पाठ्यक्रम: GS2/सरकारी नीति और हस्तक्षेप; GS3/साइबर सुरक्षा
संदर्भ
- हाल ही में, दूरसंचार विभाग (DoT) ने वित्तीय प्रणालियों और टेलीकॉम बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा के लिए डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफ़ॉर्म (DIP) के अंतर्गत वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक (FRI) लॉन्च किया है।
वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक (FRI) के बारे में
- FRI एक जोखिम-आधारित मीट्रिक है जो मोबाइल नंबरों को उनकी धोखाधड़ी गतिविधियों में शामिल होने की संभावना के आधार पर तीन श्रेणियों—मध्यम, उच्च, या अत्यंत उच्च जोखिम—में वर्गीकृत करता है।
- यह वर्गीकरण कई डेटा स्रोतों से प्राप्त किया जाता है, जिनमें भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल, दूरसंचार विभाग का चक्षु प्लेटफॉर्म और बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों द्वारा साझा की गई जानकारी शामिल हैं।
- जब कोई मोबाइल नंबर संदिग्ध पाया जाता है, तो उसका बहु-आयामी विश्लेषण किया जाता है जिससे उसके जोखिम स्तर का मूल्यांकन किया जाता है।
- FRI का मूल्यांकन वास्तविक समय में हितधारकों के साथ साझा किया जाता है। प्रमुख यूपीआई प्लेटफ़ॉर्म जैसे फ़ोन पे, पेटीएम और गूगल पे अब FRI अलर्ट को एकीकृत कर रहे हैं।
भारत में साइबर धोखाधड़ी
- भारत में वित्तीय घोटाले, पहचान की चोरी और डिजिटल अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे साइबर धोखाधड़ी एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
- डिजिटल लेनदेन के बढ़ने के साथ-साथ साइबर धोखाधड़ी से जुड़े जोखिम भी बढ़ रहे हैं।

- इसमें हैकिंग, फ़िशिंग, पहचान की चोरी, साइबर जासूसी, और साइबर धमकी जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं।
भारत में साइबर धोखाधड़ी पर डेटा


साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ सरकारी पहल
- महत्त्वपूर्ण विधायी उपाय: साइबर अपराध मामलों को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, भारतीय न्याय संहिता, 2023 और बाल यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO अधिनियम) के अंतर्गत नियंत्रित किया जाता है।
- चक्षु सुविधा – संचार साथी प्लेटफॉर्म: यह नागरिकों को संदिग्ध कॉल और संदेशों की रिपोर्ट करने की अनुमति देता है।
- I4C के तहत e-Zero FIR पहल: यह पीड़ितों को ऑनलाइन FIR दर्ज करने की अनुमति देती है, जिससे क्षेत्रीय सीमाएँ समाप्त हो जाती हैं और कानून प्रवर्तन की प्रतिक्रिया तीव्र हो जाती है।
- भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C): साइबर अपराध से निपटने के लिए स्थापित किया गया है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल नागरिकों को ऑनलाइन घटनाओं की रिपोर्ट करने की सुविधा देता है।
- RBI का AI आधारित टूल ‘‘म्यूलहंटर’(MuleHunter)’: धन की हेराफेरी में शामिल खातों की पहचान करने के लिए उपयोग किया जाता है और बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों को इसका उपयोग करने की सलाह दी गई है।
- नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली: इस प्रणाली ने ₹1,200 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी लेनदेन की राशि को पुनः प्राप्त करने में सहायता की है।
- धोखाधड़ी वाले सिम कार्डों को ब्लॉक करना: 3.2 लाख से अधिक सिम कार्ड और 49,000 IMEIs, जो साइबर धोखाधड़ी से जुड़े थे, ब्लॉक किए गए हैं।
- साइबर जागरूकता अभियान: सरकार सोशल मीडिया, रेडियो अभियानों, और शैक्षिक कार्यक्रमों के माध्यम से साइबर सुरक्षा जागरूकता को बढ़ावा देती है।
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