भारतीय रेल: भाप से तीव्र गति तक

पाठ्यक्रम: GS3/अवसंरचना

संदर्भ

  • भारत में रेल तकनीकी प्रगति, राष्ट्र-निर्माण, संपर्क और समावेशी विकास का प्रतीक है, जो हाल के सरकारी आधुनिकीकरण एवं गति-वृद्धि संबंधी पहलों के अनुरूप है।

भारतीय रेल के बारे में

  • भाप युग (19वीं–प्रारंभिक 20वीं शताब्दी): रेल औद्योगिक क्रांति और औपनिवेशिक आर्थिक एकीकरण के प्रतीक के रूप में उभरी।
    • भारत में प्रथम ट्रेन (1853) ने मुंबई को ठाणे से जोड़ा, जिससे बड़े पैमाने पर संपर्क की शुरुआत हुई।
  • भाप से डीज़ल और विद्युत की ओर संक्रमण: स्वतंत्रता के पश्चात ध्यान दक्षता और विस्तार पर केंद्रित हुआ।
    • विद्युतीकरण ने ऊर्जा दक्षता में सुधार किया और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटाई।
    • भारतीय रेल ने धीरे-धीरे भाप इंजन को समाप्त कर आधुनिक ट्रैक्शन प्रणालियों को अपनाया।
    • भारतीय रेल ने ब्रॉड गेज नेटवर्क का 99.6% विद्युतीकरण हासिल किया है, जो ब्रिटेन (39%), रूस (52%) और चीन (82%) से अधिक है।

भारतीय रेल का आधुनिकीकरण: प्रमुख स्तंभ

  • गति वृद्धि: सरकारी पहलों ने ट्रेन की गति बढ़ाई और यात्रा समय घटाया।
    • बड़े पैमाने पर समय-सारणी सुधार और अवसंरचना उन्नयन ने तीव्र संचालन संभव किया।
    • अर्ध-उच्च गति सेवाएँ (जैसे वंदे भारत) एक बड़ा कदम हैं।
  • अवसंरचना परिवर्तन: पटरियों का आधुनिकीकरण, समर्पित माल गलियारे और स्टेशन पुनर्विकास।
    • उन्नत सिग्नलिंग प्रणालियों (जैसे कवच) का परिचय।
  • डिजिटल और तकनीकी एकीकरण: टिकटिंग, संचालन और यात्री सेवाओं के लिए आईसीटी का एकीकरण।
    • वास्तविक समय निगरानी और पूर्वानुमानित रखरखाव प्रणालियाँ।

सामाजिक-आर्थिक महत्व

  • आर्थिक विकास: व्यापार को सुगम बनाता है, लॉजिस्टिक्स लागत घटाता है और औद्योगिक गलियारों को बढ़ावा देता है।
  • सामाजिक एकीकरण: दूरस्थ क्षेत्रों को जोड़ता है, राष्ट्रीय एकता और समावेशी विकास को प्रोत्साहित करता है।
  • शहरीकरण और गतिशीलता: शहरी परिवहन प्रणालियों और ट्रांज़िट-उन्मुख विकास (TOD) का समर्थन करता है।

भारतीय रेल के समक्ष प्रमुख मुद्दे और चिंताएँ

  • क्षमता सीमाएँ और भीड़भाड़: प्रमुख मार्गों (गोल्डन क्वाड्रिलेटरल, माल गलियारे) पर उच्च यातायात घनत्व; यात्री और माल यातायात का मिश्रण दक्षता घटाता है; तथा माँग प्रायः डिज़ाइन क्षमता से अधिक होती है।
  • वित्तीय स्थिरता: यात्री किराए को सब्सिडी देने के लिए माल राजस्व पर भारी निर्भरता; उच्च परिचालन अनुपात निवेश के लिए अधिशेष सीमित करता है; और आधुनिकीकरण (HSR, DFCs) के लिए पूँजी लागत बढ़ रही है।
  • सुरक्षा चिंताएँ: मानव त्रुटि, पुरानी सिग्नलिंग और पटरियों की समस्याओं के कारण दुर्घटनाएँ; रखरखाव का बैकलॉग चिंता का विषय है।
  • अवसंरचना घाटा: पुरानी पटरियाँ, पुल और रोलिंग स्टॉक; क्षमता विस्तार (डबलिंग, विद्युतीकरण) की धीमी गति।
  • तकनीकी और आधुनिकीकरण अंतराल: डिजिटल प्रणालियों और स्वचालन का असमान अपनाना; बढ़ती डिजिटलाइजेशन के साथ साइबर सुरक्षा जोखिम।
  • अन्य परिवहन साधनों से प्रतिस्पर्धा: सड़क और वायु परिवहन बाजार हिस्सेदारी प्राप्त कर रहे हैं; रेल उच्च-मूल्य माल ट्रकिंग को विलंब के कारण खो रही है।
  • भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मुद्दे: भूमि अधिग्रहण बाधाओं के कारण परियोजनाओं में देरी; पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में पर्यावरणीय चिंताएँ।
  • शासन और संस्थागत चुनौतियाँ: केंद्रीकृत निर्णय-प्रक्रिया सुधारों को धीमा करती है; और ज़ोन व विभागों के बीच समन्वय समस्याएँ।
  • मानव संसाधन और कौशल चुनौतियाँ: बड़ी कार्यबल में आधुनिक तकनीकों के प्रति कौशल अंतराल।

