पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
समाचार में
- नीति आयोग ने डीपीआई@2047 फॉर विकसित भारत लॉन्च किया है, जो भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) के आगामी चरण का रोडमैप है। इसका उद्देश्य समावेशी और उत्पादकता-आधारित विकास को बढ़ावा देना है।
डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना
- परिभाषा: डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना उन आधारभूत डिजिटल प्रणालियों को संदर्भित करती है जो सुलभ, सुरक्षित और परस्पर-संगत होती हैं तथा आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं का समर्थन करती हैं।
- भारत में शुरुआत: भारत की डीपीआई यात्रा “जैम त्रयी” — जन धन बैंक खाते, आधार पहचान और मोबाइल कनेक्टिविटी — से शुरू हुई, जिसने नागरिकों को सीधे सरकारी प्रणालियों से जोड़ा।
- इससे कल्याणकारी लाभों का प्रत्यक्ष हस्तांतरण संभव हुआ, मध्यस्थों, विलंब और रिसाव को कम किया गया और भारत के व्यापक डिजिटल परिवर्तन की नींव रखी गई।
डीपीआई का महत्व
- शासन दक्षता: डीपीआई प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, सब्सिडी वितरण और ई-गवर्नेंस प्लेटफ़ॉर्म सक्षम करता है, जिससे भ्रष्टाचार और रिसाव कम होते हैं।
- वित्तीय समावेशन: यूपीआई ने भुगतान प्रणाली को बदल दिया है, जो अब 8 देशों में संचालित है और सीमा-पार लेनदेन को समर्थन देता है।
- आर्थिक विकास: भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था है, जहाँ डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म दैनिक आर्थिक और सामाजिक जीवन में समाहित हैं।
- वैश्विक नेतृत्व: इंडिया स्टैक ग्लोबल और 24 देशों के साथ डीपीआई सहयोग समझौते भारत की भूमिका को विश्वसनीय डिजिटल मार्गों के निर्माण में प्रदर्शित करते हैं।
प्रमुख डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और समाधान
- आधार – बायोमेट्रिक आधारित डिजिटल पहचान प्लेटफ़ॉर्म, जो निवासियों की विशिष्ट पहचान और प्रमाणीकरण को सक्षम बनाता है, ताकि सेवाओं का कुशल वितरण हो सके।
- यूनिफ़ाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (UPI) – वास्तविक समय की डिजिटल भुगतान प्रणाली, जो व्यक्ति-से-व्यक्ति और व्यापारी लेनदेन को त्वरित, परस्पर-संगत एवं सुरक्षित बनाती है।
- यूपीआई अब 8 देशों में सक्रिय है, जिससे सीमा-पार भुगतान, प्रेषण और वित्तीय समावेशन में सुधार हुआ है तथा वैश्विक स्तर पर भारत की फिनटेक प्रभावशीलता मज़बूत हुई है।
- कोविन (CoWIN) – टीकाकरण सेवाओं के पूर्ण प्रबंधन हेतु डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, जिसमें पंजीकरण, समय निर्धारण और प्रमाणन शामिल है।
- एपीआई सेतु – एक प्लेटफ़ॉर्म जो एपीआई के माध्यम से सरकारी डेटा और सेवाओं को सुरक्षित एवं मानकीकृत रूप से साझा करने में सक्षम बनाता है।
- डिजीलॉकर – डिजिटल दस्तावेज़ भंडार, जो नागरिकों को प्रमाणित इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज़ों को सुरक्षित रखने, पहुँचने और साझा करने की सुविधा देता है।
- आरोग्य सेतु – डिजिटल स्वास्थ्य अनुप्रयोग, जो जोखिम आकलन, स्वास्थ्य परामर्श और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच प्रदान करता है।
- सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) – सरकारी संस्थाओं द्वारा वस्तुओं और सेवाओं की पारदर्शी एवं कुशल खरीद के लिए ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म।
- उमंग (UMANG) – एकीकृत मोबाइल और वेब प्लेटफ़ॉर्म, जो विभिन्न सरकारी सेवाओं तक एकल खिड़की से पहुँच प्रदान करता है।
- दीक्षा (DIKSHA) – राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, जो शिक्षकों और विद्यार्थियों को ई-सामग्री, प्रशिक्षण और शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराता है।
- ई-संजीवनी (e-Sanjeevani) – टेलीमेडिसिन प्लेटफ़ॉर्म, जो विशेषकर ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में दूरस्थ डॉक्टर-से-रोगी परामर्श को सक्षम बनाता है।
- ई-हॉस्पिटल – अस्पताल प्रबंधन प्रणाली, जो ऑनलाइन पंजीकरण, अपॉइंटमेंट, निदान और बिलिंग सेवाएँ प्रदान करती है।
- ई-ऑफिस – पेपरलेस शासन हेतु डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, जो सरकारी कार्यालयों में इलेक्ट्रॉनिक फ़ाइल प्रबंधन और निर्णय-निर्माण को सक्षम बनाता है।
- ई-कोर्ट्स – न्यायालय प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण और न्यायिक सेवाओं तक पहुँच सुधारने हेतु मिशन-मोड परियोजना।
