महाद्वीपीय मैंटल भूकंप
पाठ्यक्रम: GS1/भूगोल
समाचार में
- स्टैनफोर्ड के शोधकर्ताओं ने एक दुर्लभ प्रकार के भूकंप का प्रथम वैश्विक मानचित्र तैयार किया है, जो पृथ्वी की भू-पर्पटी (crust) में नहीं बल्कि गहराई में मैंटल में उत्पन्न होता है।
महाद्वीपीय मैंटल भूकंप
- स्थान: ये विश्वभर में होते हैं, किंतु क्षेत्रीय रूप से समूहित पाए जाते हैं, विशेषकर दक्षिण एशिया में हिमालय के नीचे और एशिया तथा उत्तरी अमेरिका के बीच बेरिंग जलडमरूमध्य के नीचे।
- गहराई: अधिकांश भूकंप पृथ्वी की पर्पटी में 10–29 किमी की गहराई पर होते हैं, लेकिन मैंटल भूकंप इससे कहीं गहरे—80 किमी से अधिक गहराई पर, भू-पर्पटी-मैंटल सीमा (मोहोरोविसिक असंततता/ Moho) के नीचे होते हैं।
नवीनतम अध्ययन
- शोधकर्ताओं ने Sn तरंगों (मैंटल) और Lg तरंगों (भू-पर्पटी) के अंतर का उपयोग कर भूकंपीय आँकड़ों से मैंटल भूकंपों की विश्वसनीय पहचान की।
- 1990 से अब तक दर्ज 46,000 भूकंपों में से 459 को मैंटल भूकंप के रूप में पुष्टि की गई; वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है।
महत्व
- यह अध्ययन भूकंप की उत्पत्ति और पृथ्वी की सतह के नीचे उसके कार्य-प्रणाली पर नए दृष्टिकोण प्रदान करेगा।
- इन भूकंपों का अध्ययन भूकंप यांत्रिकी और पृथ्वी की आंतरिक संरचना को समझने में सहायक है।
- शोधकर्ता यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या ये भूकंप पर्पटी भूकंपों से उत्पन्न तनाव के कारण होते हैं या मैंटल की ऊष्मा-प्रेरित प्रक्रियाओं से, जिससे पर्पटी और मैंटल की परस्पर क्रिया को बेहतर समझा जा सके।
स्रोत: DTE
गृह मंत्रालय द्वारा वंदे मातरम् पर दिशा-निर्देश
पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था एवं शासन
संदर्भ
- गृह मंत्रालय (MHA) ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि जब राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् और राष्ट्रीय गान दोनों आधिकारिक कार्यक्रमों में प्रस्तुत किए जाएँ, तो वंदे मातरम् पहले गाया/बजाया जाए।
प्रमुख दिशा-निर्देश
- गाने या बजाने के अवसर:
- राष्ट्रपति के आगमन और प्रस्थान पर औपचारिक राज्य समारोहों में।
- राष्ट्रपति के राष्ट्र को संबोधन से पूर्व और पश्चात में।
- राज्य समारोहों में राज्यपाल/उप-राज्यपाल के आगमन और प्रस्थान पर।
- जब राष्ट्रीय ध्वज परेड में लाया जाता है।
- अन्य अवसर जो भारत सरकार द्वारा निर्दिष्ट किए जाएँ।
- प्रोटोकॉल:
- आधिकारिक संस्करण लगभग 3 मिनट 10 सेकंड का होगा।
- वंदे मातरम् के सभी छह पद, जिनमें वे चार पद भी शामिल हैं जिन्हें 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति ने अलग रखा था, बजाए जाएँगे।
संवैधानिक एवं कानूनी ढाँचा
- राष्ट्रीय प्रतीकों की स्थिति: 24 जनवरी 1950 को वंदे मातरम् के पूर्व दो पदों को भारत का राष्ट्रीय गीत अपनाया गया।
- संविधान में “राष्ट्रीय गीत” की स्पष्ट परिभाषा नहीं है, इसका मान्यता स्रोत संविधान सभा की चर्चाएँ और कार्यपालिका की परंपरा है।
- अनुच्छेद 51A(a) मौलिक कर्तव्य: प्रत्येक नागरिक को संविधान का पालन करने और उसके आदर्शों एवं संस्थाओं, राष्ट्रीय ध्वज एवं राष्ट्रीय गान का सम्मान करने का निर्देश देता है।
- वंदे मातरम् को किसी संवैधानिक प्रावधान द्वारा स्पष्ट रूप से संरक्षित नहीं किया गया है।
| वंदे मातरम् – वंदे मातरम् का रचनाकर्म बंकिमचंद्र चटर्जी ने संस्कृत में किया और यह प्रथम बार 1882 में उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित हुआ – आनंदमठ 1769–73 के बंगाल अकाल और संन्यासी विद्रोह की पृष्ठभूमि पर आधारित है।1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा प्रथम बार गाया गया, जिससे इसे राष्ट्रीय पहचान मिली।1905 के स्वदेशी आंदोलन के दौरान वंदे मातरम् नागरिक प्रतिरोध का गान बनकर उभरा।राजनीतिक नारे के रूप में वंदे मातरम् का प्रथम उपयोग 7 अगस्त 1905 को हुआ। |
स्रोत: TH
