CAPF में आईपीएस नियुक्तियों को लेकर पूर्व CAPF अधिकारियों की चिंताएँ

पाठ्यक्रम: GS2/ राजव्यवस्था और शासन

संदर्भ

  • सेवानिवृत्त केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) अधिकारियों ने सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि न्यायालय के वर्ष 2025 के उस आदेश का पालन नहीं किया गया है जिसमें CAPF में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को क्रमिक रूप से कम करने का निर्देश दिया गया था।

पृष्ठभूमि 

  • संजय प्रकाश एवं अन्य बनाम भारत संघ, 2025 मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि:
    • CAPF के ग्रुप-ए अधिकारियों को सभी उद्देश्यों हेतु “संगठित सेवाओं” के रूप में माना जाए।
    • CAPF में वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (SAG) पदों, अर्थात् इंस्पेक्टर जनरल (IG) तक के पदों पर आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को अधिकतम दो वर्षों की अवधि में क्रमिक रूप से कम किया जाए।
  • वर्तमान में, CAPF में उप महानिरीक्षक (DIG) स्तर के 20% पद और महानिरीक्षक (IG) स्तर के 50% पद आईपीएस अधिकारियों के लिए आरक्षित हैं।
  • निर्णय का उद्देश्य : इस निर्णय का उद्देश्य CAPF कैडर अधिकारियों के लिए न्यायसंगत कैरियर उन्नति सुनिश्चित करना तथा CAPF में प्रतिनियुक्त आईपीएस अधिकारियों के दीर्घकालिक प्रभुत्व को कम करना था।

गृह मंत्रालय की भूमिका

  • गृह मंत्रालय (MHA) भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) दोनों का प्रशासनिक प्राधिकरण है।
  • MHA ने पारंपरिक रूप से आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को निम्न आधारों पर उचित ठहराया है:
    • राज्य कैडरों से पुलिसिंग अनुभव लाकर केंद्रीय बलों को सुदृढ़ करना।
    • सभी बलों में नेतृत्व का एक समान मानक बनाए रखना।
  • सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बावजूद, मई 2025 के निर्णय के बाद कम से कम आठ आईपीएस अधिकारियों को CAPF में वरिष्ठ पदों पर नियुक्त किया गया है।
    • इनमें कमांडेंट और इंस्पेक्टर जनरल जैसे पद शामिल हैं।

CAPF में आईपीएस नियुक्तियों को लेकर चिंताएँ

  • कैरियर उन्नति में ठहराव : वरिष्ठ पदों (जैसे IG स्तर के 50% पद) पर उच्च आरक्षण के कारण CAPF कैडर अधिकारियों के लिए पदोन्नति के अवसर सीमित हो जाते हैं। औसतन, एक CAPF अधिकारी को कमांडेंट पद तक पहुँचने में 25 वर्ष लगते हैं, जबकि आदर्श रूप से यह 13 वर्षों में होना चाहिए।
  • संगठनात्मक अखंडता का उल्लंघन : आईपीएस अधिकारियों की निरंतर प्रतिनियुक्ति CAPF की संस्थागत स्वायत्तता और इन्हें विशिष्ट बलों के रूप में पेशेवर बनाने की प्रक्रिया को बाधित करती है।
  • प्राकृतिक न्याय और समानता का उल्लंघन : अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 16 (लोक सेवाओं में समान अवसर) लागू होते हैं, क्योंकि CAPF कैडर अधिकारियों को उनके आईपीएस समकक्षों की तुलना में समान पदोन्नति अवसर नहीं मिलते।

नीतिगत सिफारिशें

  • सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का क्रियान्वयन: MHA को एक संक्रमण योजना तैयार करनी चाहिए ताकि आगामी दो वर्षों में SAG और उच्च पदों पर आईपीएस प्रतिनियुक्तियों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जा सके।
  • कैडर समीक्षा: सभी CAPF में कैडर समीक्षा की जाए और भर्ती नियमों (RRs) में संशोधन कर पदोन्नति को CAPF के अंदर योग्यता और अनुभव के आधार पर सुनिश्चित किया जाए।
  • संसदीय पर्यवेक्षण: एक संसदीय स्थायी समिति गठित की जाए जो प्रतिनियुक्ति प्रथाओं और CAPF में कैरियर ठहराव की समीक्षा करे।
  • पारदर्शी प्रतिनियुक्ति नीति: एक समान और पारदर्शी नीति विकसित की जाए जिसमें अंतर-कैडर प्रतिनियुक्तियों की पात्रता, कार्यकाल एवं वस्तुनिष्ठ मानदंड स्पष्ट रूप से निर्धारित हों।
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल

– केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) भारत के गृह मंत्रालय के अधीन केंद्रीय पुलिस संगठनों का सामूहिक नाम है।
– ये बल आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा के लिए उत्तरदायी हैं। CAPF में निम्नलिखित बल शामिल हैं:
असम राइफल्स (AR): यह एक केंद्रीय पुलिस एवं अर्धसैनिक संगठन है जो सीमा सुरक्षा, उग्रवाद-रोधी अभियानों और पूर्वोत्तर भारत में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उत्तरदायी है।
सीमा सुरक्षा बल (BSF): यह मुख्यतः पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर तैनात है, तथा 2009 से वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित क्षेत्रों में भी कार्यरत है।
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP): यह भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा ड्यूटी निभाती है।
सशस्त्र सीमा बल (SSB): यह भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमाओं की रक्षा करता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG): यह गृह मंत्रालय के अधीन एक आतंकवाद-रोधी इकाई है। इसके सभी कर्मी अन्य CAPF और भारतीय सेना से प्रतिनियुक्त किए जाते हैं।
केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF): यह आंतरिक सुरक्षा ड्यूटी में तैनात है और पूर्वोत्तर, LWE क्षेत्र तथा जम्मू-कश्मीर में बड़ी संख्या में उपस्थित है।
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF): यह विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs), अन्य महत्वपूर्ण अवसंरचना प्रतिष्ठानों, देश के प्रमुख हवाई अड्डों की सुरक्षा प्रदान करता है तथा चुनावों और अन्य आंतरिक सुरक्षा ड्यूटी एवं वीवीआईपी सुरक्षा में भी संलग्न है।

स्रोत: TH

 

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