- पोषण ट्रैकर – आईसीडीएस के अंतर्गत पोषण सेवाओं की वास्तविक समय निगरानी हेतु मोबाइल आधारित अनुप्रयोग।
- राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग प्लेटफ़ॉर्म (NCD) – प्रमुख गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग, निदान और प्रबंधन हेतु डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म।
- स्किल इंडिया डिजिटल हब (SIDH) – कौशल, प्रशिक्षण और रोजगार-संबंधी सेवाओं को एकीकृत करने वाला डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म।
- पब्लिक फ़ाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) – सरकारी निधियों और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण की पूर्ण निगरानी हेतु प्लेटफ़ॉर्म।
- पीएम गतिशक्ति – अवसंरचना परियोजनाओं की एकीकृत योजना और समन्वित क्रियान्वयन हेतु जीआईएस आधारित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
- वैश्विक साझेदारियाँ: भारत ने 24 देशों के साथ समझौते किए हैं ताकि इंडिया स्टैक और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) पर विशेषज्ञता साझा की जा सके। इसका ध्यान डिजिटल पहचान, भुगतान, डेटा प्रणालियों और सेवा वितरण पर है।
- उद्देश्य निश्चित उत्पादों का निर्यात नहीं, बल्कि डिज़ाइन सिद्धांतों पर सहयोग है।
- इंडिया स्टैक ग्लोबल: यह एक समर्पित प्लेटफ़ॉर्म है जो भारत के डिजिटल उपकरणों और ढाँचों को साझेदार देशों के साथ साझा करता है। इन्हें डिजिटल प्रणालियों के लिए अनुकूलनीय “निर्माण खंड” (building blocks) के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
- जी20 मान्यता: भारत की 2023 जी20 अध्यक्षता के दौरान डीपीआई को एक प्रमुख विकास उपकरण के रूप में मान्यता मिली।
- ज्ञान साझा करने हेतु एक वैश्विक डीपीआई रिपॉज़िटरी बनाई गई, जिसमें भारत ने सर्वाधिक समाधान योगदान किए।
- मॉड्यूलर ओपन-सोर्स आइडेंटिटी प्लेटफ़ॉर्म (MOSIP): यह भारत में विकसित किया गया है और उन देशों के लिए एक विन्यास योग्य एवं ओपन-सोर्स ढाँचा प्रदान करता है जो सार्वभौमिक डिजिटल पहचान प्रणाली बनाना चाहते हैं।
- 25 से अधिक देश इस प्लेटफ़ॉर्म को अपनाने या अपने राष्ट्रीय पहचान कार्यक्रमों में उपयोग करने की दिशा में कार्यरत हैं।
- भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का आगामी चरण यह रोडमैप एकस्टेप फ़ाउंडेशन और डेलॉइट के सहयोग से तैयार किया गया है। इसमें दो चरणों का विवरण है:
- डीपीआई 2.0 (2025–2035): कृषि, एमएसएमई, शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवाओं जैसे क्षेत्रों में डिजिटल अवसंरचना का विस्तार।
- डीपीआई 3.0 (2035–2047): व्यापक समृद्धि पर केंद्रित।
- इसमें एआई, बेहतर डेटा प्रणालियों, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और स्थानीय स्तर पर क्रियान्वयन का उपयोग कर आजीविका, उत्पादकता एवं बाज़ार तक पहुँच सुधारने पर बल दिया गया है।
चुनौतियाँ
- डिजिटल विभाजन: ग्रामीण क्षेत्रों में स्मार्टफोन, इंटरनेट और डिजिटल साक्षरता की असमान पहुँच।
- डेटा गोपनीयता एवं सुरक्षा: निगरानी और व्यक्तिगत डेटा के दुरुपयोग की चिंताएँ।
- परस्पर-संगतता मुद्दे: राज्यों, क्षेत्रों और अंतर्राष्ट्रीय प्रणालियों में एकीकरण की आवश्यकता।
- विश्वास की कमी: नागरिकों और व्यवसायों में डिजिटल विश्वास निर्माण चुनौतीपूर्ण।
- क्षमता सीमाएँ: एआई, ब्लॉकचेन और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकों को विनियमित करने की सीमित क्षमता।
सुझाव
- सशक्त डेटा संरक्षण कानून लागू करना और साइबर सुरक्षा मानकों को बढ़ाना।
- डिजिटल इंडिया के अंतर्गत ब्रॉडबैंड, मोबाइल कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों का विस्तार।
- इंडिया स्टैक ग्लोबल का विस्तार कर भारत को डीपीआई हब के रूप में स्थापित करना।
- एआई, आईओटी, ब्लॉकचेन और क्वांटम कंप्यूटिंग में निवेश।
- डीपीआई को खुला, पारदर्शी और जवाबदेह बनाए रखना।
निष्कर्ष
- भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना एक सुरक्षित, परस्पर-संगत प्रणाली के रूप में विकसित हुई है, जो शासन, सेवाओं और आर्थिक गतिविधियों का समर्थन करती है तथा समावेशी विकास को बढ़ावा देती है।
- यह वैश्विक स्तर पर एक मॉडल के रूप में देखी जाती है। चुनौतियों के बावजूद, यह भारत की विकसित भारत 2047 दृष्टि का केंद्रीय स्तंभ है, जो नवाचार और विनियमन के संतुलन पर आधारित है।
Source :PIB
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