समुद्री नाविकों का परित्याग (Seafarer Abandonment)

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था

संदर्भ
 

  • पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष तथा रणनीतिक हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के निकट जहाज़ों के फँसे रहने की स्थिति के बीच उद्योग से जुड़े हितधारक समुद्री नाविकों के परित्याग (Seafarer Abandonment) के बढ़ते जोखिम को लेकर चेतावनी दे रहे हैं।

समुद्री नाविकों का परित्याग क्या है? 

  • समुद्री नाविकों का परित्याग उस स्थिति को कहा जाता है जब जहाज़ के स्वामी नाविकों को वेतन देने, आवश्यक आपूर्ति उपलब्ध कराने या उन्हें स्वदेश वापस भेजने की व्यवस्था करने में विफल रहते हैं, जिसके कारण जहाज़ का चालक दल जहाज़ों पर या विदेशी बंदरगाहों में फँसा रह जाता है।
  • समुद्री श्रम अभिसमय 2006 के अनुसार, परित्याग की स्थिति तब मानी जाती है जब निम्नलिखित दायित्वों का पालन न किया जाए—
    • कम से कम दो महीनों तक वेतन का भुगतान न करना,
    • बुनियादी रखरखाव और आवश्यक आपूर्ति उपलब्ध न कराना, या
    • चालक दल को स्वदेश वापसी (Repatriation) की व्यवस्था न करना।
    • परित्याग के मामले प्रायः व्यस्त समुद्री केंद्रों जैसे तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात में अधिक देखे जाते हैं, विशेषकर फारस की खाड़ी क्षेत्र के आसपास।

परित्याग की स्थिति

  • अंतर्राष्ट्रीय परिवहन श्रमिक संघ (ITF) के आँकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में 410 जहाज़ों पर कुल 6,223 समुद्री नाविकों को परित्यक्त छोड़ दिया गया।
  • राष्ट्रीयता के आधार पर सबसे अधिक संख्या भारत की रही (1,125), इसके बाद फिलीपींस, सीरिया, इंडोनेशिया और यूक्रेन का स्थान रहा।
  • भारत वैश्विक स्तर पर समुद्री नाविकों की आपूर्ति करने वाले शीर्ष तीन देशों में शामिल है।
    समुद्री परिवहन वैश्विक व्यापार के आयतन का लगभग 90–95% वहन करता है, और विश्व भर में 18 लाख से अधिक समुद्री नाविक वाणिज्यिक जहाज़ों का संचालन करते हैं।

परित्याग के पीछे कारण 

  • वित्तीय दबाव : उच्च परिचालन लागत, अस्थिर मालभाड़ा दरें, ऋण, दिवालियापन अथवा भू-राजनीतिक संघर्ष के कारण जहाज़ के स्वामी जहाज़ों को परित्यक्त छोड़ सकते हैं।
  • सुविधा के ध्वज (Flag of Convenience – FOC): FOC प्रणाली जहाज़ों को ऐसे देशों में पंजीकरण की अनुमति देती है जहाँ नियम अपेक्षाकृत शिथिल तथा कर कम होते हैं, जिससे श्रम संरक्षण कमजोर हो जाता है।
    • वैश्विक वाणिज्यिक जहाज़ बेड़े का लगभग 30% FOC ध्वजों के अंतर्गत संचालित होता है।
    • वर्ष 2024 में परित्यक्त जहाज़ों में से लगभग 90% FOC के अंतर्गत पंजीकृत थे।
    • वर्ष 2025 में ध्वज-राज्यों में पनामा में परित्याग के सर्वाधिक मामले दर्ज किए गए।

प्रभाव 

  • परित्यक्त नाविकों को प्रायः वेतन की हानि और भारी भर्ती ऋण का सामना करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त भोजन, ईंधन और पेयजल की कमी तथा वीज़ा या बंदरगाह प्रतिबंधों के कारण जहाज़ से उतरने में असमर्थता जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
  • संघर्ष के कारण हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के निकट समुद्री परिवहन बाधित हुआ है, जिसके माध्यम से विश्व के कुल तेल व्यापार का लगभग पाँचवाँ हिस्सा गुजरता है।
  • भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 90% आवश्यकता आयात करता है, जिसमें से 46–55% पश्चिम एशिया से प्राप्त होता है।
    • तेल की कीमतों में 10 डॉलर की वृद्धि भारत के चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) को लगभग 0.36 प्रतिशत अंक तक बढ़ा सकती है।

स्रोत: TH

 

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