पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था
समाचार में
- विश्व आर्थिक मंच (WEF) ने ग्लोबल रिस्क्स रिपोर्ट (2026) का 21वाँ संस्करण जारी किया, जिसमें चेतावनी दी गई कि भूराजनीतिक-आर्थिक टकराव प्रमुख शक्तियों के लिए सबसे बड़ा जोखिम है।
2026 के वैश्विक जोखिम
- भूराजनीतिक-आर्थिक टकराव: 2026 के लिए शीर्ष जोखिम के रूप में दर्ज। इसमें व्यापार, वित्त एवं प्रौद्योगिकी का “हथियारकरण” शामिल है, जैसे प्रतिबंध और शुल्क (जैसे अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ, चीन द्वारा महत्वपूर्ण खनिजों पर प्रतिबंध आदि)।
- राज्य-आधारित सशस्त्र संघर्ष: दूसरा सबसे बड़ा जोखिम, जो यूक्रेन संघर्ष और वेनेज़ुएला व मध्य पूर्व जैसे क्षेत्रों में हालिया अस्थिरता से प्रेरित है।
- अत्यधिक मौसम: पर्यावरणीय जोखिम आगामी दशक के लिए शीर्ष प्राथमिकता बने हुए हैं, लेकिन आर्थिक और सैन्य संघर्षों की तात्कालिकता के कारण वे दो वर्षीय दृष्टिकोण में तीसरे स्थान (8%) पर आ गए हैं।
- सामाजिक जोखिम: ध्रुवीकरण, गलत सूचना और AI-जनित डीपफेक्स को सामाजिक स्थिरता के लिए बड़े खतरे के रूप में उद्धृत किया गया है, विशेषकर चुनावी चक्रों के दौरान।
भारत के लिए सबसे बड़े जोखिम
- साइबर सुरक्षा: भारत के लिए शीर्ष जोखिम के रूप में दर्ज, क्योंकि भारत डिजिटल भुगतान की ओर अधिक बढ़ रहा है।
- धन असमानता और सामाजिक सुरक्षा जाल: सुदृढ़ सामाजिक कल्याण योजनाओं की कमी और बढ़ती आय असमानता आंतरिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है।
- आर्थिक बाहरी झटके: भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों और अंतरराष्ट्रीय टैरिफ से उत्पन्न घरेलू मंदी के प्रति संवेदनशील है।
- महत्वपूर्ण अवसंरचना और संसाधन सुरक्षा: रिपोर्ट में “जल सुरक्षा” को संभावित विवाद बिंदु बताया गया है, विशेष रूप से सिंधु नदी बेसिन को भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का केंद्र माना गया है, विशेषतः सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद।
निहितार्थ
- वैश्विक व्यापार का विखंडन
- आपूर्ति श्रृंखलाओं का व्यवधान
- उच्च मुद्रास्फीति और विकास मंदी
- सामाजिक अशांति और बहुपक्षवाद में घटता विश्वास

स्रोत: Firstpost
Previous article
ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा उद्यमिता पर राष्ट्रीय अभियान प्रारंभ