काँच की छत : विश्व स्तर पर कॉरपोरेट मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEO) के पदों पर महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 6% है और सर्वोच्च न्यायालयों में 20% से भी कम संस्थानों का नेतृत्व महिलाएँ करती हैं। परिणामस्वरूप, व्यवसाय, कानून, रोजगार और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले निर्णयों में पुरुषों का वर्चस्व बना हुआ है।
- अवैतनिक देखभाल का भार: महिलाएँ और लड़कियाँ अब भी अनुपातहीन रूप से अधिक अवैतनिक देखभाल संबंधी जिम्मेदारियाँ निभाती हैं। वे पुरुषों की तुलना में अवैतनिक घरेलू कार्य और देखभाल संबंधी कार्यों पर 2.5 गुना अधिक समय व्यतीत करती हैं।
- बाल विवाह: लगभग पाँच में से एक लड़की का विवाह 18 वर्ष की आयु से पहले हो जाता है, जबकि विश्वभर में अनुमानतः 23 करोड़ महिलाएँ और लड़कियाँ महिला जननांग विकृति की पीड़ित हैं।
सुझाव
- सुदृढ़ अधिकार-क्षेत्र, पर्याप्त कर्मचारियों तथा समर्पित और पूर्वानुमेय संसाधनों के माध्यम से राष्ट्रीय लैंगिक समानता तंत्र को सुदृढ़ किया जाए।
- लैंगिक-संवेदनशील बजट निर्माण का विस्तार किया जाए तथा प्रगति और प्रभावों की निगरानी के लिए व्यापक प्रणालियाँ स्थापित की जाएँ।
- सबसे अधिक वंचित समूहों की महिलाओं और लड़कियों को सक्षम बनाकर समावेशी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपाय किए जाएँ।
- महिलाओं के नेतृत्व के संबंध में सामाजिक धारणाओं और विमर्श में परिवर्तन लाकर भेदभावपूर्ण सामाजिक मानदंडों को समाप्त किया जाए तथा महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए अवसर, संसाधन एवं सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँ।
स्रोत: DTE
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