पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- यूरोपीय देशों में विभिन्न स्थानों पर लोग विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे सामाजिक अशांति के आर्थिक आयामों की ओर ध्यान आकर्षित हुआ है।
परिचय
- फ्रांस, अल्बानिया, बेल्जियम, इटली और पुर्तगाल में व्यापक जन-असंतोष सड़कों पर विरोध-प्रदर्शनों के रूप में सामने आ रहा है।
- प्रायः यह तर्क दिया जाता है कि किसी अर्थव्यवस्था में बढ़ती आर्थिक असमानताएँ सामाजिक अशांति को उत्पन्न करती हैं।
- ईंधन की बढ़ती कीमतें, विद्यालयों की स्थिति को लेकर असंतोष, सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट तथा आवास संकट इन विरोध-प्रदर्शनों के प्रमुख कारण हैं।
आय अंतराल
- आय अंतराल एक अनुपात है, जो किसी जनसंख्या में सबसे गरीब 50% लोगों और सबसे धनी 10% लोगों की औसत आय के बीच के अंतर को मापता है। यह अनुपात जितना अधिक होता है, आय असमानता उतनी ही अधिक होती है।
- विश्व असमानता रिपोर्ट, 2026 के अनुसार, शीर्ष 10% और निचले 50% के बीच औसत आय का अंतर, शीर्ष 10% तथा निचले 50% के आय-हिस्सों के अनुपात के रूप में व्यक्त किया जाता है।

- फ्रांस में वर्ष 2014 से 2024 के बीच आय अंतराल में वृद्धि हुई है। इटली में भी इसी प्रकार की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके विपरीत, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी और स्पेन में यह अनुपात घटा है।
- यद्यपि फ्रांस में आय अंतराल बढ़ा है, फिर भी यह अपने आप में जर्मनी जैसे समकक्ष देशों की तुलना में सबसे कम स्तरों में से एक है।
- भारत में आय अंतराल का अनुपात 38 है, जबकि दक्षिण अफ्रीका में यह 118 है।
सामाजिक अशांति के आर्थिक परिणाम
- अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के एक अर्थशास्त्री के अनुसार, बड़े पैमाने पर होने वाली अशांति की घटनाओं के बाद औसतन छह तिमाहियों के अंदर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में एक प्रतिशत अंक की गिरावट देखी जाती है।
- सामाजिक-आर्थिक कारणों से प्रेरित अशांति का संबंध राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित अशांति की तुलना में GDP में अधिक तीव्र संकुचन से होता है।
- आर्थिक गतिविधियों में व्यवधान: विरोध-प्रदर्शन, हड़तालें और सड़क अवरोध उत्पादन, परिवहन, व्यापार तथा आपूर्ति शृंखलाओं को बाधित करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप आर्थिक हानि होती है।
- निवेश में गिरावट: राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता से व्यावसायिक गतिविधियों में अनिश्चितता बढ़ती है। इससे घरेलू एवं विदेशी निवेश हतोत्साहित होता है तथा नई परियोजनाओं में देरी होती है।
- मुद्रास्फीति में वृद्धि: आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित होने से उनकी कमी उत्पन्न हो सकती है और कीमतों में वृद्धि हो सकती है। इसका प्रभाव विशेष रूप से निम्न-आय वाले परिवारों पर अधिक पड़ता है।
- पर्यटन एवं व्यापार में गिरावट: सामाजिक अशांति किसी क्षेत्र की सुरक्षित पर्यटन स्थल के रूप में छवि को हानि पहुँचा सकती है। इससे पर्यटकों की संख्या, स्थानीय व्यवसायों का राजस्व तथा व्यापार के अवसर कम हो सकते हैं।
- सरकारी वित्त पर दबाव: सरकारों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने, मुआवजा देने, पुनर्निर्माण तथा पुनर्वास पर अतिरिक्त व्यय करना पड़ सकता है। इससे विकासात्मक गतिविधियों के लिए उपलब्ध संसाधनों पर दबाव बढ़ता है।
निष्कर्ष
- सामाजिक अशांति से अर्थव्यवस्था पर महत्त्वपूर्ण लागत का भार पड़ सकता है, लेकिन यह वास्तविक जन-शिकायतों तथा संरचनात्मक असमानताओं की ओर ध्यान आकर्षित करने का माध्यम भी बन सकती है।
- सतत आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए समावेशी विकास, उत्तरदायी शासन तथा संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान के माध्यम से सामाजिक अशांति के मूल कारणों का निराकरण करना आवश्यक है।
स्रोत: IE
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