भारत एवं स्वीडन के द्विपक्षीय संबंध सामरिक साझेदारी के स्तर पर उन्नत 

पाठ्यक्रम: GS2/ अंतर्राष्ट्रीय संबंध

संदर्भ

  • भारत और स्वीडन ने प्रधानमंत्री मोदी की स्वीडन यात्रा के दौरान अपने द्विपक्षीय संबंधों को सामरिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया।

यात्रा की प्रमुख विशेषताएँ

  • प्रधानमंत्री मोदी को स्वीडन का रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार और कमांडर ग्रैंड क्रॉस प्रदान किया गया, जो किसी सरकार प्रमुख को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है।
    • यह प्रधानमंत्री मोदी का 31वाँ वैश्विक सम्मान है।
  • सामरिक साझेदारी ढाँचा: भारत और स्वीडन ने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, नवाचार, स्थिरता और अनुसंधान सहयोग पर आधारित सामरिक साझेदारी को संस्थागत रूप देने पर सहमति व्यक्त की। यह साझेदारी चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगी:
    • स्थिरता और सुरक्षा हेतु सामरिक संवाद।
    • आगामी पीढ़ी की आर्थिक साझेदारी।
    • उभरती प्रौद्योगिकियाँ और विश्वसनीय कनेक्टिविटी।
    • “शेपिंग टुमॉरो टुगेदर” – लोग, पृथ्वी, स्वास्थ्य और लचीलापन।
  • उन्नत साझेदारी को क्रियान्वित करने हेतु दोनों नेताओं ने भारत-स्वीडन संयुक्त कार्य योजना 2026-2030 को अपनाया, जिसमें राजनीतिक, आर्थिक, तकनीकी, सुरक्षा, जलवायु तथा जन-से-जन सहयोग के क्षेत्रों में रोडमैप प्रस्तुत किया गया।
  • भारत और स्वीडन ने संयुक्त रूप से भारत–स्वीडन प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता कॉरिडोर (SITAC) के विकास का समर्थन किया।
  • दोनों देशों ने नवाचार-आधारित उद्यमिता को प्रोत्साहित करने हेतु भारत–स्वीडन SME और स्टार्ट-अप प्लेटफ़ॉर्म स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की।
  • सांस्कृतिक कूटनीति: उल्फ क्रिस्टरसन और नरेंद्र मोदी ने नोबेल पुरस्कार विजेता रवीन्द्रनाथ टैगोर की विरासत को सम्मानित करने वाले स्मृति-उपहारों का आदान-प्रदान किया।

भारत–स्वीडन संबंधों का संक्षिप्त विवरण

  • राजनयिक संबंध: भारत और स्वीडन ने 1948 में राजनयिक संबंध स्थापित किए।
    • स्वीडन ने 2018 में प्रथम भारत–नॉर्डिक शिखर सम्मेलन आयोजित किया, जिससे भारत की नॉर्डिक क्षेत्र के साथ सहभागिता सुदृढ़ हुई।
  • आर्थिक संबंध:
    • कई स्वीडिश कंपनियाँ भारत में दूरसंचार, ऑटोमोबाइल, स्वच्छ ऊर्जा और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
    • 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 7.75 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा।
    • 2000 से 2024 के बीच भारत में स्वीडन का संचयी एफडीआई प्रवाह लगभग 2.59 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिससे स्वीडन भारत का 22वाँ सबसे बड़ा निवेशक बना।
    • लगभग 280 स्वीडिश कंपनियाँ भारत में कार्यरत हैं, जबकि लगभग 75 भारतीय कंपनियों की स्वीडन में व्यावसायिक उपस्थिति है।
  • सततता सहयोग: भारत और स्वीडन ने 2019 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन में लीडरशिप ग्रुप फॉर इंडस्ट्री ट्रांज़िशन (LeadIT) का शुभारंभ किया।
    • LeadIT कम-कार्बन औद्योगिक संक्रमण और सतत विनिर्माण प्रथाओं को बढ़ावा देता है।
  • भारतीय प्रवासी: स्वीडन में भारतीय प्रवासी लगभग 90,000 है, जिसमें लगभग 66,400 भारतीय नागरिक शामिल हैं। इनमें से कई आईटी, फिनटेक और जीवन विज्ञान क्षेत्रों में उच्च कौशल वाले पेशेवर हैं।

भारत के लिए महत्व

  • यूरोप के साथ भारत की सहभागिता को सुदृढ़ करना: यह साझेदारी उत्तरी यूरोप में भारत की सामरिक पहुँच को बढ़ाती है और यूरोपीय क्षेत्र के साथ संबंधों को सुदृढ़ करती है।
  • प्रौद्योगिकी और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा: स्वीडन के साथ सहयोग भारत की हरित औद्योगिकीकरण, डिजिटल अर्थव्यवस्था विस्तार, उन्नत विनिर्माण और सतत शहरी गतिशीलता की महत्वाकांक्षाओं को समर्थन दे सकता है।
  • आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन बढ़ाना: यह साझेदारी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के विविधीकरण और लचीलेपन में योगदान कर सकती है।
  • बहुपक्षीय सुधारों का समर्थन: दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया ताकि वे अधिक प्रतिनिधिक एवं प्रभावी बन सकें।

द्विपक्षीय संबंधों में चुनौतियाँ

  • सीमित व्यापार क्षमता का उपयोग: मजबूत पूरकताओं के बावजूद द्विपक्षीय व्यापार अपनी पूर्ण क्षमता से कम है।
  • नियामक और बाज़ार बाधाएँ: मानकों, विनियमों और बाज़ार पहुँच में अंतर व्यापार विस्तार को प्रभावित करते हैं।
  • भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताएँ: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान एवं भू-राजनीतिक तनाव आर्थिक सहयोग को प्रभावित कर सकते हैं।

आगे की राह

  • भारत–स्वीडन संबंधों को सामरिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत करना साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, नवाचार एवं सतत विकास पर आधारित द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण प्रगति है।
  • जैसे-जैसे दोनों देश उभरती प्रौद्योगिकियों, हरित संक्रमण, व्यापार, रक्षा और बहुपक्षीय सहभागिता में सहयोग बढ़ाते हैं, यह साझेदारी भारत की नॉर्डिक क्षेत्र एवं यूरोप के साथ सहभागिता का एक प्रमुख स्तंभ बनने की क्षमता रखती है।

स्रोत: TH

 

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