पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- गिग और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिक संघों ने हड़ताल का आह्वान किया है, भोजन वितरण एवं टैक्सी प्लेटफ़ॉर्म्स द्वारा बुनियादी श्रम अधिकारों से वंचित करने तथा कथित शोषण के विरुद्ध विरोध जताते हुए।
गिग अर्थव्यवस्था क्या है?
- विश्व आर्थिक मंच के अनुसार, गिग अर्थव्यवस्था अल्पकालिक, कार्य-आधारित रोजगार को दर्शाती है, जिसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स द्वारा सुगम बनाया जाता है जो श्रमिकों को ग्राहकों से जोड़ते हैं।
- भारत में गिग श्रमिकों को “स्व-नियोजित” श्रमिकों के रूप में परिभाषित किया गया है, और गिग श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
- गिग श्रमिक ड्राइविंग, ब्यूटी, घरेलू कार्य, भोजन वितरण आदि जैसी सेवाओं की विस्तृत श्रृंखला प्रदान करते हैं।
- उन्हें प्रति असाइनमेंट या गिग के आधार पर भुगतान किया जाता है, और उनके कार्य को पारंपरिक 9 से 5 कार्यालय संस्कृति से स्वतंत्र एवं लचीला माना जाता है।
- प्रकार
- वेब-आधारित गिग कार्य – गिग श्रमिक अपने कार्य वर्चुअली या डिजिटल रूप से करते हैं जैसे कंटेंट राइटिंग, सॉफ़्टवेयर विकास, डिजिटल मार्केटिंग, डेटा एनालिटिक्स आदि।
- स्थान-आधारित कार्य – कार्य स्थानीय स्तर पर या व्यक्तिगत रूप से किए जाते हैं लेकिन डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स जैसे ओला, उबर, ज़ोमैटो और अर्बन कंपनी द्वारा सुगम बनाए जाते हैं।
गिग और प्लेटफ़ॉर्म कार्य के लाभ
- लचीलापन: श्रमिक अपने समय और कार्य चुन सकते हैं, व्यक्तिगत एवं पेशेवर प्रतिबद्धताओं में संतुलन बना सकते हैं।
- आय के अवसर: लाखों लोगों, विशेषकर युवाओं और महिलाओं को आजीविका प्रदान करता है, बिना औपचारिक योग्यता की आवश्यकता के।
- महिलाओं के लिए अवसर: महिलाएँ गिग कार्य में अधिक कमा सकती हैं और घरेलू व पेशेवर जिम्मेदारियों में संतुलन बना सकती हैं।
- कौशल विकास: डिजिटल उपकरणों और ग्राहक सेवा का अनुभव रोजगार क्षमता को बढ़ाता है।
- आर्थिक योगदान: गिग अर्थव्यवस्था लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स और शहरी गतिशीलता जैसे क्षेत्रों का समर्थन करती है, जिससे GDP वृद्धि में योगदान होता है।
श्रमिकों द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियाँ
- सामाजिक सुरक्षा का अभाव: अधिकांश श्रमिक पारंपरिक श्रम संरक्षण से बाहर हैं।
- पर्याप्त श्रम विनियमों का अभाव: श्रमिकों को शोषण के प्रति असुरक्षित बनाता है।
- आय असुरक्षा: कमाई मांग के अनुसार उतार-चढ़ाव करती है।
- स्वास्थ्य और सुरक्षा जोखिम: डिलीवरी और परिवहन श्रमिकों को दुर्घटनाओं, लंबे कार्य घंटों और अपर्याप्त बीमा का सामना करना पड़ता है।
- चरम परिस्थितियों का जोखिम: (जैसे 2024 की हीटवेव) और असुरक्षित कार्य वातावरण।
- सामूहिक सौदेबाजी का अभाव: बिखरे हुए श्रमबल से प्लेटफ़ॉर्म्स के साथ बातचीत की शक्ति सीमित होती है।
- लैंगिक असमानताएँ: महिलाएँ सुरक्षा चिंताओं और पुरुषों की तुलना में कम भागीदारी दर का सामना करती हैं।
भारत में उठाए गए कदम
- सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020: गिग और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों की कानून में प्रथम औपचारिक मान्यता, जिससे उन्हें दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य एवं मातृत्व कवर, और वृद्धावस्था सुरक्षा जैसे लाभ प्राप्त हुए।
- ई-श्रम पोर्टल, 2021: असंगठित श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने के लिए लॉन्च किया गया।
- इस पोर्टल पर 30.98 करोड़ से अधिक श्रमिक पंजीकृत हैं, जिनमें 3.37 लाख गिग और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिक शामिल हैं।
- केंद्रीय बजट 2025-26: सरकार ने प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों को आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के लाभ देने की योजना की घोषणा की।
- सामाजिक सुरक्षा कोष: केंद्र, राज्य सरकारों और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स के योगदान से गिग श्रमिकों का समर्थन करने के लिए सरकार कार्य कर रही है।
- राज्य स्तरीय पहलें:
- राजस्थान का 2023 अधिनियम नियोक्ताओं को मासिक कल्याण उपकर (cess) योगदान करने के लिए बाध्य करता है।
- तेलंगाना का 2025 मसौदा विधेयक नियोक्ताओं और एग्रीगेटर्स द्वारा गिग श्रमिकों का पंजीकरण अनिवार्य करता है ताकि सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण लाभ सुनिश्चित किए जा सकें।
निष्कर्ष और आगे की राह
- भारत की गिग और प्लेटफ़ॉर्म अर्थव्यवस्था तीव्रता से विस्तार कर रही है, जो लचीलापन एवं नए आय अवसर प्रदान करती है, लेकिन श्रमिक सामाजिक सुरक्षा की कमी, आय अस्थिरता तथा औपचारिक अनुबंधों के अभाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
- इसलिए गिग श्रमिकों पर व्यापक डेटा की आवश्यकता है ताकि उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति और कार्य पैटर्न को समझा जा सके।
- जहाँ नीति-निर्माता तकनीकी प्रगति और श्रमबल की लचीलापन पर बल देते हैं, वहीं न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा, सामूहिक सौदेबाजी अधिकार एवं एल्गोरिदमिक पक्षपात व मनमाने खाते निष्क्रियकरण से सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
Source :TH
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संक्षिप्त समाचार 31-12-2025