पाठ्यक्रम: GS3/कृषि; पर्यावरण
संदर्भ
- हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री ने सिक्किम राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर कहा कि सिक्किम का जैविक एवं प्राकृतिक कृषि मॉडल पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणा है। यह आयोजन सिक्किम के राज्यत्व के 50 वर्ष पूरे होने पर आयोजित किया गया।
सिक्किम राज्य स्थापना दिवस
- सिक्किम 16 मई 1975 को जनमत संग्रह के बाद भारत का 22वाँ राज्य बना।
- यह चोग्याल के अधीन राजतंत्र से पूर्ण लोकतांत्रिक राज्य में परिवर्तित हुआ।
- अनुच्छेद 371F: सिक्किम के लिए विशेष प्रावधान।
- सिक्किम की सीमाएँ चीन (तिब्बत), भूटान और नेपाल से लगती हैं।
- यह भारत-चीन संबंधों, सीमा अवसंरचना और सुरक्षा नीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
जैविक एवं प्राकृतिक कृषि के बारे में
- जैविक कृषि : यह ऐसी प्रणाली है जिसमें कृत्रिम उर्वरकों, कीटनाशकों और आनुवंशिक रूप से परिवर्तित जीवों (GMOs) का उपयोग नहीं किया जाता। इसमें फसल चक्र, जैव-उर्वरक, कम्पोस्ट और हरी खाद पर निर्भरता होती है।
- इसे राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) के अंतर्गत विनियमित किया जाता है।
- प्राकृतिक कृषि : इसे ‘रसायन-मुक्त, इनपुट-मुक्त कृषि’ के रूप में बढ़ावा दिया जाता है। यह देशी गाय-आधारित इनपुट और न्यूनतम बाहरी संसाधनों पर निर्भर करती है।
- उदाहरण: शून्य बजट प्राकृतिक कृषि (ZBNF)।
- जैविक कृषि बाहरी जैविक इनपुट की अनुमति देती है, जबकि प्राकृतिक कृषि खेत-आधारित संसाधनों पर बल देती है।
केस स्टडी: सिक्किम
- सिक्किम 2016 में भारत का पहला पूर्ण जैविक राज्य बना।
- यह नीति-प्रेरित परिवर्तन का उदाहरण है, जिसने जैविक कृषि को ईको-पर्यटन से जोड़ा।
- सिक्किम भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 1% से भी कम हिस्सा रखते हुए देश की 25% से अधिक पुष्पीय विविधता का घर है।
सरकारी पहल
- राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP): वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत एपीडा द्वारा लागू। यह प्रमाणन मानक और प्रमाणन निकायों की मान्यता प्रदान करता है।
- परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY): राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA) के अंतर्गत शुरू। इसमें क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण (20 हेक्टेयर क्लस्टर) और सहभागी गारंटी प्रणाली (PGS) प्रमाणन शामिल है।
- भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (BPKP): प्राकृतिक कृषि पर केंद्रित, कम लागत वाली खेती और रासायनिक इनपुट पर निर्भरता घटाने को प्रोत्साहित करती है।
- उत्तर-पूर्व क्षेत्र हेतु मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन विकास: मूल्य श्रृंखला विकास और निर्यात-उन्मुख जैविक उत्पादन पर केंद्रित।
- राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA): यह एक छत्र योजना है, जिसमें मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, जैविक इनपुट प्रोत्साहन और जलवायु-संवेदनशील कृषि को एकीकृत किया गया है।
भारत के लिए महत्व
- पर्यावरणीय लाभ: मृदा उर्वरता और सूक्ष्मजीव गतिविधि में सुधार, भूजल प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी, जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा।
- आर्थिक लाभ: कम लागत (विशेषकर प्राकृतिक कृषि में), घरेलू और निर्यात बाज़ार में प्रीमियम मूल्य, किसानों की आय विविधीकरण में वृद्धि।
- स्वास्थ्य एवं पोषण: रसायन अवशेष-मुक्त खाद्य उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और जीवनशैली रोगों की चिंताओं का समाधान।
संबंधित चुनौतियाँ
- उत्पादकता संबंधी चिंताएँ: संक्रमण अवधि में प्रारंभिक उपज में गिरावट; दीर्घकालिक उपज पर सीमित वैज्ञानिक सहमति।
- बाज़ार एवं प्रमाणन मुद्दे: एनपीओपी के अंतर्गत उच्च प्रमाणन लागत और घरेलू बाज़ार से कमजोर जुड़ाव।
- जागरूकता एवं क्षमता: किसान प्रशिक्षण की कमी और सीमित विस्तार सेवाएँ।
- आपूर्ति श्रृंखला बाधाएँ: भंडारण, प्रसंस्करण और निर्यात अवसंरचना की कमी।
आगे की राह
- अनुसंधान और साक्ष्य-आधारित मान्यता को सुदृढ़ करना।
- बाज़ार पहुँच और ब्रांडिंग में सुधार (जैसे ‘इंडिया ऑर्गेनिक’)।
- डिजिटल ट्रेसबिलिटी प्रणालियों को बढ़ावा देना।
- जलवायु नीतियों (NAPCC) और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs 2, 12, 13, 15) के साथ एकीकरण।
- मूल्य श्रृंखलाओं में सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
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