पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 20 अक्टूबर 2026 से लागू होगा।
- भारत–न्यूज़ीलैंड FTA का उद्देश्य आगामी चार से पाँच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके ₹35,000 करोड़ तक पहुँचाना है।
मुक्त व्यापार समझौता (FTA) क्या है?
- मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दो या दो से अधिक देशों के बीच किया गया ऐसा समझौता है, जिसके अंतर्गत वे निम्नलिखित के लिए सहमत होते हैं:
- वस्तुओं पर सीमा शुल्क को कम करना या समाप्त करना;
- सेवाओं के व्यापार को उदार बनाना;
- निवेश को संरक्षण प्रदान करना;
- बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करना।
FTA की प्रमुख विशेषताएँ
- शून्य-शुल्क बाजार पहुँच: भारत–न्यूज़ीलैंड FTA के अंतर्गत भारत के 100% निर्यात पर शुल्क समाप्त कर दिया गया है।
- भारत ने 70.03% टैरिफ लाइनों में बाजार पहुँच की पेशकश की है, जबकि 29.97% टैरिफ लाइनों को अपवर्जन सूची में रखा गया है।

- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रतिबद्धता: न्यूज़ीलैंड आगामी 15 वर्षों में भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करेगा, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक संबंध सुदृढ़ होंगे।
- जैविक प्राथमिक उत्पाद: दोनों पक्षों के बीच जैविक प्रमाणन की पारस्परिक मान्यता पर सहमति बनाई जाएगी।
- MSME सहयोग: छोटे व्यवसायों को व्यापार-संबंधी जानकारी और वैश्विक बाजारों तक पहुँच बनाने में सहायता के लिए संस्थागत संपर्क स्थापित किए जाएंगे।
- तकनीकी सहायता: आयुष, दृश्य-श्रव्य उद्योग, पर्यटन, खेल और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के क्षेत्रों में सहयोग पर सहमति बनी है।
- FTA भारत की आयुष प्रणालियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देता है, चिकित्सा मूल्य-आधारित पर्यटन को प्रोत्साहित करता है तथा भारत को वैश्विक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायता करता है।
- सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र (MFN) व्यवहार: 118 सेवा क्षेत्रों में प्रतिबद्धता की गई है, जबकि 139 क्षेत्रों में सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र (MFN) व्यवहार प्रदान किया जाएगा।
- छात्र गतिशीलता: न्यूज़ीलैंड ने प्रथम बार किसी देश के साथ छात्र गतिशीलता और अध्ययन-पश्चात कार्य वीज़ा संबंधी परिशिष्ट पर हस्ताक्षर किए हैं।
- भारतीय छात्र अध्ययन के दौरान प्रति सप्ताह 20 घंटे तक कार्य कर सकेंगे। भविष्य में नीतिगत परिवर्तन होने पर भी यह व्यवस्था लागू रहेगी। साथ ही, अध्ययन-पश्चात कार्य वीज़ा की अवधि भी विस्तारित की गई है (STEM स्नातक: 3 वर्ष; मास्टर डिग्री: अधिकतम 3 वर्ष; डॉक्टरेट: अधिकतम 4 वर्ष)।
- पेशेवर अवसर: भारत के लिए महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में कुशल भारतीयों को अधिकतम 3 वर्ष तक रहने के लिए 5,000 वीज़ा का कोटा निर्धारित किया गया है।
- वर्किंग हॉलिडे वीज़ा: प्रत्येक वर्ष 1,000 युवा भारतीय 12 माह की अवधि के लिए न्यूज़ीलैंड में बहु-प्रवेश सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
- भारत के डेयरी और कृषि क्षेत्र के कुछ उत्पादों को अपवर्जन सूची में रखा गया है, जो श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।
- इनमें डेयरी, पशु उत्पाद, वनस्पति उत्पाद, चीनी, कृत्रिम शहद, पशु, वनस्पति या सूक्ष्मजीव मूल के वसा एवं तेल, हथियार एवं गोला-बारूद, रत्न एवं आभूषण, तांबा एवं उससे संबंधित वस्तुएँ तथा एल्युमिनियम एवं उससे संबंधित वस्तुएँ शामिल हैं।
FTA से भारत के लिए महत्त्व
- भारत–न्यूज़ीलैंड FTA के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में शुल्क-मुक्त या अधिमान्य बाजार पहुँच सुनिश्चित हुई है।
- इन लाभों से भारत के निर्यात को बढ़ावा मिलने, रोजगार के अवसर सृजित होने तथा ओशिनिया क्षेत्र में भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता सुदृढ़ होने की अपेक्षा है।
- आयुष तथा भारतीय पारंपरिक ज्ञान के क्षेत्रों में विशेष सहयोग पर सहमति बनी है।
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पारस्परिक सम्मान को बढ़ावा देने के लिए न्यूज़ीलैंड के स्वदेशी माओरी समुदायों के साथ संपर्क को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे भारत की सॉफ्ट पावर तथा उसकी सांस्कृतिक विरासत की वैश्विक पहचान को सुदृढ़ करने में सहायता मिलेगी।
- बागवानी क्षेत्र में लाभ: न्यूज़ीलैंड ने भारत में कीवी फल, सेब और शहद के उत्पादकों की उत्पादकता, गुणवत्ता तथा क्षेत्रीय क्षमताओं में सुधार के लिए केंद्रित कार्य योजनाओं पर सहमति व्यक्त की है।
- प्रीमियम सेब उत्पादकों के लिए परियोजनाएँ तथा सतत मधुमक्खी-पालन की पद्धतियाँ उत्पादन और गुणवत्ता मानकों को बेहतर बनाने में सहायता करेंगी।
- इस बाजार पहुँच को टैरिफ दर कोटा (TRQ) प्रणाली के माध्यम से प्रबंधित किया जाएगा, जिसमें न्यूनतम आयात मूल्य और मौसमी आयात का प्रावधान होगा। इससे घरेलू किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उपभोक्ताओं को विकल्प उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
भारत–न्यूज़ीलैंड व्यापार संबंध
- न्यूज़ीलैंड ओशिनिया क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वहाँ लगभग 3,00,000 भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो न्यूज़ीलैंड की जनसंख्या का लगभग 5% हैं। यह भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच एक महत्त्वपूर्ण आर्थिक और सांस्कृतिक सेतु के रूप में कार्य करता है।
- वर्ष 2025-26 में न्यूज़ीलैंड ने भारत को कुल 1.21 अरब अमेरिकी डॉलर की वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात किया तथा भारत से 1.03 अरब अमेरिकी डॉलर का आयात किया। इसके परिणामस्वरूप 18.186 करोड़ अमेरिकी डॉलर का व्यापार अधिशेष और 2.24 अरब अमेरिकी डॉलर का कुल व्यापार हुआ।
- यह इस अवधि में न्यूज़ीलैंड के कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात का 1.8% तथा आयात का 1.5% था।
निष्कर्ष
- भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते ने व्यापक आर्थिक सहयोग के लिए नए अवसरों के द्वार प्रशस्त किए हैं।
- किसानों और MSMEs से लेकर छात्रों तथा कुशल पेशेवरों तक, इस समझौते से होने वाले लाभ व्यापक स्तर पर प्राप्त होने की अपेक्षा है।
- यह समझौता भारत की एक विश्वसनीय और दूरदर्शी वैश्विक साझेदार के रूप में स्थिति को सुदृढ़ करता है तथा वैश्विक रूप से एकीकृत विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाता है।
स्रोत: TH
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