पाठ्यक्रम: GS1/ भूगोल
समाचार में
- उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के उच्च पर्वतीय गांव धाराली में खीर गंगा नदी (जो अलकनंदा नदी की एक सहायक नदी है) पर बादल फटने से अचानक बाढ़ आ गई।
बादल फटना क्या है?
- बादल फटना एक स्थानीयकृत, अत्यधिक तीव्र वर्षा की घटना होती है जिसमें एक घंटे के अंदर लगभग 100 मिमी से अधिक बारिश एक छोटे क्षेत्र (सामान्यतः लगभग 10 वर्ग किमी) में होती है।
- यह घटना विशेष रूप से हिमालय जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में सामान्य होती है, जहाँ स्थलाकृतिक और मौसम संबंधी कारक इसकी संभावना बढ़ाते हैं।
बादल फटने के कारण
- ओरोग्राफिक लिफ्टिंग: आर्द्र वायु जब पहाड़ों से टकराकर ऊपर उठती है, तो वह तीव्रता से शीत होकर संघनित हो जाती है, जिससे तीव्र वर्षा होती है।
- ऊर्ध्वगामी वायु धाराएं: शक्तिशाली ऊर्ध्व वायु धाराएं वर्षा की बूंदों को ऊँचाई पर रोके रखती हैं; यदि ये धाराएं अचानक कमजोर पड़ जाएं, तो संचित जल एक साथ गिरता है।
- मानसून की गतिशीलता: भारत में बंगाल की खाड़ी या अरब सागर से आने वाले मानसूनी बादल जब हिमालय से टकराते हैं, तो वे तेजी से ऊपर उठते हैं, जिससे बादल फटने की स्थिति बनती है।
- जलवायु परिवर्तन: वैश्विक तापमान में वृद्धि से वायुमंडल अधिक आर्द्रता हो सकती है, जिससे हाल के वर्षों में बादल फटने की घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता दोनों बढ़ी हैं।

आगे की राह
- पूर्वानुमान प्रणाली को सुदृढ़ करें: उन्नत मौसम रडार, उपग्रह और ग्राउंड सेंसर नेटवर्क में निवेश करें ताकि अति स्थानीय स्तर पर समय रहते चेतावनी दी जा सके।
- वास्तविक समय में डेटा साझा करना और लक्षित अलर्ट सीधे संवेदनशील समुदायों तक पहुंचाना आवश्यक है।
- पारिस्थितिकी तंत्र की पुनर्स्थापना: वनीकरण, जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन और भूमि उपयोग पर सख्त नियंत्रण को बढ़ावा दें ताकि ढलानों और घाटियों की तीव्र वर्षा को अवशोषित करने की प्राकृतिक क्षमता पुनर्स्थापित हो सके।
- उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में अनियोजित निर्माण पर रोक लगाएं।
- आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना: वर्तमान सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को जलवायु-प्रतिरोधी मानकों के अनुसार उन्नत करें।
- जल निकासी प्रणालियों को अचानक जल प्रवाह को संभालने योग्य बनाएं और सुदृढ़ निकासी व आपातकालीन आश्रय स्थल बनाएं।
- अनुसंधान और क्षमता निर्माण: जलवायु परिवर्तन के प्रभावों, बादल फटने की भविष्यवाणी और स्थानीय संवेदनशीलता मानचित्रण पर निरंतर अनुसंधान को प्रोत्साहित करें।
- समुदाय जागरूकता और तैयारी: समुदाय स्तर पर आपदा प्रतिक्रिया और निकासी प्रशिक्षण को विस्तार दें, जिसमें स्कूलों एवं सार्वजनिक स्थानों पर नियमित अभ्यास शामिल हों।
Source: TOI
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