भारत–अमेरिका व्यापार समझौते पर अमेरिकी बयान से संवेदनशील बिंदु प्रतिस्थापित
पाठ्यक्रम: GS2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध; GS3/कृषि
संदर्भ
- अमेरिका ने भारत के साथ व्यापार समझौते पर जारी तथ्यों की सूची को संशोधित किया है।
परिचय
- अमेरिकी उत्पादों की खरीद: पहले संस्करण में कहा गया था कि भारत ने अधिक अमेरिकी उत्पाद खरीदने और “500 अरब डॉलर से अधिक अमेरिकी ऊर्जा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, कोयला और अन्य उत्पाद” खरीदने का वचन दिया है। संशोधित संस्करण में “प्रतिबद्ध(committed}” शब्द को “प्रयोजन(intends)” से बदल दिया गया।
- दलहन: तथ्यों की सूची के एक हिस्से में कुछ दलहनों को उन कृषि उत्पादों में शामिल किया गया था जिन पर भारत ने शुल्क कम करने का वचन दिया था। संयुक्त बयान में दलहन का उल्लेख नहीं था और संशोधित सूची से इसे हटा दिया गया।
- डिजिटल सेवाएँ: पहले कहा गया था कि भारत अपनी डिजिटल सेवा कर हटाएगा और द्विपक्षीय डिजिटल व्यापार नियमों पर बातचीत करेगा। संशोधित सूची से यह हिस्सा पूरी तरह हटा दिया गया।
तथ्यों की सूची संशोधित करने के कारण
- अमेरिकी उत्पादों की खरीद पर स्पष्टता: 500 अरब डॉलर की राशि ने किसानों में कृषि आयात की अचानक वृद्धि को लेकर चिंता उत्पन्न की। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह आँकड़ा कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है क्योंकि आदेश निजी कंपनियों द्वारा दिए जाते हैं, न कि सरकारों द्वारा।
- दलहन का हटाया जाना: यह उस समय हुआ जब भारत सरकार इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है।
- भारत के लिए कृषि क्षेत्र में बाज़ार पहुँच लंबे समय से व्यापार समझौता वार्ताओं में संवेदनशील मुद्दा रहा है। किसान परंपरागत रूप से कृषि को बहुपक्षीय और द्विपक्षीय समझौतों से बाहर रखने की माँग करते रहे हैं, पश्चिमी देशों में दी जाने वाली भारी सब्सिडियों का उदाहरण देते हुए।
स्रोत: IE
ड्राफ्ट डिफेन्स एक्विज़िशन प्रोसीजर (DAP)-2026
पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा
संदर्भ
- रक्षा विभाग ने ‘डिफेन्स एक्विज़िशन प्रोसीजर (DAP)-2026’ का प्रारूप तैयार किया है।
विवरण
- प्रस्तावित प्रारूप का उद्देश्य भारत की रक्षा खरीद प्रणाली को तीव्रता से बदलते भू-रणनीतिक परिदृश्य के अनुरूप बनाना है।
- यह रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का आधारस्तंभ है और डिफेन्स एक्विज़िशन प्रोसीजर-2020 को प्रतिस्थापित करेगा।
- इसमें ‘Buy (Indian-IDDM)’ (स्वदेशी रूप से डिज़ाइन, विकसित और निर्मित) श्रेणी को संस्थागत प्राथमिकता दी गई है, जिससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और आयात में प्रभावी कमी होगी।
- आयात केवल उन उपकरणों तक सीमित होंगे जो देश में उपलब्ध नहीं हैं और अत्यंत आवश्यक हैं।
महत्व
- स्वदेशी सामग्री (IC) और स्वदेशी डिज़ाइन (ID) के व्यावहारिक मूल्यांकन तथा भारत में बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) के संरक्षण पर बल।
- MSMEs, स्टार्टअप्स और निजी उद्योग की भागीदारी को प्रोत्साहित करने हेतु वित्तीय एवं अनुभव संबंधी मानदंडों में सहजता।
- शक्तियों के विकेंद्रीकरण, परीक्षण एवं गुणवत्ता आश्वासन में सुधार और प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण के माध्यम से तीव्र अधिग्रहण को बढ़ावा।
स्रोत: TH
उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS)
पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
समाचार में
- संघीय बजट 2026-27 के दौरान वित्त मंत्री ने घोषणा की कि विदेश में शिक्षा और चिकित्सा व्ययों हेतु उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS) के अंतर्गत स्रोत पर एकत्र कर (TCS) को 5% से घटाकर 2% किया जाएगा।
उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS)
- यह योजना 2004 में शुरू की गई थी, जिसकी सीमा USD 25,000 थी।
