यूएई के राष्ट्रपति का भारत दौरा

पाठ्यक्रम: GS2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध

संदर्भ

  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नहयान ने भारत की आधिकारिक यात्रा की।

मुख्य परिणाम

  • रक्षा: भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच सामरिक रक्षा साझेदारी पर आशय पत्र (Letter of Intent) पर हस्ताक्षर।
  • ऊर्जा: भारत ने संयुक्त अरब अमीरात से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) खरीदने हेतु 3 अरब अमेरिकी डॉलर का समझौता किया, जिससे भारत UAE का शीर्ष ग्राहक बन गया।
  • द्विपक्षीय व्यापार: दोनों पक्षों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 200 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक करने पर सहमति व्यक्त की।
  • परमाणु सहयोग: उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों में साझेदारी विकसित करने पर सहमति, जिसमें बड़े परमाणु रिएक्टरों और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) का विकास एवं परिनियोजन, उन्नत रिएक्टर प्रणालियों, परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के संचालन एवं रखरखाव में सहयोग शामिल है।
  • निवेश: गुजरात, भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र के विकास हेतु निवेश सहयोग पर आशय पत्र।
  • भारत में सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर की स्थापना: सिद्धांततः सहमति बनी कि भारत का सी-डैक (C-DAC) और UAE की जी-42 कंपनी मिलकर भारत में सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करेंगे।
  • अंतरिक्ष: भारत के भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) और UAE की अंतरिक्ष एजेंसी के बीच अंतरिक्ष उद्योग विकास एवं वाणिज्यिक सहयोग को सक्षम बनाने हेतु संयुक्त पहल पर आशय पत्र।

यात्रा का महत्व 

  • सामरिक एवं भू-राजनीतिक महत्व: यह यात्रा यमन को लेकर UAE और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि में हुई। यह भारत की भारतीय महासागर क्षेत्र (IOR) में शुद्ध सुरक्षा प्रदाता की भूमिका के प्रति UAE के समर्थन का संकेत है।
  • आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग: व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के आस-पास गति प्रदान करता है। UAE भारत के शीर्ष व्यापारिक साझेदारों और प्रमुख निवेशकों में से एक है।
  • क्षेत्रीय सुरक्षा पुनर्संरेखण: सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की को सम्मिलित कर नए “इस्लामिक नाटो” की धारणा UAE के लिए चिंता का विषय हैं। इससे UAE भारत में स्वतंत्र सुरक्षा साझेदार खोजने की ओर अग्रसर हुआ है।
  • ईरान से संबंधित चिंताएँ: UAE ईरान से जुड़े तनाव को बढ़ने से रोकने में विशेष रुचि रखता है, क्योंकि कोई भी सैन्य टकराव पूरे खाड़ी क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है। भारत की संतुलित कूटनीति और क्षेत्रीय हितधारकों के साथ सद्भावना को स्थिरता प्रदान करने वाला कारक माना जाता है।
  • शांति बोर्ड हेतु आमंत्रण: अमेरिका ने भारत को “बोर्ड ऑफ पीस” में शामिल होने का आमंत्रण दिया है, जो गाज़ा में शांति और पुनर्निर्माण की देखरेख हेतु गठित निकाय है। UAE इसका हिस्सा है, किंतु भारत ने आमंत्रण स्वीकार नहीं किया है। कई लोग इस यात्रा को भारत को शामिल करने हेतु प्रेरित करने का प्रयास मानते हैं।
  • जन-केंद्रित संबंध: UAE में 35 लाख भारतीय प्रवासी रहते हैं, जिससे श्रम गतिशीलता, कौशल आदान-प्रदान और सांस्कृतिक संबंधों पर बल दिया गया है।

भारत और UAE के बीच द्विपक्षीय संबंध 

  • राजनीतिक: भारत और UAE ने 1972 में राजनयिक संबंध स्थापित किए। 2017 में संबंधों को व्यापक सामरिक साझेदारी (CSP) में उन्नत किया गया।
  • आर्थिक एवं वाणिज्यिक: CEPA 2022 में हस्ताक्षरित हुआ। इसके बाद द्विपक्षीय माल व्यापार FY 2020-21 के 43.3 अरब अमेरिकी डॉलर से FY 2023-24 में 83.7 अरब अमेरिकी डॉलर तक लगभग दोगुना हो गया।
    • UAE भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है (अमेरिका के बाद), जहाँ 2022-23 में लगभग 31.61 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात हुआ।
    • द्विपक्षीय व्यापार 97 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक होने की संभावना है, और गैर-तेल व्यापार में 100 अरब अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य रखा गया है।
  • रक्षा सहयोग: रक्षा सहयोग समझौते (2003) के बाद, जिसे 2004 में लागू किया गया, रक्षा मंत्रालय स्तर पर संयुक्त रक्षा सहयोग समिति (JDCC) के माध्यम से संचालित होता है।
    • प्रत्यर्पण और पारस्परिक कानूनी सहायता संधियाँ अंतरराष्ट्रीय अपराध से निपटने हेतु।
  • अंतरिक्ष सहयोग: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और UAE अंतरिक्ष एजेंसी ने 2016 में शांतिपूर्ण उद्देश्यों हेतु बाह्य अंतरिक्ष के अन्वेषण एवं उपयोग में सहयोग पर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
  • भारतीय समुदाय: लगभग 35 लाख भारतीय प्रवासी समुदाय UAE में सबसे बड़ा जातीय समुदाय है, जो देश की जनसंख्या का लगभग 35% है।
  • बहुपक्षीय सहयोग: भारत और UAE कई बहुपक्षीय मंचों का हिस्सा हैं, जैसे भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC), I2U2 (भारत-इज़राइल-UAE-अमेरिका) और UFI (UAE-फ्रांस-भारत) त्रिपक्षीय।

चुनौतियाँ 

  • व्यापार असंतुलन: भारत का UAE के साथ व्यापार घाटा है, मुख्यतः तेल आयात के कारण, जिससे आर्थिक संबंध असमान हो जाते हैं, भले ही गैर-तेल व्यापार बढ़ रहा हो।
  • क्षेत्रीय भू-राजनीतिक तनाव: मध्य पूर्व और खाड़ी क्षेत्र की राजनीतिक अस्थिरता द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करती है, विशेषकर भारत के सामरिक हितों को।
  • श्रम और प्रवासन मुद्दे: भारत UAE में प्रवासी श्रमिकों का सबसे बड़ा स्रोत है, और भारतीय श्रमिकों के कल्याण एवं अधिकारों से संबंधित मुद्दे चिंता का विषय रहे हैं।
  • UAE की विदेश नीति: ईरान और पाकिस्तान जैसे देशों के साथ भारत के संबंध कभी-कभी UAE के साथ संबंधों को जटिल बना देते हैं, क्योंकि UAE क्षेत्र में अलग सामरिक प्राथमिकताएँ रखता है।

आगे की राह

  • यह यात्रा व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और जन-से-जन संबंधों को सुदृढ़ करने का उद्देश्य रखती है।
  • दोनों देश रक्षा संबंधों को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिसमें प्रशिक्षण आदान-प्रदान और रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग शामिल है।
  • UAE में बड़े भारतीय प्रवासी समुदाय के माध्यम से संबंध सुदृढ़ होंगे, जिससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को प्रोत्साहन मिलेगा।

Source: MEA

 

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