पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान और प्रौद्योगिकी; अंतरिक्ष
संदर्भ
- हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता रिपोर्ट 2025 (ISSAR-2025) को इसरो ने बेंगलुरु में आयोजित द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ऑन स्पेसक्राफ्ट मिशन ऑपरेशन्स (SMOPS-2026) के उद्घाटन सत्र के दौरान जारी किया।
ISSAR-2025 के प्रमुख निष्कर्ष
- बढ़ती अंतरिक्ष भीड़भाड़:
- वैश्विक स्तर पर लगभग 1.6 लाख क्लोज़ अप्रोच अलर्ट, जिनमें से 1.5 लाख से अधिक भारतीय उपग्रहों से संबंधित।
- मेगा-नक्षत्र समूह (स्टारलिंक, कुइपर आदि) की वृद्धि से टकराव का जोखिम और बढ़ने की संभावना।
- टकराव परिहार उपाय (CAMs): भारतीय उपग्रहों के लिए कुल CAMs में 14 मैन्युवर (NISAR मिशन सहित) निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में, 4 मैन्युवर भूस्थिर कक्षा (GEO) में, और चंद्रयान-2 ऑर्बिटर के लिए 2 विशेष समायोजन शामिल।
- जहाँ संभव हो, समर्पित CAMs से बचने हेतु कक्षा मैन्युवर का अनुकूलन किया गया।
- यह अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता (SSA) प्रणालियों पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाता है।
- 2025 में रिकॉर्ड अंतरिक्ष गतिविधि: 328 प्रक्षेपण प्रयास (अब तक का सर्वाधिक), जिनमें 315 सफल रहे।
- 4,198 परिचालन उपग्रह जोड़े गए; कुल 4,651 नए अंतरिक्ष पिंड जोड़े गए।
- यह अंतरिक्ष उपयोग और वाणिज्यीकरण में तीव्र वृद्धि को दर्शाता है।
- वायुमंडलीय पुनः प्रवेश: 2025 में 1,911 वस्तुएँ पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश कर गईं, जिनमें 1,002 अंतरिक्ष यान, 657 मलबा, 108 रॉकेट बॉडी और 144 अज्ञात वस्तुएँ शामिल।
- यह 2024 की तुलना में कम है, जिसका कारण कम डी-ऑर्बिटिंग और निम्न सौर गतिविधि है।
- उपग्रह नक्षत्रों की वृद्धि: बड़े नक्षत्र (जैसे स्टारलिंक, कुइपर) तीव्र गति से विस्तार कर रहे हैं।
- 2025 के अंत तक 9,396 स्टारलिंक उपग्रह कक्षा में सक्रिय रहे।
- सक्रिय उपग्रहों की संख्या अंतरिक्ष मलबे से अधिक हो सकती है, जिससे समन्वय की जटिलता बढ़ेगी।
- सौर गतिविधि का प्रभाव: सौर चक्र 25 के शिखर ने उच्च कक्षीय क्षय दर उत्पन्न की और वर्ष की शुरुआत में पुनः प्रवेश की संख्या बढ़ाई।
अंतरिक्ष मलबा क्या है?
- अंतरिक्ष मलबा उन निष्क्रिय, मानव-निर्मित वस्तुओं को संदर्भित करता है जो अब किसी उपयोगी उद्देश्य की पूर्ति नहीं करते, परंतु पृथ्वी की कक्षा में घूमते रहते हैं।
- इसमें निष्क्रिय उपग्रह, प्रयुक्त रॉकेट चरण, टकराव या विस्फोट से उत्पन्न टुकड़े, तथा सूक्ष्म कण (पेंट फ्लेक्स, धातु के टुकड़े आदि) शामिल हैं।
मुख्य विशेषताएँ
- मुख्यतः निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) और भू-स्थैतिक कक्षा (GEO) में पाए जाते हैं।
- अत्यधिक गति से चलते हैं (≈7–8 किमी/सेकंड)।
- छोटे टुकड़े भी परिचालन उपग्रहों को क्षति पहुँचा सकते हैं।
भारतीय अंतरिक्ष परिदृश्य
- 2025 तक कुल 144 भारतीय अंतरिक्ष यान प्रक्षेपित।
- परिचालन उपग्रह: 22 LEO में; और 31 GEO में।
- सक्रिय गहन अंतरिक्ष मिशन: चंद्रयान-2 ऑर्बिटर; और आदित्य-L1।
- 2025 में श्रीहरिकोटा से 5 प्रक्षेपण; NASA-ISRO (NISAR) सफलतापूर्वक प्रक्षेपित; PSLV-C61 विफल (उपकक्षीय विसंगति); SpaDeX मिशन ने डॉकिंग क्षमता प्रदर्शित की।
भारत और विश्व के लिए निहितार्थ
- बढ़ती अंतरिक्ष यातायात प्रबंधन आवश्यकता: अधिक उपग्रहों से टकराव की संभावना बढ़ती है, और सक्रिय उपग्रह मलबे से अधिक हो सकते हैं।
- महत्वपूर्ण अवसंरचना के लिए खतरा: उपग्रह संचार, नेविगेशन (NavIC), मौसम पूर्वानुमान और रक्षा का समर्थन करते हैं।
- किसी भी टकराव से आवश्यक सेवाएँ बाधित हो सकती हैं।
- केस्लर सिंड्रोम का जोखिम: बढ़ती भीड़भाड़ से अंतरिक्ष यातायात प्रबंधन चुनौतियाँ और केस्लर सिंड्रोम का खतरा उत्पन्न हो सकता है।
- टकरावों की श्रृंखला: जिससे कक्षीय क्षेत्रों का उपयोग असंभव हो सकता है।
भारत की प्रतिक्रिया और तैयारी
- इसरो की SSA पहलें:नेट्रा (NETRA) नेटवर्क निरंतर निगरानी और जोखिम न्यूनीकरण हेतु; IS4OM SSA का नोडल निकाय।
- स्वदेशी रडार और दूरबीन प्रणालियाँ विकासाधीन।
- मलबे-मुक्त अंतरिक्ष मिशन (DFSM): 2030 तक मलबा-मुक्त मिशनों का लक्ष्य।
- कुशल मैन्युवर योजना: नियमित कक्षा सुधारों को समायोजित कर अलग CAMs से बचना; ईंधन एवं मिशन जीवन का अनुकूलन।
- इसरो निजी क्षेत्र के साथ IN-SPACe के माध्यम से सहयोग करता है, ताकि अंतरिक्ष उड़ान सुरक्षा से संबंधित सर्वोत्तम प्रथाओं का साझा किया जा सके।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: वैश्विक एजेंसियों (जैसे अमेरिकी अंतरिक्ष कमान) के साथ डेटा साझा करना।
- भारत अंतर-एजेंसी अंतरिक्ष मलबा समन्वय समिति(IADC) और संयुक्त राष्ट्र की अंतरिक्ष स्थिरता पहलों में भाग लेता है।
- अंतरिक्ष सुरक्षा हेतु अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय।
Previous article
1969 का बैंक राष्ट्रीयकरण
Next article
संक्षिप्त समाचार 18-04-2026