- समय-समय पर सीमा को प्रचलित व्यापक और सूक्ष्म आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप संशोधित किया गया।
- वर्तमान में निवासी व्यक्ति, जिनमें नाबालिग भी शामिल हैं, प्रति वित्तीय वर्ष $2,50,000 तक स्वतंत्र रूप से प्रेषण कर सकते हैं, जो अनुमत चालू या पूंजी खाता लेनदेन या दोनों का संयोजन हो सकता है।
- इन लेनदेन में शिक्षा, विदेश में चिकित्सा उपचार, संपत्ति की खरीद और विदेशी शेयरों में निवेश शामिल हैं।
योजना के अंतर्गत निषिद्ध वस्तुएँ
- अनुसूची-I के अंतर्गत प्रतिबंधित गतिविधियों (जैसे लॉटरी टिकट या प्रतिबंधित पत्रिकाएँ) या FEMA की अनुसूची-II के अंतर्गत सीमित गतिविधियों के लिए प्रेषण निषिद्ध है।
- विदेशी विनिमय में ट्रेडिंग, भारतीय कंपनियों के FCCBs की विदेशी द्वितीयक बाज़ार में खरीद या विदेशी एक्सचेंजों पर मार्जिन कॉल हेतु प्रेषण की अनुमति नहीं है।
- FATF द्वारा निर्दिष्ट गैर-सहकारी देशों, RBI द्वारा आतंकवाद जोखिम के रूप में चिह्नित व्यक्तियों/संस्थाओं को प्रेषण और किसी अन्य निवासी के विदेशी खाते में विदेशी मुद्रा उपहार देना भी निषिद्ध है।
स्रोत: LM
भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (CPI)
पाठ्यक्रम: GS2/शासन
संदर्भ
- ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने हाल ही में 2025 का भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (CPI) प्रकाशित किया है।
भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक
- यह सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के अनुमानित स्तर को विशेषज्ञों और व्यापारिक नेताओं के आकलन के आधार पर मापता है।
- अंक शून्य से 100 तक होते हैं, जहाँ शून्य अत्यधिक भ्रष्टाचार और 100 स्वच्छ सार्वजनिक क्षेत्र को दर्शाता है।
प्रमुख आँकड़े
- पद्धति: सूचकांक ने 182 देशों का मूल्यांकन किया, शून्य (अत्यधिक भ्रष्ट) से 100 (अत्यंत स्वच्छ) के पैमाने पर।
- प्रवृत्ति: वैश्विक स्तर पर भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, यहाँ तक कि उन्नत लोकतंत्रों में भी। 10 वर्ष पूर्व 80 से अधिक अंक पाने वाले देशों की संख्या 12 थी, जो अब घटकर केवल 5 रह गई है।
- वैश्विक औसत अंक गिरकर 42/100 हो गया है, जो विगत दस वर्षों में सबसे कम है।
- 122 देश (कुल का दो-तिहाई से अधिक) ने 50 से कम अंक प्राप्त किए।
- श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले देश: डेनमार्क (89 अंक) लगातार आठवें वर्ष शीर्ष पर, इसके बाद फ़िनलैंड (88) और सिंगापुर (84)।
- सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले देश: दक्षिण सूडान और सोमालिया (दोनों 9 अंक) 181वें स्थान पर।
- भारत का प्रदर्शन: 2025 में भारत 91वें स्थान पर रहा, 39/100 अंक प्राप्त किए, जो विगत वर्ष से हल्का सुधार है।
स्रोत: IE
भारत की प्रथम संगीतमय सड़क
पाठ्यक्रम: GS2/सरकारी पहल
संदर्भ
- मुंबई की कोस्टल रोड ने भारत की प्रथम संगीतमय सड़क प्रस्तुत की है, जो अवसंरचना और प्रौद्योगिकी-आधारित सार्वजनिक अनुभव को जोड़ने का अभिनव उदाहरण है।
परिचय
- नारिमन पॉइंट और वर्ली के बीच 500-मीटर का खंड, जिसे संगीत मार्ग नाम दिया गया है, पर वाहन 60–80 किमी/घंटा की गति से चलते समय ऑस्कर विजेता गीत “जय हो” बजता है।
- इस अवधारणा में विशेष रूप से निर्मित रंबल स्ट्रिप्स का उपयोग किया गया है, जिन्हें डामर पर सटीक अंतराल पर उकेरा गया है।
- जब वाहन इन खाँचों पर चलते हैं, तो टायर और सड़क सतह के बीच घर्षण से कंपन उत्पन्न होते हैं। ये कंपन ध्वनि तरंगें बनाते हैं, जो मिलकर धुन का पुनरुत्पादन करती हैं, जिसे वाहन के अंदर यात्री सुन सकते हैं।
- यह अवधारणा हंगरी की तकनीक पर आधारित है और पहले हंगरी, जापान, दक्षिण कोरिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में लागू की जा चुकी है।
स्रोत: TH
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संक्षिप्त समाचार 12-02-2026