समुद्री प्रदूषण से निपटने हेतु केंद्र द्वारा प्रथम बार टार बॉल्स प्रबंधन नियमों का प्रस्ताव 

पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण

संदर्भ

  • केंद्र सरकार ने प्रथम बार तटीय और समुद्री प्रदूषण का कारण बनने वाले टार बॉल्स के प्रबंधन हेतु विशेष नियम प्रस्तावित किए हैं।

टार बॉल्स के बारे में

  • टार बॉल्स तेल के ऐसे टुकड़े या गुच्छे होते हैं जो मौसम के प्रभाव से अर्ध-ठोस या ठोस रूप में बदल जाते हैं। ये चिपचिपे होते हैं और दूषित सतहों से हटाना कठिन होता है।
    • इनका निर्माण पानी में उपस्थित मलबे और सघन हाइड्रोकार्बन के संयोजन से होता है।
    • ये समुद्र में तैरते हैं और तटों पर आ जाते हैं। इनका आकार मटर जितना छोटा से लेकर बास्केटबॉल जितना बड़ा हो सकता है।
  • इनमें भारी धातुएँ, सूक्ष्म तत्व और स्थायी कार्बनिक प्रदूषक जैसे विषैले तत्व पाए जाते हैं, जो पर्यावरण एवं स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण हैं।
  • इनका जमाव समुद्री वनस्पति और जीव-जंतुओं को प्रभावित करता है तथा पर्यटन उद्योग को भी हानि पहुँचती है।

टार बॉल्स प्रबंधन नियम 2026

  • नियमों में टार बॉल्स के उत्पादन, संग्रहण, भंडारण, परिवहन, उपचार और निपटान की जिम्मेदारियाँ तय की गई हैं। इन्हें सीमेंट उत्पादन में ईंधन के रूप में पुनः प्रयोज्य बनाने का प्रावधान भी है।
  • नियम उन व्यक्तियों या कंपनियों पर लागू होंगे जो जहाजों, पोतों और तेल (कच्चा या ईंधन) के उत्खनन, अन्वेषण, परिवहन एवं प्रबंधन से जुड़े प्रतिष्ठानों का संचालन करते हैं।
    • इन सभी को मिलाकर ‘तेल प्रतिष्ठान’ की परिभाषा दी गई है।
  • प्राधिकरणों की भूमिका: पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, पोर्ट्स मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय को पर्यावरणीय दृष्टि से सुरक्षित प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई है।
    • राज्य सरकारों को तटीय क्षेत्रों में टार बॉल्स से उत्पन्न प्रदूषण को राज्य आपदा घोषित करना होगा और आपदा प्रबंधन अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई करनी होगी।
      • वर्तमान में राष्ट्रीय तेल रिसाव आपदा आकस्मिकता योजना (NOS-DCP) तेल रिसाव से निपटने के लिए ढाँचा और जिम्मेदारियाँ तय करती है।
    • प्रस्तावित नियमों में भारतीय तटरक्षक बल (ICG) द्वारा राज्य स्तरीय संकट प्रबंधन समूहों के गठन का उल्लेख है।
  • ICG की भूमिका: ICG को NOSDCP लागू करने और तेल रिसाव व टार बॉल्स के प्रभावी प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई है।
  • ICG भारतीय विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र में तेल रिसाव की नियमित हवाई और सतही निगरानी करेगा।
  • संबंधित हितधारकों को समय पर सूचना देकर आवश्यक तैयारी और प्रतिक्रिया सुनिश्चित करेगा।
  • दंड प्रावधान: यदि तेल प्रतिष्ठान के स्वामी पर्यावरणीय दृष्टि से सुरक्षित प्रबंधन में विफल रहते हैं और तेल रिसाव होता है, तो उन्हें ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ के अनुसार पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति देनी होगी।
  • यदि परिवहनकर्ता या उपचार सुविधा संचालक टार बॉल्स का उचित प्रबंधन नहीं करते, तो उन पर भी क्षतिपूर्ति लागू होगी।

Source: IE

 

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