“भारत का आगामी सुधार: व्यापार संचालन की लागत में कमी

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • भारत को प्रक्रियात्मक सुधारों से ध्यान हटाकर लागत तर्कसंगतीकरण (Cost Rationalization) पर केंद्रित होना चाहिए, क्योंकि उच्च व्यापारिक लागत प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित कर रही है। ऋण, भूमि, इनपुट, लॉजिस्टिक्स और अनुपालन व्यय जैसी संरचनात्मक लागतों का समाधान भारत जैसे देशों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

भारत में व्यापार करने की लागत के बारे में

  • व्यापार करने की लागत से तात्पर्य उन कुल व्ययों से है जो कंपनियाँ उत्पादन और संचालन में वहन करती हैं।
  • इसमें पूँजी की लागत, भूमि और श्रम लागत, इनपुट एवं ऊर्जा लागत, लॉजिस्टिक्स एवं आपूर्ति श्रृंखला लागत, तथा अनुपालन एवं नियामकीय भार शामिल हैं।
  • भारत ने प्रक्रियात्मक सरलता में सुधार किया है, किंतु संरचनात्मक लागत की असुविधाएँ बनी हुई हैं, जो वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित करती हैं।

मुख्य निर्धारक

  • पूँजी की लागत: भारत का क्रेडिट-टू-GDP अनुपात (~50–55%) वैश्विक औसत (~148%) से काफी कम है।
    • उच्च सरकारी उधारी निजी निवेश को सीमित करती है।
    • चीन/वियतनाम की तुलना में ब्याज दरें अधिक हैं।
  • इनपुट लागत:
    • क्रॉस-सब्सिडीकरण के कारण उच्च विद्युत दरें।
    • उल्टे शुल्क ढाँचे (Inverted Duty Structures) से मध्यवर्ती वस्तुओं की लागत बढ़ती है।
    • उन्नत तकनीकी इनपुट तक सीमित पहुँच।
  • लॉजिस्टिक्स लागत:
    • लॉजिस्टिक्स लागत ~13–14% से घटकर ~8% GDP तक आई है, किंतु अभी भी वैश्विक मानकों से अधिक है।
    • बंदरगाह विलंब, सीमा शुल्क अक्षमताएँ और अनिश्चितता बनी रहती है।
  • भूमि अधिग्रहण:विखंडित भूमि बाज़ार, अस्पष्ट शीर्षक और विवाद लागत बढ़ाते हैं।
  • अनुपालन लागत:विशेषकर MSMEs पर भारी नियामकीय भार।
    • अनुपातिक और जोखिम-आधारित विनियमन का अभाव।

संबंधित मुद्दे एवं चिंताएँ

  • संरचनात्मक लागत असुविधा: उच्च इनपुट और वित्तीय लागत से निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता घटती है।
  • लॉजिस्टिक्स एवं व्यापार अक्षमताएँ: सीमा शुल्क में विलंब और अनिश्चितता लेन-देन लागत बढ़ाती है।
  • ऋण बाधाएँ: सीमित वित्तीय गहराई MSME वृद्धि को रोकती है।
  • नियामकीय बोझ: अत्यधिक अनुपालन औपचारिकरण को हतोत्साहित करता है।
  • भूमि एवं अवसंरचना अवरोध: परियोजना विलंब से वित्तीय और परिचालन लागत बढ़ती है।

