भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था; विज्ञान और प्रौद्योगिकी

संदर्भ 

  • भारत एक प्रमुख डिजिटल प्रणाली उपयोगकर्ता से जनसंख्या-स्तरीय डिजिटल अवसंरचना का निर्माता बन रहा है, जिसकी विशेषता इसके पैमाने, खुलेपन और एकीकरण में निहित है।

डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI)

  • यह उन आधारभूत डिजिटल प्रणालियों को संदर्भित करती है जो सुलभ, सुरक्षित और परस्पर-संगत (interoperable) होती हैं तथा आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं का समर्थन करती हैं।
  • भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पहचान, भुगतान और डेटा विनिमय को परस्पर-संगत सार्वजनिक माध्यमों के जरिए जोड़कर कल्याणकारी वितरण, आर्थिक गतिविधि एवं राज्य क्षमता को सुदृढ़ करती है।
  • इसका मॉडल दर्शाता है कि डिजिटल प्रणालियों को सार्वजनिक वस्तुओं के रूप में डिज़ाइन किया जा सकता है, जो समावेशन और दक्षता दोनों को बढ़ावा देता है, तथा यह 21वीं सदी में डिजिटल अवसंरचना के निर्माण एवं शासन पर वैश्विक विमर्श को प्रभावित कर रहा है।

भारत की DPI की नींव

  • भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पहचान, बैंकिंग और कनेक्टिविटी के सुनियोजित एकीकरण से विकसित हुई है, जिसे JAM त्रयी कहा जाता है: जन धन बैंक खाते, आधार और मोबाइल फोन प्रसार।
  • JAM त्रयी ने भारत की DPI की नींव रखी।
  • आधार ने बायोमेट्रिक डिजिटल पहचान प्रदान की, जिसमें 2024–25 तक 144 करोड़ से अधिक संख्या जारी की गईं और 2,707 करोड़ प्रमाणीकरण किए गए, जिससे सुरक्षित, पोर्टेबल एवं त्वरित सत्यापन संभव हुआ।
  • जन धन योजना ने वित्तीय समावेशन का विस्तार किया, बैंक खातों की संख्या 2015 में 14.72 करोड़ से बढ़कर मार्च 2026 तक 57.71 करोड़ हो गई, जमा राशि ₹2.94 लाख करोड़ तक पहुँची और लगभग 40 करोड़ रूपे कार्ड जारी किए गए।
  • व्यापक मोबाइल कनेक्टिविटी (85.5% परिवारों में स्मार्टफोन और 99.9% जिलों में 5G कवरेज) ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित की।

विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति

  • डिजिटल आर्थिक अवसंरचना: UPI ने जनवरी 2026 में 21.7 अरब वास्तविक समय लेन-देन को सुगम बनाया और भारत के खुदरा भुगतान का 81% संभाला।
    • PFMS ने ₹49.09 लाख करोड़ की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से पारदर्शी कल्याणकारी भुगतान सुनिश्चित किए।
    • ONDC ने 630+ शहरों में 1.16 लाख से अधिक विक्रेताओं को जोड़कर ई-कॉमर्स का लोकतंत्रीकरण किया।
    • सरकारी ई-मार्केटप्लेस  ने ₹16.41 लाख करोड़ मूल्य के 3.27 करोड़ आदेश संसाधित किए, जिनमें सूक्ष्म और लघु उद्यमों की मजबूत भागीदारी रही।
  • नागरिक सेवा वितरण प्लेटफ़ॉर्म:  डिजिटल लॉकर– 67.63 करोड़ उपयोगकर्ताओं और 950 करोड़ से अधिक दस्तावेज़ों के साथ सुरक्षित डिजिटल दस्तावेज़ वॉलेट।
    • UMANG – 2,400+ सरकारी सेवाओं वाला एकीकृत मोबाइल ऐप, 10.25 करोड़ उपयोगकर्ताओं और 723.36 करोड़ लेन-देन के साथ।
    • e-Courts – डिजिटल फाइलिंग, ऑनलाइन भुगतान, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और AI-सक्षम केस प्रबंधन के माध्यम से न्यायिक प्रक्रियाओं का आधुनिकीकरण।
  • स्वास्थ्य एवं पोषण पारिस्थितिकी तंत्र:
    • कोविन– 220 करोड़ कोविड-19 टीकों का वास्तविक समय प्रबंधन।
    • ई-संजीवनी– 2.3 लाख प्रदाताओं के माध्यम से 45.42 करोड़ रोगियों को टेलीमेडिसिन।
    • ई-हॉस्पिटल और ORS – अस्पताल वर्कफ़्लो, डायग्नोस्टिक्स और ब्लड बैंक प्रबंधन का डिजिटलीकरण।
    • आरोग्य सेतु – राष्ट्रीय स्वास्थ्य ऐप के रूप में विकसित।
    • राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग प्लेटफ़ॉर्म – 74.97 करोड़ लाभार्थियों का ट्रैकिंग।
    • पोषण ट्रैकर – 14.03 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों में 8.9 करोड़ बच्चों के पोषण की निगरानी।
  • शिक्षा और कौशल विकास:
    • दीक्षा– 2.11 करोड़ उपयोगकर्ताओं को 566 करोड़ शिक्षण सत्र, 12.69 करोड़ प्रमाणपत्र जारी।
    • स्किल इंडिया डिजिटल हब – प्रशिक्षण, प्रमाणन, नौकरी खोज और सरकारी पोर्टलों का एकीकरण, जिससे शिक्षार्थियों को नियोक्ताओं से जोड़ना और कौशल को उद्योग की माँग के अनुरूप बनाना।
  • शासन क्षमता एवं समन्वय हेतु डिजिटल प्रणालियाँ:
    • ई-ऑफिस – कागज़ रहित प्रशासन और सुव्यवस्थित निर्णय-निर्माण।
    • API सेतु – 8,036 APIs के साथ 10,530 संगठनों में सुरक्षित, मानकीकृत डेटा साझा करना।
    • पीएम गतिशक्ति – ₹16.10 लाख करोड़ मूल्य की 352 परियोजनाओं का मूल्यांकन करने वाला GIS-आधारित प्लेटफ़ॉर्म।

भारत की DPI कूटनीति

  • भारत का DPI दृष्टिकोण वैश्विक स्तर पर वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से प्रेरित है—प्रौद्योगिकी को समावेशी विकास हेतु सार्वजनिक वस्तु मानते हुए।
  • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत ने 24 देशों के साथ डिजिटल पहचान, भुगतान, डेटा विनिमय और सेवा वितरण पर विशेषज्ञता साझा करने के समझौते किए हैं।
  • इंडिया स्टैक ग्लोबल साझेदार देशों को तकनीकी संसाधन प्रदान करता है, जबकि Global DPI रिपॉजिटरी (भारत की 2023 G20 अध्यक्षता के दौरान लॉन्च) अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाएँ साझा करता है।
  • भारत ने CoWIN को ओपन-सोर्स सॉफ़्टवेयर के रूप में उपलब्ध कराया और MOSIP विकसित किया, जो संप्रभु डिजिटल पहचान हेतु ओपन-सोर्स ढाँचा है और 25 से अधिक देशों द्वारा अपनाया गया है।

स्रोत :PIB

 

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