पाठ्यक्रम: GS3/कृषि
संदर्भ
- भारत खाद्य सुरक्षा, वर्षा-आधारित कृषि और किसानों की आय पर बढ़ते जलवायु-परिवर्तन जोखिमों का सामना करने के लिए जलवायु-लचीली कृषि (CRA) के विस्तार को तीव्रता से आगे बढ़ा रहा है।
जलवायु-लचीली कृषि (CRA) क्या है?
- जलवायु-लचीली कृषि जैव-प्रौद्योगिकी और पूरक तकनीकों की एक श्रृंखला का उपयोग करती है ताकि कृषि पद्धतियों को मार्गदर्शित किया जा सके तथा रासायनिक इनपुट पर निर्भरता को कम किया जा सके, साथ ही उत्पादकता को बनाए रखा या सुधारा जा सके।
- सम्मिलित उपकरण: जैव उर्वरक और जैव कीटनाशक, तथा मृदा-माइक्रोबायोम विश्लेषण।
- जीनोम-संपादित फसलें विकसित की जा सकती हैं जो सूखा, गर्मी, लवणता या कीट दबावों को सहन कर सकें।
- एआई-आधारित विश्लेषण कई पर्यावरणीय और कृषि संबंधी चर को एकीकृत कर स्थानीय स्तर पर अनुकूलित कृषि रणनीतियाँ तैयार कर सकता है।
भारत को CRA की आवश्यकता क्यों है?
- कृषि अर्थव्यवस्था: भारत एक कृषि प्रधान राष्ट्र है जिसकी जनसंख्या में तीव्रता से वृद्धि हो रही है, जिससे उच्च और अधिक विश्वसनीय कृषि उत्पादकता की आवश्यकता पर दबाव बढ़ रहा है।
- भारत के कुल शुद्ध बोए गए क्षेत्र का लगभग 51% वर्षा-आधारित है, और यह भूमि देश के लगभग 40% खाद्य उत्पादन करती है, जिससे यह जलवायु परिवर्तनशीलता के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हो जाती है।
- पारंपरिक कृषि पद्धतियाँ पर्याप्त नहीं हैं: ये पद्धतियाँ अकेले जलवायु परिवर्तन के बढ़ते दबावों का सामना नहीं कर सकतीं।
- हालिया मॉडलिंग से पता चलता है कि सदी के अंत तक चावल जैसी मुख्य फसलों का उत्पादन 3-22% तक गिर सकता है, और सबसे खराब स्थिति में 30% से अधिक तक।
- उन्नत उत्पादकता: जलवायु-लचीली कृषि तकनीकों का एक समूह प्रदान करती है जो पर्यावरणीय स्वास्थ्य की रक्षा करते हुए उत्पादकता को बढ़ा सकती है।
- यह भारत की खाद्य आयात पर निर्भरता को कम कर सकती है और खाद्य क्षेत्र में देश की रणनीतिक स्वायत्तता को सुदृढ़ कर सकती है।
| वैश्विक परिदृश्य – अमेरिका ने USDA क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर एंड फॉरेस्ट्री (CSAF) पहल के माध्यम से CRA को संघीय नीति में एकीकृत किया है, और जलवायु-स्मार्ट प्रथाओं में अरबों का निवेश किया है। – CRA यूरोपीय संघ के ग्रीन डील और फार्म टू फोर्क रणनीति में निहित है, जिनका उद्देश्य रासायनिक इनपुट को कम करना तथा स्थिरता को बढ़ाना है। – चीन की CRA रणनीति जलवायु-सहनशील फसल प्रजनन, बड़े पैमाने पर जल-बचत सिंचाई और कृषि डिजिटलीकरण पर केंद्रित है। – ब्राज़ील उष्णकटिबंधीय जलवायु-लचीली फसल विकास में अग्रणी है, जिसे EMBRAPA के जैव-प्रौद्योगिकी अनुसंधान द्वारा संचालित किया जाता है। |
चुनौतियाँ
- कम अपनाना: छोटे और सीमांत किसानों के बीच CRA तकनीकों का अपनाना सीमित पहुँच, जागरूकता और वहनीयता के कारण कम है, तथा जैव उर्वरकों व जैव कीटनाशकों की गुणवत्ता असंगतियों से जैविक विकल्पों पर विश्वास कमजोर होता है।
- असमान वितरण: जलवायु-लचीले बीजों का प्रसार धीमा है, जीन संपादन जैसे नए उपकरणों का अपनाना अभी उभर रहा है और राज्यों में असमान रूप से वितरित है।
- डिजिटल विभाजन सटीक कृषि और एआई-आधारित निर्णय उपकरणों की पहुँच को सीमित करता है।
- ये चुनौतियाँ मृदा क्षरण, जल की कमी और तीव्रता से बढ़ती जलवायु अस्थिरता से अधिक जटिल हो जाती हैं, जो वर्तमान अनुकूलन प्रयासों से आगे निकल सकती हैं।
- खंडित नीति समन्वय प्रगति को धीमा करने का जोखिम और बढ़ाता है।
सरकारी पहल
- राष्ट्रीय नवाचार जलवायु-लचीली कृषि में: 2011 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने एक प्रमुख नेटवर्क परियोजना ‘राष्ट्रीय नवाचार जलवायु-लचीली कृषि में’ शुरू की।
- राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन को विशेष रूप से वर्षा-आधारित क्षेत्रों में कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है, जो एकीकृत खेती, जल उपयोग दक्षता, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और संसाधन संरक्षण के सामंजस्य पर केंद्रित है।
- BioE3 नीति ने CRA को जैव-प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों के विकास के लिए एक प्रमुख विषयगत क्षेत्र के रूप में स्थापित किया।
- Biostadt, IFFCO, GSFC, NFL और IPL Biologicals जैसी अग्रणी कंपनियाँ जैव-इनपुट प्रदान करती हैं जो मृदा स्वास्थ्य में सुधार करती हैं और रासायनिक निर्भरता को कम करती हैं।
- भारत के पास एक विस्तारित डिजिटल कृषि क्षेत्र भी है, जहाँ एग्रीटेक स्टार्टअप एआई-सक्षम परामर्श, सटीक सिंचाई, फसल-स्वास्थ्य निगरानी और उत्पादन पूर्वानुमान उपकरण प्रदान कर रहे हैं।
आगे की राह
- जलवायु-सहनशील और जीनोम-संपादित फसलों के विकास और कार्यान्वयन को तीव्र करने, जैव उर्वरकों एवं जैव कीटनाशकों के लिए गुणवत्ता मानकों और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने, तथा छोटे किसानों द्वारा अपनाने के समर्थन हेतु डिजिटल उपकरणों एवं जलवायु परामर्श की व्यवस्था करने की आवश्यकता है।
- वित्तीय प्रोत्साहन, जलवायु बीमा और ऋण तक पहुँच किसानों को संक्रमण के दौरान समर्थन देने के लिए आवश्यक हैं।
- भारत को BioE3 ढाँचे के अंतर्गत एक सुसंगत राष्ट्रीय CRA रोडमैप की आवश्यकता है, जो जैव-प्रौद्योगिकी, जलवायु अनुकूलन और नीतियों को संरेखित कर बड़े पैमाने पर लचीलापन प्रदान कर सके।
Source: TH
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