पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग करके बाज़ार हेरफेर करने वालों और साइबर धोखाधड़ी करने वालों पर निगरानी और प्रवर्तन को सुदृढ़ करेगा।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI)
- यह भारत में प्रतिभूतियों और पूंजी बाज़ार का नियामक प्राधिकरण है।
- इसकी स्थापना 1988 में हुई थी और 1992 के सेबी अधिनियम के माध्यम से इसे वैधानिक शक्तियाँ प्रदान की गईं।
- यह वित्त मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत आता है।
- उद्देश्य:
- प्रतिभूतियों में निवेशकों के हितों की रक्षा करना।
- प्रतिभूति बाज़ार के विकास को प्रोत्साहित करना।
- भारत में प्रतिभूति बाज़ार का विनियमन करना।
- संरचना:
- एक अध्यक्ष (केंद्रीय सरकार द्वारा नियुक्त)।
- वित्त मंत्रालय से दो सदस्य।
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से एक सदस्य।
- पाँच अन्य सदस्य (जिनमें कम से कम तीन पूर्णकालिक सदस्य हों)।
सेबी की शक्तियाँ
- अर्ध-न्यायिक शक्तियाँ: धोखाधड़ी और अनैतिक प्रथाओं के मामलों में सेबी निर्णय दे सकता है।
- इससे बाज़ार में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित होती है।
- अर्ध-कार्यकारी शक्तियाँ: सेबी खातों की पुस्तकों और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों की जाँच कर सकता है। उल्लंघन पाए जाने पर नियम लागू कर सकता है, निर्णय दे सकता है और कानूनी कार्रवाई कर सकता है।
- अर्ध-विधायी शक्तियाँ: निवेशकों के हितों की रक्षा हेतु नियम और विनियम बनाने का अधिकार।
- इसमें सूचीबद्धता दायित्व, इनसाइडर ट्रेडिंग नियम और आवश्यक प्रकटीकरण शामिल हैं।
सेबी के समक्ष चुनौतियाँ
- बाज़ार की बढ़ती जटिलता: डेरिवेटिव्स, एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग, उच्च-आवृत्ति ट्रेडिंग (HFT) और जटिल वित्तीय उपकरणों का विकास।
- इनसाइडर ट्रेडिंग और बाज़ार हेरफेर: एन्क्रिप्टेड संचार और ऑफशोर खातों के माध्यम से इनसाइडर ट्रेडिंग का पता लगाना कठिन।
- डिजिटल एवं उभरती परिसंपत्तियों का विनियमन: क्रिप्टो-परिसंपत्तियों, फिनटेक प्लेटफ़ॉर्म और डिजिटल निवेश परामर्श सेवाओं में नियामक अधिकार क्षेत्र अस्पष्ट।
- अत्यधिक बोझिल प्रवर्तन तंत्र: लंबित जाँच और निर्णय मामलों की बड़ी संख्या।
- अपीलों के कारण कानूनी कार्यवाही में विलंब।
- विनियमन और बाज़ार विकास का संतुलन: अत्यधिक विनियमन नवाचार और निवेश को हतोत्साहित कर सकता है, जबकि अपर्याप्त विनियमन निवेशकों को धोखाधड़ी एवं प्रणालीगत जोखिमों के प्रति असुरक्षित बना सकता है।
- प्रौद्योगिकी एवं साइबर सुरक्षा जोखिम: स्टॉक एक्सचेंजों और मध्यस्थों पर साइबर हमलों का खतरा। निगरानी प्रणालियों का निरंतर उन्नयन आवश्यक।
सेबी द्वारा उठाए गए कदम
- बाज़ार निगरानी को सुदृढ़ करना: एकीकृत बाज़ार निगरानी प्रणाली (IMSS) की शुरुआत।
- AI और डेटा विश्लेषण का उपयोग कर इनसाइडर ट्रेडिंग और मूल्य हेरफेर का पता लगाना।
- एल्गोरिथमिक और उच्च-आवृत्ति ट्रेडिंग (HFT) के लिए कठोर मानदंड।
- कठोर दंड एवं निपटान तंत्र।
- सेबी चेक(SEBI Check) का विकास: यह UPI इंटरफ़ेस में एक उपकरण है जो निवेशकों को भुगतान से पहले पंजीकृत मध्यस्थों की पहचान करने में सहायता करता है।
- इससे धोखाधड़ी करने वाले दलालों और व्यापारियों पर अंकुश लगेगा।
- कॉरपोरेट प्रशासन सुधार: उदय कोटक समिति (2017) की सिफारिशों का कार्यान्वयन। इसमें बोर्ड संरचना, स्वतंत्रता, संबंधित पक्ष लेनदेन और ऑडिटिंग सुधार शामिल हैं।
- बाज़ार मध्यस्थों का विनियमन: दलालों, म्यूचुअल फंडों, क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के लिए कठोर पंजीकरण और अनुपालन आवश्यकताएँ।
- निवेशक संरक्षण उपाय: निवेशक संरक्षण एवं शिक्षा कोष (IPEF) की स्थापना।
- SCORES (SEBI शिकायत निवारण प्रणाली) के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत निवारण।
- साइबर सुरक्षा एवं प्रौद्योगिकी ढाँचा: स्टॉक एक्सचेंजों और मध्यस्थों के लिए साइबर सुरक्षा दिशानिर्देश।
- अनिवार्य प्रणाली ऑडिट और व्यवसाय निरंतरता योजनाएँ (BCP)।
प्रतिभूति बाज़ार संहिता विधेयक 2025 (लोकसभा में)
- केंद्रीय वित्त मंत्री ने लोकसभा में प्रतिभूति बाज़ार संहिता विधेयक 2025 प्रस्तुत किया।
- यह विधेयक निम्नलिखित अधिनियमों को एकीकृत करने का प्रस्ताव करता है:
- प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1956
- भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) अधिनियम, 1992
- डिपॉज़िटरी अधिनियम, 1996
- इसका उद्देश्य सिद्धांत-आधारित विधायी ढाँचा तैयार करना है ताकि अनुपालन भार कम हो, नियामक शासन सुधरे और प्रौद्योगिकी-प्रेरित प्रतिभूति बाज़ारों की गतिशीलता बढ़े।
- विधेयक का लक्ष्य निवेशक संरक्षण को सुदृढ़ करना और देश के वित्तीय बाज़ारों में व्यापार सुगमता को बढ़ाना है।
- कानूनों के एकीकरण और दंडों के तार्किकरण के माध्यम से यह भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धी वित्तीय बाज़ार बनाने के उद्देश्य का समर्थन करता है।
Source: TH
Previous article
संक्षिप्त समाचार 28-02-2026