उच्च गति रेल और भविष्य की गतिशीलता की ओर प्रमुख सुधार और पहल

  • उच्च गति रेल (HSR): बुलेट ट्रेन परियोजनाएँ (जैसे मुंबई–अहमदाबाद कॉरिडोर) भारत की उच्च गति रेल में प्रविष्टि को दर्शाती हैं।
    • वैश्विक अनुभव दर्शाता है कि HSR क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक उत्पादकता को बढ़ाता है।
  • केंद्रीय बजट 2026–27: ₹2,78,000 करोड़ का पूँजीगत व्यय आवंटित किया गया।
  • अर्ध-उच्च गति और स्वदेशी नवाचार: वंदे भारत ट्रेनें स्वदेशी क्षमता और यात्रा समय में कमी को प्रदर्शित करती हैं।
    • रोलिंग स्टॉक और सिग्नलिंग प्रणालियों में ‘मेक इन इंडिया’ पर ध्यान।
  • सततता और हरित रेल: विद्युतीकरण का लक्ष्य शून्य-कार्बन उत्सर्जन है।
    • नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा-दक्ष प्रणालियों की ओर बदलाव।

डिजिटल अवसंरचना और यात्री सुरक्षा के लिए

  • इंटरनेट प्रोटोकॉल मल्टी-प्रोटोकॉल लेबल स्विचिंग (IP MPLS) तकनीक: उच्च क्षमता और मिशन-क्रिटिकल रेलवे अनुप्रयोगों का समर्थन करती है।
    • यह केंद्रीकृत वीडियो निगरानी सक्षम करती है और मुख्य परिचालन प्रणालियों का समर्थन करती है।
  • स्वदेशी कवच स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली: ट्रेन टकराव रोकने और परिचालन सुरक्षा बढ़ाने का लक्ष्य।
    • इसे 3,100 मार्ग किलोमीटर पर लागू किया गया है, और अतिरिक्त 24,400 किलोमीटर पर कार्यान्वयन जारी है।
  • एआई-सक्षम वीडियो निगरानी: 1,874 रेलवे स्टेशनों पर विस्तारित, एआई-आधारित विश्लेषण और चेहरे की पहचान तकनीक का उपयोग कर यात्री सुरक्षा और निगरानी को सुदृढ़ किया गया।
  • वास्तविक समय यात्री सूचना: एकीकृत यात्री सूचना प्रणाली (IPIS), राष्ट्रीय ट्रेन पूछताछ प्रणाली (NTES) से जुड़ी हुई है, जो समय पर घोषणाएँ और बेहतर यात्री संचार सुनिश्चित करती है।
  • टनल संचार प्रणालियाँ: प्रमुख परियोजनाओं में (जैसे उधमपुर–श्रीनगर–बारामुला रेल लिंक) लागू की गईं, ताकि सुरंग खंडों में निर्बाध संपर्क और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित हो सके।

आगे की राह

  • समर्पित माल गलियारों और उच्च गति गलियारों का विस्तार।
  • शुल्क तर्कसंगतीकरण और PPP के माध्यम से वित्तीय व्यवहार्यता में सुधार।
  • कवच जैसी सुरक्षा प्रणालियों को सुदृढ़ करना।
  • बहु-मोडल एकीकरण (पीएम गति शक्ति) को बढ़ावा देना।
  • एआई, डिजिटलाइजेशन और कौशल विकास में निवेश।

स्रोत: PIB

 

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