भारत द्वारा वर्ष 2028 में COP 33 की मेजबानी के लिए अपनी अभिरुचि वापस 

पाठ्यक्रम: GS3/ पर्यावरण

संदर्भ

  • भारत ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय (UNFCCC) प्रक्रिया के अंतर्गत COP33 (2028) की मेज़बानी हेतु अपना प्रत्याशीपन वापस ले लिया है।

वापसी के संभावित कारण

  • प्रशासनिक भार: COP जैसे आयोजन की मेज़बानी हेतु व्यापक अवसंरचना, सुरक्षा और वित्तीय व्यय की आवश्यकता होती है।
    • प्रस्तावित 2030 राष्ट्रमंडल खेलों (अहमदाबाद) जैसे अन्य बड़े अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों की तैयारियों में भी समान प्रशासनिक और वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होगी।
  • राजनीतिक समय: वर्ष 2028, 2029 लोकसभा चुनावों के निकट है, जो प्रशासनिक, राजनीतिक और तार्किक व्यस्तताओं का गहन काल होता है।

भारत की वापसी का प्रभाव

  • COP33 की मेज़बानी से पीछे हटने पर भारत एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच से वंचित हो जाता है, जहाँ वह जलवायु वार्ताओं में वैश्विक दक्षिण का नेतृत्व प्रदर्शित कर सकता था।
  • भारत को नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा संक्रमण और सतत विकास पहलों में अपनी प्रगति को वैश्विक समुदाय के समक्ष उजागर करने का अवसर नहीं मिलेगा।
  • यह निर्णय दक्षिण एशिया की जलवायु संवेदनशीलताओं पर वैश्विक ध्यान को सीमित कर सकता है।
  • ऐसे वैश्विक आयोजनों की मेज़बानी जलवायु वित्त, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करती है, जो अब अपेक्षाकृत बाधित हो सकते हैं।

COP (कॉन्फ़्रेंस ऑफ़ पार्टीज़) क्या है?

  • कॉन्फ़्रेंस ऑफ़ पार्टीज़ (COP) संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय (UNFCCC) की वार्षिक सर्वोच्च निर्णय-निर्माण संस्था है।
    • इसमें लगभग 200 देश एकत्र होकर वैश्विक जलवायु कार्रवाई, जलवायु वित्त और उत्सर्जन कटौती प्रतिबद्धताओं पर वार्ता करते हैं।
    • प्रथम COP सत्र मार्च 1995 में बर्लिन, जर्मनी में आयोजित हुआ था।
  • बैठकें: COP प्रत्येक वर्ष मिलती है, जब तक कि पक्षकार अन्यथा निर्णय न लें।
    • COP अध्यक्षता पाँच मान्यता प्राप्त UN क्षेत्रों (अफ्रीका, एशिया-प्रशांत, लैटिन अमेरिका और कैरेबियन, मध्य एवं पूर्वी यूरोप, पश्चिमी यूरोप और अन्य) के बीच घूमती रहती है।
    • COP की बैठकें सामान्यतः बॉन में होती हैं, जब तक कोई पक्षकार सत्र की मेज़बानी की पेशकश न करे।

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय (UNFCCC)

  • UNFCCC तीन रियो अभिसमयों में से एक है, जिसे 1992 के पृथ्वी सम्मेलन में जैव विविधता अभिसमय (CBD) और मरुस्थलीकरण से मुकाबला अभिसमय (UNCCD) के साथ अपनाया गया था।
  • यह 1994 में प्रभावी हुआ।
  • इसका मुख्य उद्देश्य वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की सांद्रता को स्थिर करना है, ताकि जलवायु प्रणाली पर खतरनाक मानवजनित हस्तक्षेप रोका जा सके।
  • सचिवालय: UNFCCC सचिवालय बॉन, जर्मनी में स्थित है।
  • प्रमुख साधन:
    • क्योटो प्रोटोकॉल (1997): विकसित देशों के लिए उत्सर्जन लक्ष्य निर्धारित किए।
    • पेरिस समझौता (2015): एक ऐतिहासिक सार्वभौमिक समझौता, जिसका उद्देश्य औद्योगिक-पूर्व स्तरों से ऊपर वैश्विक तापमान वृद्धि को 2°C से काफी नीचे, और अधिमानतः 1.5°C तक सीमित करना है।
  • वित्तीय तंत्र: विकासशील देशों की सहायता हेतु ग्रीन क्लाइमेट फंड (GCF), ग्लोबल एनवायरनमेंट फैसिलिटी (GEF), और एडाप्टेशन फंड जैसे कोषों का प्रबंधन और समन्वय करता है।

हाल के COP सम्मेलन

  • COP27: शर्म अल-शेख, मिस्र (2022)।
  • COP28: दुबई, संयुक्त अरब अमीरात (2023) – “UAE Consensus” जिसमें जीवाश्म ईंधनों से संक्रमण पर बल।
  • COP29: बाकू, अज़रबैजान (2024)।
  • COP30: बेलें, ब्राज़ील (2025)।
  • COP31: अंताल्या, तुर्किये (2026) में प्रस्तावित।

Source: DTE

 

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