संदर्भ
- प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड की आधिकारिक यात्रा की।
यात्रा के प्रमुख परिणाम
- सामरिक साझेदारी में उन्नयन: भारत और नीदरलैंड ने द्विपक्षीय संबंधों को “सामरिक साझेदारी” के स्तर तक उन्नत किया।
- सेमीकंडक्टर सहयोग: टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और एएसएमएल (ASML) के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए।
- एएसएमएल गुजरात के धोलेरा स्थित टाटा के सेमीकंडक्टर निर्माण संयंत्र के लिए उन्नत लिथोग्राफी प्रणालियाँ उपलब्ध कराएगा।
- सांस्कृतिक सहयोग: लीडेन विश्वविद्यालय ने भारत को 11वीं शताब्दी के चोल कालीन ताम्रपत्र लौटाए।
- रक्षा सहयोग: दोनों देशों ने रक्षा सहयोग पर एक आशय पत्र (Letter of Intent) पर हस्ताक्षर किए, जिससे रक्षा औद्योगिक रोडमैप, संयुक्त निर्माण और त्रि-सेवा सैन्य संवाद का मार्ग प्रशस्त होगा।
- शैक्षणिक सहयोग: आइंडहोवन यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और यूनिवर्सिटी ऑफ ट्वेंटे ने भारत के छह प्रमुख तकनीकी संस्थानों (आईआईएससी बेंगलुरु, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी गांधीनगर, आईआईटी गुवाहाटी और आईआईटी मद्रास) के साथ सेमीकंडक्टर और संबंधित प्रौद्योगिकियों में “ब्रेन ब्रिज” हेतु सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
भारत–नीदरलैंड संबंधों का संक्षिप्त विवरण
- राजनयिक संबंध: भारत और नीदरलैंड ने 1947 में राजनयिक संबंध स्थापित किए। 2026 में द्विपक्षीय संबंधों के 79 वर्ष पूरे होंगे।
- आर्थिक सहयोग:
- भारत और नीदरलैंड ने 2025 में संयुक्त व्यापार एवं निवेश समिति (JTIC) को औपचारिक रूप दिया।
- नीदरलैंड भारत में चौथा सबसे बड़ा निवेशक है, जिसने 2000–2025 के बीच 54.94 अरब अमेरिकी डॉलर का एफडीआई प्रवाह किया।
- 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 16.75 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा।
- भारत का नीदरलैंड को निर्यात 2024-25 में 22.76 अरब अमेरिकी डॉलर और 2025-26 में लगभग 12.82 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
- प्रौद्योगिकी सहयोग: भारत और नीदरलैंड सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, ग्रीन हाइड्रोजन एवं नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग करते हैं।
- सांस्कृतिक सहयोग: 2025 में भारत और नीदरलैंड ने गुजरात के लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) के विकास हेतु सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
- प्रवासी भारतीय: नीदरलैंड यूरोप महाद्वीप में भारतीय मूल के लोगों की सबसे बड़ी जनसंख्या निवास करती है, जिसमें लगभग 200,000 सुरिनामी-हिंदुस्तानी समुदाय के सदस्य शामिल हैं।
संबंधों में चिंताएँ
- नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन ने कहा कि नीदरलैंड और कई यूरोपीय संघ देशों को भारत में निम्नलिखित विकासों को लेकर चिंता है:
- प्रेस की स्वतंत्रता।
- अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुस्लिम और छोटे समुदायों के अधिकार।
- लोकतांत्रिक मूल्य एवं विधि का शासन।
- इंसिया हेमानी मामला: अभिरक्षा विवाद के समाधान में लंबे विलंब ने भारत और नीदरलैंड के बीच एक संवेदनशील राजनयिक मुद्दा उत्पन्न किया है।
- इस मामले ने नीदरलैंड में अंतर्राष्ट्रीय बाल अभिरक्षा प्रवर्तन और भारत के साथ कानूनी सहयोग को लेकर चिंताएँ बढ़ाई हैं।
आगे की राह
- भारत और नीदरलैंड को नवस्थापित सामरिक साझेदारी पर आधारित होकर व्यापार, प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा एवं नवाचार में सहयोग को गहरा करना चाहिए।
- निरंतर उच्च-स्तरीय राजनीतिक सहभागिता और संस्थागत संवाद द्विपक्षीय एवं वैश्विक मुद्दों पर अधिक पारस्परिक समझ को सुगम बना सकते हैं।
- शैक्षणिक आदान-प्रदान, सांस्कृतिक सहयोग और जन-से-जन संबंधों का विस्तार दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक सामरिक अभिसरण में योगदान कर सकता है।
स्रोत: TOI
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