पाठ्यक्रम: जीएस-3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
सन्दर्भ:
- कुछ अत्याधुनिक एआई मॉडलों, जैसे कि एंथ्रोपिक(Anthropic) के फेबल (Fable) तक गैर-अमेरिकी नागरिकों की पहुँच पर अमेरिका द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने संबंधी रिपोर्टों के बाद ‘संप्रभु एआई’ (Sovereign AI) पर चर्चा प्रमुखता से सामने आई। इससे भारत के लिए अपना स्वयं का सरकार-प्रायोजित लार्ज लैंग्वेज मॉडल (Large Language Model-LLM) विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
संप्रभु एआई मॉडल (Sovereign AI Model) क्या है??
- संप्रभु एआई किसी देश की वह क्षमता है जिसके अंतर्गत उसके एआई अवसंरचना, मॉडल, डेटा तथा कम्प्यूट (Compute) संसाधन उसकी संप्रभु अधिकार-सीमा एवं नियंत्रण के अधीन हों।

भारत का संप्रभु एआई मॉडल
- भारत ने वर्ष 2024 में अनुमोदित इंडिया एआई(IndiaAI)पहल के माध्यम से एआई के क्षेत्र में क्षमता-निर्माण का मार्ग पहले ही अपनाया है।
इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- इंडियाएआई (IndiaAI) कम्प्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर : साझा कम्प्यूट अवसंरचना की स्थापना तथा स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों को GPU एवं उच्च-प्रदर्शन कम्प्यूट संसाधनों की उपलब्धता।
- इंडियाएआई इनोवेशन एंड स्टार्टअप्स इकोसिस्टम: एआई स्टार्टअप्स तथा स्वदेशी नवाचारों को समर्थन देना और शासन एवं उद्योगों के लिए एआई अनुप्रयोगों का विकास करना।
- इंडियाएआई डेटासेट्स प्लेटफॉर्म: उच्च गुणवत्ता वाले गैर-व्यक्तिगत (Non-Personal) डेटासेट उपलब्ध कराना तथा एआई अनुप्रयोगों के उत्तरदायी विकास को बढ़ावा देना।
- कौशल विकास: एआई शिक्षा एवं अनुसंधान क्षमताओं में वृद्धि करना तथा भविष्य की प्रौद्योगिकियों के लिए कार्यबल को प्रशिक्षित करना।
- स्वदेशी आधारभूत मॉडल (Indigenous Foundation Models): भारतीय भाषाओं और भारत-विशिष्ट उपयोग-परिदृश्यों के लिए एआई मॉडल विकसित करने हेतु भारतीय संगठनों को प्रोत्साहित करना।
अतः भारत ने अनिवार्य रूप से सरकारी वित्तपोषित संप्रभु LLM का निर्माण किए बिना ही अपनी एआई क्षमताओं को सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य प्रारम्भ कर दिया है।
सरकारी-वित्तपोषित संप्रभु LLM के पक्ष में तर्क
- रणनीतिक एवं तकनीकी स्वायत्तता: विदेशी एआई मॉडलों पर निर्भरता भारत को निर्यात नियंत्रण, लाइसेंसिंग प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक दबावों के प्रति संवेदनशील बना सकती है।
- भाषाई विविधता: भारत की बहुभाषी विविधता ऐसे एआई मॉडलों की मांग करती है जो भारतीय भाषाओं, बोलियों और स्थानीय संदर्भों को ध्यान में रखकर विकसित किए गए हों, जो वैश्विक मॉडलों में पर्याप्त रूप से उपलब्ध न हों।
- डेटा संप्रभुता: संवेदनशील सरकारी एवं नागरिक डेटा को विदेशी संस्थाओं द्वारा पहुँच की चिंता के बिना देश के अधिकार-क्षेत्र के भीतर सुरक्षित रखा जा सकता है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा अनुप्रयोग: स्वदेशी रूप से विकसित एआई मॉडल रक्षा, खुफिया, साइबर सुरक्षा तथा महत्त्वपूर्ण अवसंरचना प्रबंधन से संबंधित विभिन्न कार्यों में उपयोग किए जा सकते हैं।
- नवाचार के दीर्घकालिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण: सार्वजनिक निवेश एआई क्षेत्र में स्वदेशी तकनीकी क्षमता विकसित करने में सहायता कर सकता है, जैसे अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में हुआ है।
सरकारी-वित्तपोषित संप्रभु LLM के विपक्ष में तर्क
- अत्यधिक उच्च वित्तीय लागत: अत्याधुनिक LLM विकसित करने के लिए अवसंरचना, डेटा निर्माण, प्रतिभाशाली मानव संसाधन की भर्ती, निरंतर प्रशिक्षण तथा मॉडल उन्नयन पर भारी वित्तीय निवेश की आवश्यकता होगी। यदि बेहतर वैश्विक विकल्प उपलब्ध हों, तो इन निवेशों से बहुत कम प्रतिफल प्राप्त हो सकता है।
- औद्योगिक नीति की विफलता का जोखिम: सरकारें प्रायः यह पहचानने में असफल रहती हैं कि कौन-सी प्रौद्योगिकी भविष्य में सफल होगी। राज्य-प्रेरित परियोजनाएँ नौकरशाही, अक्षमताओं और संसाधनों के अनुचित आवंटन से प्रभावित हो सकती हैं।
- निजी क्षेत्र का नवाचार अधिक प्रभावी होता है: वैश्विक स्तर पर एआई के अग्रणी संस्थान, जैसे ओपन एआई, एंथ्रोपिक और गूगल डीपमाईंड सरकारी औद्योगिक नीति के बजाय निजी क्षेत्र के नवाचार और उद्यम पूंजी निवेश के कारण विकसित हुए हैं।
- ओपन-सोर्स मॉडलों की उपलब्धता: Llama और Mistral जैसे ओपन-सोर्स एआई मॉडल भारतीय कंपनियों को अत्याधुनिक मॉडल विकसित करने की भारी लागत वहन किए बिना अपने अनुप्रयोग विकसित करने की सुविधा प्रदान करते हैं।
- एआई की उपयोगिता उसके अनुप्रयोगों में निहित है: अधिकांश भारतीय व्यवसायों के लिए वास्तविक लाभ एआई आधारित सेवाओं के विकास में है, न कि सर्वोत्तम आधारभूत मॉडल के स्वामित्व में।
सरकारी-वित्तपोषित संप्रभु LLM का निर्माण क्यों आवश्यक नहीं हो सकता?
