पाठ्यक्रम: GS1/भूगोल
संदर्भ
- हाल ही में भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने घोषणा की कि दक्षिण-पश्चिमी मानसून सामान्य आगमन तिथि 1 जून से पहले ही केरल पहुँचने की संभावना है।
भारत में मानसून
- ‘मानसून’ शब्द का तात्पर्य भूमि और समुद्र के भिन्न-भिन्न ताप और शीतन से उत्पन्न मौसमी पवन परिवर्तन से है।
- भारत में मानसूनी वर्षा अर्थव्यवस्था और जलवायु प्रणाली की रीढ़ है।
- भारत दो प्रमुख मानसून प्रणालियों का अनुभव करता है:
- दक्षिण-पश्चिमी मानसून (जून–सितंबर): मुख्य वर्षा ऋतु, जो वार्षिक वर्षा का लगभग 75% प्रदान करती है।
- उत्तर-पूर्वी मानसून (अक्टूबर–दिसंबर): मुख्यतः तमिलनाडु और दक्षिण-पूर्वी भारत के लिए महत्वपूर्ण।
- दक्षिण-पश्चिमी मानसून कृषि, जलाशयों, जलविद्युत उत्पादन और ग्रामीण आजीविका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

दक्षिण-पश्चिमी मानसून का गठन
- भिन्न-भिन्न तापन: भारतीय भूभाग महासागरों की तुलना में तीव्रता से गर्म होता है, जिससे उत्तर-पश्चिम भारत में ग्रीष्मकाल के दौरान निम्न दाब क्षेत्र बनता है।
- आईटीसीजेड (ITCZ) का स्थानांतरण: अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र उत्तर की ओर खिसकता है, जिससे हिंद महासागर से आर्द्रता युक्त पवनें आकर्षित होती हैं।
- भूमध्यरेखीय पवनें: दक्षिण-पूर्व व्यापारिक पवनें भूमध्यरेखा पार करती हैं और कोरिओलिस बल के कारण दक्षिण-पश्चिमी पवनों में परिवर्तित हो जाती हैं।
- जेट स्ट्रीम और तिब्बती पठार की भूमिका: तिब्बती पठार का तापन और उपोष्णकटिबंधीय जेट स्ट्रीम में परिवर्तन मानसून परिसंचरण को सुदृढ़ करते हैं।

दक्षिण-पश्चिमी मानसून की शाखाएँ
- अरब सागर शाखा: यह सबसे पहले पश्चिमी घाट से टकराती है और पश्चिमी तट पर भारी वर्षा करती है। इसके बाद यह मध्य और उत्तरी भारत की ओर बढ़ती है।
- बंगाल की खाड़ी शाखा: यह उत्तर-पूर्वी भारत और इंडो-गंगा के मैदानी क्षेत्रों की ओर बढ़ती है। हिमालय द्वारा पश्चिम की ओर मोड़ दी जाती है तथा उत्तरी भारत में फैलती है।
एल नीनो और भारतीय मानसून पर उसका प्रभाव
- एल नीनो: भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र सतह तापमान के असामान्य ऊष्मीकरण को एल नीनो कहते हैं।
- यह मानसून परिसंचरण को कमजोर करता है और प्रायः भारत में सामान्य से कम वर्षा का कारण बनता है।
- NOAA के अनुसार मई–जुलाई के दौरान एल नीनो विकसित होने की 82% संभावना है।
- IMD ने मौसमी वर्षा को दीर्घकालिक औसत (LPA) के 92% पर अनुमानित किया है, जो सामान्य से कम वर्षा का संकेत है।
- एक प्रबल या ‘सुपर’ एल नीनो कृषि उत्पादकता को कम कर सकता है, सूखा जैसी स्थिति उत्पन्न कर सकता है, भूजल और जलाशयों को प्रभावित कर सकता है तथा खाद्य मुद्रास्फीति एवं ग्रामीण संकट को बढ़ा सकता है।
- इंडो-गंगा मैदानी क्षेत्र दीर्घकालिक शुष्क प्रवृत्तियों के कारण विशेष रूप से संवेदनशील है।
भारतीय मानसून का महत्व
- कृषि महत्व: लगभग 60% भारतीय किसान बुवाई और सिंचाई के लिए वर्षा पर निर्भर हैं।
- आर्थिक महत्व: मानसून GDP वृद्धि, खाद्य उत्पादन, ग्रामीण मांग और मुद्रास्फीति को प्रभावित करता है।
- जल सुरक्षा: यह नदियों, भूजल और जलाशयों को पुनर्भरण करता है।
- पारिस्थितिक महत्व: वन, जैव विविधता और जलवैज्ञानिक संतुलन को समर्थन देता है।
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