पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- संसदीय वित्त स्थायी समिति ने लाभकारी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) के आईपीओ जारी करने की सिफारिश की है ताकि बाज़ार पूंजी एकत्रित की जा सके और कॉर्पोरेट सुशासन को सुदृढ़ किया जा सके।
समिति की प्रमुख सिफारिशें
- आईपीओ प्रोत्साहन: अत्यधिक लाभकारी RRBs को सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाना चाहिए ताकि बाज़ार पूंजी एकत्रित की जा सके, बेहतर सुशासन लागू हो और संशोधित 1976 RRBs अधिनियम के अनुसार केंद्र-प्रायोजक की हिस्सेदारी 51% से अधिक बनी रहे।
- जोखिम शमन: ₹7.5 लाख तक के बिना संपार्श्विक शिक्षा ऋण हेतु क्रेडिट गारंटी फंड योजना फॉर एजुकेशन लोन (CGFSEL) का पूर्ण उपयोग किया जाए, जिसमें एनसीजीटीसी के माध्यम से 75% सरकारी गारंटी उपलब्ध है।
- एआई अपनाना: वास्तविक समय में परिसंपत्ति निगरानी और तनाव पहचान हेतु एआई-आधारित अर्ली वार्निंग सिग्नल्स लागू किए जाएँ।
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs) के बारे में
- पृष्ठभूमि: RRBs की स्थापना 1975 में नरसिंहम कार्यदल की सिफारिशों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 के अंतर्गत की गई थी, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों, विशेषकर लघु एवं सीमांत किसानों को संस्थागत ऋण उपलब्ध कराया जा सके।
- संरचनात्मक समस्याएँ: विखंडन, अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण और उच्च परिचालन लागत ने समय के साथ दक्षता को प्रभावित किया।
- विलय रणनीति (वन स्टेट, वन RRBs): व्यवहार्यता सुधार हेतु सरकार ने चरणबद्ध एकीकरण किया।
- चरण I (2006–10): 196 से घटकर 82 RRBs
- चरण II (2013–15): 82 से घटकर 56
- चरण III: 56 से घटकर 43
- चरण IV: 43 से घटकर 28 (26 राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों में)
- स्वामित्व संरचना:
- केंद्र सरकार: 50%
- राज्य सरकार: 15%
- प्रायोजक बैंक: 35%
- नियमन एवं पर्यवेक्षण:
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के अंतर्गत विनियमित।
- राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) द्वारा पर्यवेक्षित।
- आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत कर प्रयोजनों हेतु सहकारी समितियों के रूप में माना जाता है।
RRBs के लिए आईपीओ मार्ग का महत्व
- बाज़ार-आधारित पूंजी एकत्रण, विशेषकर जब RRBs ने पहले ही ₹7,720 करोड़ का शुद्ध लाभ (वित्त वर्ष 2025–26 के पहले 9 माह) दर्ज किया है।
- निवेशकों का विश्वास सुदृढ़ करना, जिसे जीएनपीए के 5.4% (13 वर्ष का न्यूनतम) तक घटने और परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार से बल मिला है।
- सेबी की सूचीबद्धता मानदंडों और प्रकटीकरण आवश्यकताओं के माध्यम से सुशासन एवं पारदर्शिता को बढ़ावा।
- ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण विस्तार का समर्थन, क्योंकि RRBs प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (कृषि, एमएसएमई, कमजोर वर्ग) में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
- सरकार पर राजकोषीय भार कम करना, पूंजी आवश्यकताओं को बाज़ार की ओर स्थानांतरित करना।
चुनौतियाँ / चिंताएँ
- सामाजिक दायित्व बनाम लाभप्रदता: लाभ अर्जित करने का दबाव वित्तीय समावेशन पर ध्यान को कम कर सकता है।
- RRBs के बीच असमानता: सभी RRBs लाभकारी नहीं हैं, जिससे आईपीओ पात्रता सीमित होती है।
- जटिल त्रिपक्षीय स्वामित्व संरचना (केंद्र–राज्य–प्रायोजक बैंक): यह निवेशकों को हतोत्साहित कर सकती है।
- सीमित बाज़ार आकर्षण: छोटे, क्षेत्रीय बैंकों की तुलना में बड़े सार्वजनिक/निजी बैंकों के प्रति निवेशकों की अधिक रुचि होती है।
Source: BS
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