सरकारी प्रयास

  • केंद्रीय बजट 2026-27:
    • ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस” को विकास का स्तंभ बनाया गया है।
    • डिजिटलीकरण, कर निश्चितता, निवेशक पहुँच और मुकदमेबाज़ी में कमी पर ध्यान।
  • डिजिटल व्यापार सुविधा:सीमा शुल्क निकासी हेतु एकीकृत डिजिटल विंडो और कस्टम इंटीग्रेटेड सिस्टम।
  • MAT छूट:सभी गैर-निवासियों को, जो अनुमानित आधार पर कर चुकाते हैं।
  • विश्वसनीय आयातक:जोखिम प्रणाली में मान्यता प्राप्त, जिससे भौतिक सत्यापन घटता है और फैक्ट्री-से-शिप निकासी संभव होती है।
  • राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS): व्यवसाय आवश्यकताओं के अनुसार अनुमोदन पहचान और आवेदन में मार्गदर्शन।
    • 32 केंद्रीय विभागों और 32 राज्य सरकारों की प्रक्रियाओं का एकीकरण।
    • 698 केंद्रीय और 7435 राज्य अनुमोदनों तक पहुँच।
  • डिजिटल वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र: UPI, GST डेटा, ओपन क्रेडिट इनेबलमेंट नेटवर्क(OCEN) द्वारा ऋण पहुँच।
  • PLI योजनाएँ: विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने हेतु।
  • सुधारों से प्रक्रियाएँ बेहतर हुई हैं, किंतु लागत में कमी अधूरी है।

भारत कैसे चीन और वियतनाम से प्रतिस्पर्धा कर सकता है?

  • पूँजी लागत कम करना:सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) घटाना।
    • ऋण पहुँच सुधारना।
    • फिनटेक (GST, UPI डेटा) द्वारा जोखिम-आधारित ऋण।
  • इनपुट लागत तर्कसंगत बनाना:विद्युत में क्रॉस-सब्सिडीकरण समाप्त करना।
    • उल्टे शुल्क ढाँचे सुधारना।
    • तकनीक-आधारित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को प्रोत्साहित करना।
  • लॉजिस्टिक्स दक्षता सुधारना:तकनीक-सक्षम, विश्वास-आधारित सीमा शुल्क।
    • बंदरगाहों पर ठहराव समय घटाना।
    • बहु-मोडल परिवहन का विस्तार।
  • भूमि सुधार:मानकीकृत लीज़ मॉडल।
    • स्पष्ट भूमि शीर्षक और त्वरित विवाद समाधान।
  • नियामकीय सुधार:जोखिम-आधारित, अनुपातिक विनियमन।
    • नियामकीय भार घटाने हेतु “सनसेट क्लॉज़”।

आगे की राह: सरलता से लागत प्रतिस्पर्धा तक

  • भारत की लागत संरचना की तुलना चीन, वियतनाम और आसियान अर्थव्यवस्थाओं से करना।
  • कारक बाज़ार सुधारों (भूमि, श्रम, पूँजी) पर ध्यान।
  • लागत दक्षता द्वारा निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी और संस्थागत सुधारों को प्रोत्साहन।

वियतनाम और चीन से सीख

  • वियतनाम: निर्यात-उन्मुख नीतियाँ, कुशल लॉजिस्टिक्स, FDI एकीकरण।
  • चीन: पैमाने की अर्थव्यवस्था, गहन अवसंरचना, सस्ता ऋण।

निष्कर्ष

  • भारत ने ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस में उल्लेखनीय सुधार किया है, किंतु आगामी चरण व्यापार करने की लागत को कम करने का है।
  • प्रतिस्पर्धी लागत संरचना निर्यात को बढ़ावा देने, विनिर्माण का विस्तार करने, औपचारिक रोजगार सृजित करने और 8% से अधिक की सतत आर्थिक वृद्धि प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।त
  • अतः, लागत प्रतिस्पर्धात्मकता भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति को परिभाषित करेगी, साथ ही प्रक्रियात्मक सरलता को भी।
मुख्य परीक्षा दैनिक अभ्यास प्रश्न
[प्रश्न] भारत में व्यापार करने की उच्च लागत में योगदान देने वाले प्रमुख संरचनात्मक कारकों पर चर्चा कीजिए। भारत को चीन और वियतनाम जैसे देशों के साथ प्रतिस्पर्धी बनाने हेतु आवश्यक सुधार सुझाइए।

स्रोत: ET

 

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