पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था; विज्ञान और प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- हाल ही में भारत ने औपचारिक रूप से अमेरिका-नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका गठबंधन में प्रवेश किया है। यह अर्धचालक (Semiconductors), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और महत्त्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं की भू-राजनीति में एक महत्वपूर्ण क्षण को दर्शाता है।
‘पैक्स सिलिका’ के बारे में
- पैक्स सिलिका (दिसंबर 2025 में प्रारंभ) एक गठबंधन है जिसमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इज़राइल, जापान, क़तर, कोरिया गणराज्य, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम और अब भारत शामिल हैं।
- मुख्य उद्देश्य: अर्धचालक आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करना, एआई नवाचार मानकों का समन्वय करना, महत्त्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण नेटवर्क को सुदृढ़ करना, असंरेखित या विरोधी राज्यों पर निर्भरता कम करना, और एआई-आधारित टिकाऊ आर्थिक व्यवस्था का निर्माण करना।
| क्या आप जानते हैं? – ‘पैक्स सिलिका’ शब्द लैटिन भाषा से लिया गया है—‘Pax’ (शांति) और ‘Silica’ (अर्धचालकों का प्रमुख यौगिक)। – यह सुदृढ़, पारदर्शी और सहयोगी आपूर्ति श्रृंखलाओं के माध्यम से तकनीकी शांति एवं समृद्धि की खोज का प्रतीक है। |
भारत के लिए पैक्स सिलिका का सामरिक महत्व
- आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा: सदस्यता से भारत को ऑस्ट्रेलिया जैसे साझेदारों से लिथियम और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों तक विविध पहुँच मिलती है, जिससे चीन के प्रसंस्करण एवं निर्यात में प्रभुत्व का संतुलन होता है।
- निवेश और विनिर्माण में बढ़ोतरी: भारत को अर्धचालक निर्माण, एआई अवसंरचना और डेटा केंद्रों में अरबों डॉलर के संयुक्त निवेश के अवसर मिलते हैं, जिससे इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन को गति मिलती है।
- भू-राजनीतिक संरेखण: पैक्स सिलिका भारत-अमेरिका संबंधों को व्यापक वैश्विक सामरिक साझेदारी के अंतर्गत सुदृढ़ करता है और भारत को तकनीकी मानक निर्धारण में विश्वसनीय लोकतंत्रों के बीच स्थापित करता है।
- गठबंधन-आधारित औद्योगिक नीति: यह आपूर्ति व्यवधानों और राजनीतिक दबावों से बचाव करता है, जिससे रक्षा, ऊर्जा संक्रमण एवं अग्रणी प्रौद्योगिकियों में भारत की सामरिक स्वायत्तता बढ़ती है।
भारत के पैक्स सिलिका में शामिल होने को लेकर चिंताएँ
- सामरिक स्वायत्तता का जोखिम: अमेरिका की तकनीकी नीति के साथ निकट संरेखण भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की लचीलापन को सीमित कर सकता है।
- चीन के साथ संबंधों पर दबाव: इलेक्ट्रॉनिक घटकों और महत्त्वपूर्ण खनिजों में चीन के प्रभुत्व को देखते हुए, अमेरिका-नेतृत्व वाले तकनीकी गठबंधन में गहरी भागीदारी व्यापार या आपूर्ति व्यवधान को उत्पन्न कर सकती है।
- निर्यात नियंत्रण का दबाव: भारत पर अमेरिका के अर्धचालक और एआई निर्यात नियंत्रणों के अनुरूप होने की अपेक्षा हो सकती है, जिससे अन्य साझेदारों के साथ व्यापार प्रभावित हो सकता है।
- महत्त्वपूर्ण खनिजों पर निर्भरता: भारत अभी भी दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और लिथियम के आयात पर अत्यधिक निर्भर है, जो अर्धचालक महत्वाकांक्षाओं को सीमित कर सकता है।
- एआई शासन संबंधी प्रश्न: ‘विश्वसनीय एआई’ मानकों को घरेलू डेटा और नियामक ढाँचों के साथ सामंजस्य स्थापित करना नीतिगत तनाव उत्पन्न कर सकता है।
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