पाठ्यक्रम: GS3/ पर्यावरण
सुंदरवन अपनी पुनर्प्राप्ति क्षमता खो रहा है
संदर्भ
- हाल ही में एक अध्ययन से पता चला है कि सुंदरवन का लगभग 10–15 प्रतिशत हिस्सा पर्यावरणीय दबाव के कारण “गंभीर मंदन” (Critical Slowing Down) की प्रक्रिया से गुजर रहा है।
सुंदरवन
- सुंदरवन यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और पारिस्थितिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- यह विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन है, जो गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना नदियों द्वारा निर्मित डेल्टा में बंगाल की खाड़ी पर फैला हुआ है।
- इसका 40% भाग भारत में और 60% भाग बांग्लादेश में स्थित है।
- इस क्षेत्र से होकर प्रवाहित होने वाली प्रमुख नदियाँ हैं: मुरिगंगा, रायमंगल, हरिनभंगा, सप्तमुखी, ठाकुरान और मटला।
प्रमुख निष्कर्ष
- जलवायु: बढ़ते तापमान से प्रजातियों की विविधता घट रही है और पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता कमजोर हो रही है।
- स्वच्छ जल का प्रवाह और वर्षा महत्वपूर्ण हैं क्योंकि स्वच्छ जल की कमी से लवणता बढ़ती है।
- वर्षा लवणता को कम कर विकास की स्थिति सुधारती है, किंतु अनियमित वर्षा और चरम मौसम घटनाएँ इस संतुलन को बिगाड़ रही हैं।
- पारिस्थितिकी: वन में तेज़ी से बढ़ने वाली प्रजातियाँ जैसे एविसेनिया ऑफिसिनैलिस और एक्सकोकेरिया अगालोचा पाई जाती हैं।
- धीमी गति से बढ़ने वाली प्रजातियाँ जैसे हेरिटिएरा फोम्स, ब्रुगुइरा सेक्सैंगुलर और ज़ाइलोकार्पस मेकोंगेंसिस भी विद्यमान हैं।
- छत्रक (canopy) की ऊँचाई और पत्तियों के गुणों में गिरावट से संरचनात्मक जटिलता कम हो रही है।
- वन अधिक समान (uniform) होते जा रहे हैं, जिससे जैव विविधता घट रही है।
- कुछ हिस्से कार्बन अवशोषक (Carbon Sink) से कार्बन उत्सर्जक (Carbon Source) में बदल रहे हैं।
- चक्रवात का प्रभाव: बंगाल की खाड़ी के प्रमुख चक्रवात जैसे सिद्र, रश्मि और आयला ने वन की पुनर्प्राप्ति क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
- बड़े क्षेत्रों की स्थिति उच्च पुनर्प्राप्ति क्षमता से मध्यम और कमजोर श्रेणी में बदल गई है।
- प्रभावित क्षेत्र: सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र केंद्रीय और दक्षिण-पूर्वी सुंदरवन हैं (समुद्र की ओर और चक्रवात-प्रवण क्षेत्र)।
- भारत में पश्चिमी सुंदरवन की पुनर्प्राप्ति क्षमता बांग्लादेश की तुलना में कम है, विशेषकर उत्तरी सीमाओं के निकट।
आगे की राह
- सुंदरवन जैव विविधता, तटीय सुरक्षा और कार्बन भंडारण (वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- घटती पुनर्प्राप्ति क्षमता पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता, आजीविका और जलवायु नियमन कार्यों के लिए खतरा है।
- परिपक्व वृक्षों की रक्षा करना पुनर्प्राप्ति क्षमता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
- गश्त को सुदृढ़ करने से अवैध कटाई और वन क्षरण को कम किया जा सकता है।
- स्थानीय समुदायों की भागीदारी जागरूकता और संरक्षण प्रयासों को बढ़ा सकती है।
- नीतियों में जलवायु प्रभावों (पारिस्थितिकी तंत्र पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव) को समाहित करना दीर्घकालिक संरक्षण के लिए आवश्यक है।
Source: TH
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