पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- हाल ही में मिशन दृष्टि, जो विश्व का प्रथम OptoSAR इमेजिंग उपग्रह है और भारत में गैलेक्सआई द्वारा विकसित किया गया है, सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया। इसे कैलिफ़ोर्निया से स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट द्वारा 190 किग्रा उपग्रह को 500 किमी की कक्षा में स्थापित कर लॉन्च किया गया।
मिशन दृष्टि के बारे में
- यह एक पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह है जिसे 2021 में स्थापित गैलेक्सआई ने विकसित किया।
- उपग्रह एक विशिष्ट इमेजिंग प्रणाली OptoSAR प्रस्तुत करता है, जो एकीकृत करता है:
- सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) सेंसर
- सात-बैंड बहु-स्पेक्ट्रल इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल (EO) इमेजर
- यह EO और SAR तकनीकों का एक ही उपग्रह प्लेटफ़ॉर्म पर विश्व का प्रथम परिचालन एकीकरण है।
प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ
- OptoSAR तकनीक: EO इमेजिंग और SAR को संयोजित कर दृश्य स्पष्टता प्रदान करता है और प्रतिकूल मौसम व रात में भी निरंतरता सुनिश्चित करता है।
- SAR इमेजिंग: रडार तरंगों का उपयोग कर सभी मौसम स्थितियों में चित्रण करता है। यह बादलों, धुएँ और प्रदूषण को भेद सकता है। यह श्वेत-श्याम रडार चित्र उत्पन्न करता है।
- EO इमेजिंग: दृश्य और अदृश्य स्पेक्ट्रा में चित्र कैप्चर करता है। यह पारंपरिक उपग्रह फोटो जैसी विस्तृत ऑप्टिकल छवियाँ प्रदान करता है, लेकिन बादलों और प्रदूषण से प्रभावित होता है।
- एआई आधारित ऑनबोर्ड प्रोसेसिंग: उपग्रह एनवीडिया का जेटसन ओरिन कंप्यूटिंग प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग कर कक्षा में ही रॉ डेटा को संसाधित करता है।
- लाभ: तीव्र छवि निर्माण, ग्राउंड स्टेशनों पर कम निर्भरता, वास्तविक समय डेटा फ्यूज़न से सटीकता में वृद्धि, और कुशल बैंडविड्थ उपयोग।
- एकीकृत इमेजरी 1.5 मीटर तक का रिज़ॉल्यूशन प्रदान करती है।
- उच्च पुनः आगमन क्षमता: मिशन दृष्टि प्रत्येक चार दिन में एक ही क्षेत्र पर पुनः जाता है, जिससे हालिया परिवर्तनों का पता लगाना, गतिशील घटनाओं की निगरानी और बेहतर समय-आधारित विश्लेषण संभव होता है।
भारत के लिए महत्व
- रणनीतिक क्षमताओं को सुदृढ़ करना: भारत उच्च-रिज़ॉल्यूशन उपग्रह इमेजरी के लिए परंपरागत रूप से विदेशी प्रदाताओं (जैसे मैक्सर टेक्नोलॉजीज़) पर निर्भर रहा है। लेकिन विदेशी प्रदाताओं पर भू-राजनीतिक प्रतिबंध लग सकते हैं।
- मिशन दृष्टि भारत को रणनीतिक डेटा पर स्वायत्त नियंत्रण, स्वतंत्र निगरानी क्षमता, सीमा और समुद्री निगरानी में सुधार प्रदान करता है।
- रक्षा अनुप्रयोग: सीमा निगरानी, सैन्य गतिविधियों का पता लगाना, समुद्री क्षेत्र जागरूकता और आतंकवाद-रोधी अभियानों में सहायक।
- यह भारत के रणनीतिक स्वायत्तता के लक्ष्य के अनुरूप है।
- कृषि लाभ: फसल स्वास्थ्य निगरानी, सटीक कृषि, मिट्टी की नमी विश्लेषण और कीट संक्रमण की पूर्व चेतावनी में सहायक।
- SAR इमेजिंग विशेष रूप से भारत में उपयोगी है क्योंकि उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में लगभग 70% समय बादल रहते हैं और मानसून में ऑप्टिकल उपग्रह विफल हो जाते हैं।
- इससे कृषि नियोजन और खाद्य सुरक्षा में सुधार होगा।
- आपदा प्रबंधन: बाढ़ मानचित्रण, चक्रवात ट्रैकिंग, वनाग्नि आकलन और भूस्खलन निगरानी में सहायक।
- बादल और धुएँ को भेदने की क्षमता इसे प्राकृतिक आपदाओं के दौरान अत्यंत उपयोगी बनाती है।
- यह राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और जलवायु लचीलापन योजनाओं के उद्देश्यों का समर्थन करता है।
- अवसंरचना और शहरी नियोजन: राजमार्ग और रेलवे की निगरानी, अवैध खनन का पता लगाना, शहरी विस्तार का आकलन एवं स्मार्ट सिटी नियोजन में सहायक।
- वृहत्तर प्रभाव: भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का विस्तार, उपग्रह डेटा सेवाओं का निर्यात, डीप-टेक स्टार्टअप्स की वृद्धि, रोजगार सृजन और विदेशी निवेश में वृद्धि।
- भारत का लक्ष्य आने वाले दशक में वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अपनी हिस्सेदारी को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाना है।
भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में संबंधित प्रयास