- भारत के आईटी क्षेत्र की सफलता से प्राप्त सबक: भारत ने वैश्विक प्रौद्योगिकियों को अपनाकर, मानव संसाधन विकसित कर तथा विश्वभर में सॉफ्टवेयर सेवाएँ निर्यात करके आईटी सेवाओं के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्राप्त किया। आईटी क्षेत्र में अग्रणी बनने के लिए देश को स्वदेशी प्रोसेसर, स्वदेशी ऑपरेटिंग सिस्टम या संप्रभु हार्ड डिस्क की आवश्यकता नहीं पड़ी।
- वैश्विक प्रौद्योगिकियाँ भारत के लिए कभी समस्या नहीं रहीं: भारत ने परंपरागत रूप से वैश्विक प्रौद्योगिकियों को अपनाकर देश के भीतर मूल्य-सृजन क्षमताओं के विकास पर ध्यान केंद्रित किया है।
- सेमीकंडक्टर, ऑपरेटिंग सिस्टम और उन्नत संगणन प्रौद्योगिकियाँ भारत के बाहर विकसित हुईं, फिर भी भारतीय कंपनियाँ इनके आधार पर विश्व-स्तरीय व्यवसाय स्थापित करने में सफल रहीं।
- अत्याधुनिक मॉडल मुख्य बाधा नहीं हैं: एआई के अधिकांश अनुप्रयोगों में लागत-प्रभावशीलता, विश्वसनीयता तथा क्षेत्र-विशिष्ट विशेषज्ञता अधिक महत्त्वपूर्ण होती है। ऐसी परिस्थितियों में पुराने और ओपन-सोर्स मॉडल, महंगे अत्याधुनिक मॉडलों की तुलना में अधिक उपयुक्त सिद्ध हो सकते हैं।
- साझेदारी के माध्यम से रक्षा क्षमताओं का विकास: पूर्ण तकनीकी आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के प्रयास के बजाय भारत को अमेरिका, जापान, यूरोपीय संघ, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे विश्वसनीय साझेदारों के साथ सहयोग कर भरोसेमंद एवं सुदृढ़ प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखलाएँ विकसित करनी चाहिए।
आगे की राह:भारत को क्या करना चाहिए?
- मानव पूंजी पर ध्यान केंद्रित करना: IIT, IISc, अनुसंधान विश्वविद्यालयों और एआई उत्कृष्टता केंद्रों में निवेश बढ़ाया जाए। उत्कृष्ट मानव संसाधन भारत की सबसे बड़ी तुलनात्मक शक्ति है।
- वैश्विक प्रौद्योगिकियों तक आसान पहुँच: एआई सेवाओं, क्लाउड अवसंरचना और संगणन हार्डवेयर तक पहुँच से संबंधित नियामकीय तथा भुगतान संबंधी बाधाओं को कम किया जाए। इससे भारत के लिए एआई अनुप्रयोगों के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा करना संभव होगा।
- वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार: एआई क्षेत्र में वेंचर कैपिटल(Venture Capital) और डीप टेक (Deep-Tech) निवेश को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। नवाचार वहीं फलता-फूलता है जहाँ जोखिम लेने और पूंजी प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध हो।
- एआई-तैयार सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना की स्थापना: आधार, यूपीआई(UPI) और डिजिलॉकर (DigiLocker) की सफलता के बाद भारत एआई-अनुकूल सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना विकसित करने पर विचार कर सकता है।
- विश्वसनीय अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियाँ विकसित करना: एआई हार्डवेयर, सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी श्रृंखला और उन्नत अनुसंधान नेटवर्क तक पहुँच प्राप्त करने हेतु लोकतांत्रिक प्रौद्योगिकी साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाया जाए।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न] संप्रभु एआई मॉडलों के विकास पर केंद्रित रणनीति की सीमाओं पर चर्चा कीजिए तथा एआई इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने के लिए सरकारों द्वारा अपनाए जा सकने वाले वैकल्पिक दृष्टिकोण सुझाइए। (15 अंक) |
स्रोत: BS