- अंतरिक्ष क्षेत्र सुधार (2020): सरकार ने 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोल दिया।
- निजी कंपनियों को उपग्रह, प्रक्षेपण यान और अनुप्रयोग बनाने की अनुमति दी गई।
- इसरो की अवसंरचना और विशेषज्ञता तक पहुँच प्रदान की गई तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया।
- भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्द्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe): इसे एकल-खिड़की स्वायत्त एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया, जो अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत कार्य करती है।
- यह निजी अंतरिक्ष गतिविधियों को अधिकृत करती है, इसरो सुविधाओं तक पहुँच प्रदान करती है और परीक्षण व प्रक्षेपण समर्थन उपलब्ध कराती है।
- IN-SPACe ने गैलेक्सआई को परीक्षण अवसंरचना तक पहुँच, नियामक अनुमोदन और तकनीकी सुविधा प्रदान कर समर्थन किया।
- न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL): यह इसरो की वाणिज्यिक शाखा है, जो अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के वाणिज्यिक उपयोग को बढ़ावा देती है।
- इसमें प्रक्षेपण सेवाएँ, उपग्रह सेवाएँ और निजी कंपनियों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण शामिल है।
- भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023: इस नीति ने इसरो, NSIL, IN-SPACe और निजी क्षेत्र की भूमिकाओं को स्पष्ट किया।
- इसके प्रमुख उद्देश्य हैं:
- निजी निवेश को प्रोत्साहित करना।
- वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाना।
- स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देना।
- इसके प्रमुख उद्देश्य हैं:
- नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन (NavIC): भारत की स्वदेशी उपग्रह नेविगेशन प्रणाली।
- यह भारत और आसपास के क्षेत्रों में सटीक स्थिति सेवाएँ प्रदान करती है।
- निजी स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र: भारत में स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस, पिक्सल, बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस, ध्रुव स्पेस, और गैलेक्सआई जैसे अंतरिक्ष स्टार्टअप्स का तीव्र विकास हुआ है।
- ये स्टार्टअप्स प्रक्षेपण यान, उपग्रह इमेजिंग, अंतरिक्ष प्रणोदन और अंतरिक्ष डेटा विश्लेषण में योगदान दे रहे हैं।
- रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी (DSA): इसे सैन्य अंतरिक्ष क्षमताओं को सुदृढ़ करने हेतु स्थापित किया गया।
- यह अंतरिक्ष निगरानी, उपग्रह संचार और अंतरिक्ष-आधारित खुफ़िया पर केंद्रित है।
आगामी चुनौतियाँ
- प्रौद्योगिकीय चुनौतियाँ: उन्नत सेंसरों का सूक्ष्मीकरण, इमेजिंग परिशुद्धता बनाए रखना और बड़े डेटा प्रवाह का प्रबंधन।
- नियामक और सुरक्षा चिंताएँ: डेटा गोपनीयता, रणनीतिक दुरुपयोग और साइबर सुरक्षा खतरे।
- प्रतिस्पर्धा: भारत को मैक्सर (USA), प्लैनेट लैब्स और चीन आधारित वाणिज्यिक उपग्रह कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करनी होगी।
निष्कर्ष
- मिशन दृष्टि भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक परिवर्तनकारी क्षण है। गैलेक्सआई ने प्रदर्शित किया है कि भारतीय निजी स्टार्टअप्स EO और SAR तकनीकों को एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर एकीकृत कर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियाँ विकसित कर सकते हैं।
- यह मिशन भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता, आपदा प्रतिक्रिया क्षमता, कृषि खुफ़िया और वाणिज्यिक अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करता है।
- यह इस नीति को मान्यता देता है कि भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी उद्यमों के लिए खोला है, जबकि महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों पर स्वायत्त नियंत्रण बनाए रखा है।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न] मिशन दृष्टि के तकनीकी महत्व पर चर्चा कीजिए और यह भी विवेचन कीजिए कि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र सुधार किस प्रकार निजी भागीदारी को राष्ट्रीय सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करने में सक्षम बना रहे हैं। |
स्रोत: BS
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